कुंडली के ये संकेत बताते हैं शादी में क्यों हो रही है देरी, पंडित जी ने बताया उपाय – Hindustan

शादी में देरी हो रही है और रिश्ता तय होने में बार-बार अड़चन आ रही है, तो ज्योतिष में कुंडली के कुछ योगों पर ध्यान दिया जाता है। विवाह के मामले में सातवें भाव को अहम माना जाता है। इस भाव में ग्रहों की स्थिति के साथ उसके स्वामी की दशा भी देखी जाती है। पंडित नरेंद्र उपाध्याय के मुताबिक, सातवें भाव में ग्रहों का अशुभ संयोग और सप्तमेश का कमजोर होना विवाह में देरी के संकेत दे सकता है। हालांकि, किसी एक ग्रह को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि शादी में देरी होगी। इसके लिए पूरी कुंडली का आकलन करना जरूरी है।

कुंडली में सातवां भाव विवाह और जीवनसाथी से जुड़ा होता है। इस भाव में ग्रहों की स्थिति को देखकर दांपत्य जीवन से जुड़े कई पहलुओं पर विचार किया जाता है। पंडित नरेंद्र उपाध्याय बताते हैं कि सातवें भाव में किसी एक ग्रह का होना अपने आप में परेशानी की वजह नहीं है। यहां ग्रहों के बीच बनने वाला संयोग ज्यादा मायने रखता है। अगर सातवें भाव में दो ग्रहों के बीच विरोध हो या वहां कोई अशुभ योग बन रहा हो, तो ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार विवाह में अड़चन के संकेत मिल सकते हैं। लेकिन इसका आकलन केवल ग्रहों के नाम के आधार पर नहीं किया जाता। दोनों ग्रहों की स्थिति और कुंडली में बन रहे दूसरे योगों को भी देखना जरूरी होता है।

सातवें भाव के स्वामी को सप्तमेश कहा जाता है। विवाह में देरी के योग देखते समय इसकी स्थिति पर भी ध्यान दिया जाता है। पंडित जी के अनुसार, अगर सप्तमेश किसी पाप ग्रह के साथ हो और कुंडली में अशुभ संयोग बन रहे हों, तो शादी में देरी के संकेत मिल सकते हैं। इसके अलावा, सप्तमेश का अस्त होना या बहुत कमजोर स्थिति में होना भी विवाह में देरी की वजह माना जाता है। ऐसी स्थिति में कुंडली के दूसरे योगों को देखना भी जरूरी है। केवल सप्तमेश के कमजोर होने से यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि शादी में परेशानी जरूर आएगी। विवाह से जुड़े सभी संकेतों को एक साथ देखने के बाद ही कोई राय बनानी चाहिए।

पंडित नरेंद्र उपाध्याय के मुताबिक, विवाह में देरी के संकेत मिलने पर सप्तमेश से जुड़े उपाय किए जा सकते हैं। इसके लिए संबंधित ग्रह की पूजा-पाठ कराने, वैदिक रीति से मंत्र जाप करने और उससे जुड़ी वस्तुओं का दान करने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही पंचम भाव से संबंधित रत्न धारण करने का उपाय भी बताया गया है। हालांकि, रत्न पहनने से पहले कुंडली की जांच कराना जरूरी है। बिना सही जानकारी के कोई रत्न धारण नहीं करना चाहिए। कौन सा उपाय उपयुक्त रहेगा, यह कुंडली में ग्रहों की स्थिति देखकर ही तय किया जाना चाहिए।

कुंडली में विवाह से जुड़े योगों को समझने के लिए सातवें भाव, सप्तमेश और ग्रहों के आपसी संयोग को साथ में देखना जरूरी है। पंडित जी के अनुसार, किसी एक ग्रह के आधार पर शादी में देरी का फैसला नहीं किया जा सकता। ज्योतिषीय मान्यताओं में बताए गए उपाय भी कुंडली की स्थिति के अनुसार ही किए जाते हैं।

योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।
परिचय और अनुभव
योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।
न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।
करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर
योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
पाठक किस भाषा में बात समझता है और किस तरह की जानकारी उसके लिए उपयोगी होती है—यह समझ उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे बड़ी ताकत रही है।
एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य
योगेश के लिए ज्योतिष केवल भविष्य बताने का जरिया नहीं है। वह इसे आत्मचिंतन और सही फैसलों में मदद करने वाले एक मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। इसी सोच के साथ वह राशिफल और अन्य ज्योतिषीय विषयों को संतुलित, व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को डराना नहीं, बल्कि जानकारी के जरिए उन्हें सोचने और समझने की दिशा देना है।
व्यक्तिगत रुचियां
काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise):

राशिफल (डेली एवं वीकली)
ग्रह-गोचर
दशा-महादशा
अंकज्योतिष
सामुद्रिक शास्त्र
वास्तु शास्त्र
फेंगशुई
रत्न-उपाय
व्रत-त्योहार एवं पूजा-विधि
आरएसएस विज्ञापन र॓टहमार॓ साथ कामकरेंहमारे बारे मेंसंपर्क करेंगोपनीयतासाइट जानकारी
Advertise with usAbout usCareers Privacy Contact usSitemapCode Of Ethics
Partner sites: Hindustan TimesMintHT TechShineHT Auto HealthshotsHT SmartcastFAB Play

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News