सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद के ध्वस्तीकरण का मामला अब संयुक्त राष्ट्र महासभा तक पहुंच गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने 25 सितंबर को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए भारत में धार्मिक असहिष्णुता और इस्लामोफोबिया का मुद्दा उठाया। अपने भाषण में उन्होंने सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित करीब 150 साल पुरानी मस्जिद के ध्वस्तीकरण को भी इसका उदाहरण बताया।
शहबाज ने कहा कि दुनिया में इस्लामोफोबिया बढ़ रहा है और मुसलमानों को नफरत, भेदभाव, मस्जिदों पर हमलों और कुरान के अपमान का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने भारत में ‘आरएसएस से प्रेरित हिंदुत्व विचारधारा’ पर धार्मिक नफरत, सांप्रदायिक हिंसा और धार्मिक स्थलों पर हमलों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। इसके बाद उन्होंने सहारनपुर की मस्जिद के ध्वस्तीकरण का जिक्र करते हुए कहा कि धार्मिक नफरत के लिए दुनिया में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
शहबाज के बयान पर विकास त्यागी का पलटवार
शहबाज शरीफ के इस बयान पर मामले के शिकायतकर्ता और बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। त्यागी ने कहा कि सहारनपुर का मामला भारत का स्थानीय प्रशासनिक और न्यायिक मामला है।
इसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच से टिप्पणी करना भारत के आंतरिक मामलों में दखल है। उन्होंने कहा कि मस्जिद को हटाने की कार्रवाई किसी राजनीतिक या धार्मिक दबाव में नहीं हुई, बल्कि सक्षम न्यायिक प्रक्रिया के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की है।
त्यागी ने कहा कि जिस मामले को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अंतरराष्ट्रीय मंच पर धार्मिक उत्पीड़न के उदाहरण के तौर पर पेश कर रहे हैं, उसमें पहले शिकायत हुई, फिर प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई हुई और इसके बाद न्यायालय में अपील का मौका भी दिया गया।
सिटी मजिस्ट्रेट ने 16 जुलाई 2026 को कलेक्ट्रेट परिसर की संरचना को सरकारी जमीन पर अनधिकृत निर्माण मानते हुए हटाने का आदेश दिया था। इसके खिलाफ मस्जिद कमेटी ने जिला अदालत में अपील की, जिसे 2 सितंबर को खारिज कर दिया गया। इसके बाद 5 सितंबर की सुबह भारी सुरक्षा के बीच ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
त्यागी बोले- पाकिस्तान पहले अपने यहां अल्पसंख्यकों की स्थिति देखे
विकास त्यागी ने पाकिस्तान पर पलटवार करते हुए कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को भारत की न्यायिक प्रक्रिया पर टिप्पणी करने से पहले अपने देश में हिंदू और सिख अल्पसंख्यकों तथा उनके धार्मिक स्थलों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में मंदिरों और गुरुद्वारों से जुड़े विवाद तथा अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान द्वारा भारत के एक न्यायिक-प्रशासनिक मामले को संयुक्त राष्ट्र में उठाना दोहरे मापदंड को दर्शाता है।
त्यागी ने पहलगाम आतंकी हमले का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में आतंकवाद और धार्मिक पहचान के आधार पर हुई हिंसा को लेकर पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं। उनका कहना है कि ऐसे देश के प्रधानमंत्री को भारत की कानून व्यवस्था और धार्मिक स्वतंत्रता पर टिप्पणी करने के बजाय अपने देश के हालात पर ध्यान देना चाहिए।
कलेक्ट्रेट परिसर में सरकारी जमीन पर निर्माण का था विवाद
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर विवाद वर्ष 2025 में शुरू हुआ था। बजरंग दल के तत्कालीन क्षेत्रीय संयोजक विकास त्यागी ने सिटी मजिस्ट्रेट के समक्ष शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि कलेक्ट्रेट जैसे संवेदनशील सरकारी परिसर में मस्जिद का निर्माण सरकारी जमीन पर अनधिकृत तरीके से किया गया है।
प्रशासनिक कार्रवाई के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने 16 जुलाई 2026 को इसे अनधिकृत निर्माण मानते हुए हटाने का आदेश दिया। मस्जिद कमेटी ने इस आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी, लेकिन 2 सितंबर को अपील खारिज हो गई। इसके बाद 5 सितंबर को प्रशासन ने ध्वस्तीकरण कराया। कार्रवाई के दौरान कलेक्ट्रेट के सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए थे और पीएसी तथा आरएएफ समेत भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।
ध्वस्तीकरण के बाद मलबे में मिला था कुआं
मस्जिद हटाने के बाद मलबे के नीचे करीब 20 फीट गहरा और लगभग 1.5 मीटर चौड़ा कुआं भी मिला था। प्रशासन के मुताबिक मलबा हटाते समय मशीन एक स्लैब पर अटक गई थी, जिसके बाद उसे हटाने पर कुआं सामने आया। इसको लेकर भी विवाद बढ़ा। विकास त्यागी ने कुएं की उम्र और इतिहास की जांच कराने तथा पुरातत्व विभाग से मौके का परीक्षण कराने की मांग की थी। उनका कहना था कि यह संभव है कि पुराने किसी पूजित स्थान को हटाकर बाद में निर्माण किया गया हो। हालांकि यह उनका दावा है और इसकी स्वतंत्र पुरातात्विक पुष्टि अलग जांच का विषय है।
UN में शहबाज ने सहारनपुर को बताया धार्मिक असहिष्णुता का उदाहरण
शहबाज शरीफ ने अपने करीब 23 मिनट के भाषण में कश्मीर, इस्लामोफोबिया, फिलिस्तीन, भारत-पाकिस्तान संबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा समेत कई मुद्दे उठाए। धार्मिक स्वतंत्रता की बात करते हुए उन्होंने भारत में ‘आरएसएस से प्रेरित हिंदुत्व विचारधारा’ को धार्मिक नफरत से जोड़ा और सहारनपुर की मस्जिद के ध्वस्तीकरण को इसका उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि धार्मिक नफरत के लिए दुनिया में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
त्यागी बोले- कार्रवाई कानून के मुताबिक हुई, पाकिस्तान के बयान से फर्क नहीं पड़ेगा
विकास त्यागी ने कहा कि सहारनपुर की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय मंच पर धार्मिक भेदभाव का मामला बताना सही नहीं है। उनके अनुसार, मामला सरकारी जमीन पर निर्माण और उसके वैध-अवैध होने से जुड़ा था और इसमें न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि भारत में कानून सभी के लिए समान है और किसी भी अवैध निर्माण पर कार्रवाई कानून के अनुसार होनी चाहिए।
त्यागी ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा इस मामले को संयुक्त राष्ट्र में उठाने से सहारनपुर के घटनाक्रम की कानूनी स्थिति नहीं बदलती। उन्होंने कहा कि भारत अपने प्रशासनिक और न्यायिक मामलों का फैसला अपने कानून और संविधान के अनुसार करता है तथा किसी बाहरी देश की टिप्पणी से इसमें कोई बदलाव नहीं आएगा।
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