भारत और वेस्टइंडीज के बीच रांची में खेला गया दूसरा टी-20 मैच हाई-स्कोरिंग रहा। टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए जब टीम इंडिया ने बोर्ड पर 249 रन लगा दिए और मेहमान टीम के सामने 250 रनों का लक्ष्य रख दिया तब ज्यादातर लोगों ने यही सोचा होगा कि इस मुकाबले को तो भारत आसानी से जीत रहा है। लेकिन हैरानी की बात यही रही कि भारत ने इस मुकाबले में जीत दर्ज नहीं की बल्कि वेस्टइंडीज ने बाजी मारी। वेस्टइंडीज ने 250 रनों के विशाल लक्ष्य को कप्तान शाई होप के तूफानी शतक की मदद से 9 गेंद शेष रहते हुए 6 विकेट से अपने नाम कर लिया। इतना विशाल स्कोर बनाने के बाद टीम इंडिया को हार का मुंह क्यों देखना पड़ा यह एक बड़ा सवाल है। ऐसे में आइए इसकी तहकीकात करते हैं।
यह तो जाहिर बात है कि टीम इंडिया ने यह मुकाबला बल्लेबाजों की वजह से नहीं बल्कि गेंदबाजों की वजह से हारा है। इस मैच में ना तो भारत की अनुभवी स्पिन गेंदबाजी चली और ना ही तेज गेंदबाजी में अर्शदीप का कमाल दिखा। मयंक यादव को छोड़ दिया जाए तो किसी भी गेंदबाज ने प्रभावित नहीं किया। नमन धीर और शिवम दुबे जैसे गेंदबाजों को देखकर भी यह साबित हो गया कि आप इन पर पांचवें गेंदबाज के विकल्प का दांव नहीं लगा सकते और आपके पास आज भी हार्दिक पांड्या की भरपाई करने के लिए शिवाय हार्दिक पांड्या के कोई नहीं है, नीशीत रेड्डी भी नहीं। सूर्यांश शेडेगे, शिवम दुबे और अन्य क्रिकेटरों की तो बात ही छोड़ दी जाए। भारत की हार के प्रमुख कारण क्या रहे विस्तार से पढ़िए-
रांची में खेले गए दूसरे टी-20 मैच में भारतीय स्पिनरों का बिल्कुल भी कमाल देखने को नहीं मिला। वनडे में जहां एक तरफ रनों की बारिश हो रही थी, वहीं दूसरी तरफ कुलदीप यादव अपनी प्रभावशाली गेंदबाजी से सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किए हुए थे। उन्हें वरुण चक्रवर्ती की अनुपस्थिति में टी-20 टीम में खेलने की जगह मिली, लेकिन वे इस मुकाबले में पूरी तरह से अप्रभावी रहे। चाइना मैन के नाम से मशहूर बाएं हाथ के कलाई स्पिनर ने आज के मुकाबले में चार ओवर की गेंदबाजी की जिसमें 13.20 की इकोनॉमी के साथ 53 रन दिए और 1 विकेट हासिल किया। यह कुलदीप यादव के स्टैंडर्ड के अनुसार काफी निचले स्तर का प्रदर्शन रहा। आज के मुकाबले में जिस एक गेंदबाज की सबसे ज्यादा पिटाई हुई उसका नाम अक्षर पटेल है। बाएं हाथ के फिंगर स्पिनर ने कैरेबियाई टीम के सामने शुक्रवार को 3.3 ओवर की गेंदबाजी की, जिसमें 63 रन दे दिए। उन्होंने 18 रन प्रति ओवर के हिसाब से खर्चे। उनका इकॉनोमी रेट 18 का रहा जो सबसे खराब है। अक्षर पटेल और कुलदीप यादव का अप्रभावी होना भारत की हार का सबसे बड़ा कारण रहा।
शिवम दुबे और नमन धीर पांचवें गेंदबाज की भूमिका में थे। दोनों ने मिलकर 2-2 ओवर की गेंदबाजी की और चार ओवर का कोटा पूरा किया। इन चार ओवरों में दोनों ने मिलकर 55 रन दिए। नमन धीर ने दो ओवर की गेंदबाजी में 12.50 की इकोनॉमी के साथ 25 रन दिए, जबकि शिवम दुबे ने 2 ओवर में 30 रन 15 की इकोनॉमी से दिए। इन दोनों गेंदबाजों की पिटाई ने यह साबित कर दिए कि भारत पांचवें गेंदबाज के लिए कामचलाउं विकल्पों पर भरोसा नहीं कर सकता। या तो हार्दिक पांड्या को लाना होगा और जब तक वे फिट नहीं होते तब तक एक अतिरिक्त गेंदबाज खिलाने पर तरजीह दी जा सकती है। नमन धीर और दुबे की गेंदबाजी भारत की हार का बड़ा कारण रही। इन दोनों ने पांचवें गेंदबाज के विकल्प के रूप में भारत के सामने एक नई परेशानी खड़ी की और सवाल भी उत्पन्न किए।
तेज गेंदबाजी यूनिट में मयंक यादव ने दमदार प्रदर्शन किया। उन्होंने 3 ओवर में 36 रन देकर तीन विकेट हासिल किए। हालांकि, मैच एक ओवर पहले खत्म होने के कारण मयंक को अपना कोटा पूरा करने का मौका नहीं मिला। मयंक के अलावा सिर्फ कुलदीप को 1 विकेट मिला। इन दोनों के अतिरिक्त किसी ने विकेट ही नहीं लिया। मयंक यादव के सीनियर गेंदबाजी पार्टनर अर्शदीप सिंह मुकाबले में पूरी तरह बेअसर दिखे। उन्होंने चार ओवर में 45 रन दिए 11.20 की इकॉनोमी के साथ दिए लेकिन एक भी विकेट हासिल नहीं किया। अशर्दीप का बेसअर होना भारत की हार का एक और बड़ा कारण रहा।
बेशक भारत की गेंदबाजी यूनिट ने खराब प्रदर्शन किया, लेकिन वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी यूनिट का भी इस जीत में उतना ही योगदान है। वेस्टइंडीज की इस ऐतिहासिक जीत में सबसे बड़ा योगदान उनके कप्तान शाई होप का है। उन्होंने 45 गेंदों में 102 रनों की नाबाद पारी खेली, जिसमें 6 चौके और 9 छक्के जड़े। उन्होंने 226.67 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की। शेरफेन रदरफोर्ड की तारीफ करनी पड़ेगी जिन्होंने 37 गेंदों में 84 रन 7 चौके और 7 छक्कों की मदद से बनाए। उन्होंने 227 से अधिक की स्ट्राइक रेट के साथ बल्लेबाजी की। रोमारियो शेफर्ड ने अंत में 13 गेंदों में 34 रन बनाकर अपनी पावर हिटिंग का परिचय दिया। उन्होंने 3 छक्के और तीन चौके लगाए और 261 से अधिक की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की। रोवमैन पॉवेल ने भी 13 गेंदों में 24 रन बनाए। इन चारों बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों को घुटने टेकने पर विविश कर दिया।
बता दें कि इससे पहले टॉस जीतकर बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम की ओर से संजू सैमसन ने 41 गेंदों में 82 रनों की पारी खेली थी। तिलक वर्मा, श्रेयस अय्यर और ईशान किशन ने भी धारदार बल्लेबाजी की थी और स्कोर को 250 के लक्ष्य तक पहुंचाया था लेकिन कैरिबियाई बल्लेबाजों ने अपनी पावर हिटिंग का प्रदर्शन करते हुए इन सभी भारतीय बल्लेबाजों की मेहनत पर पानी फेर दिया। मुकाबले में ईशान किशन ने 22 गेंदों में 42 रन, श्रेयस अय्यर ने 18 गेंदों में 40 रन, तिलक वर्मा ने 18 गेंदों में 44 रन बनाए। अभिषेक शर्मा के बल्ले से 12 गेदों में 20 रन बने। शिवम दुबे के लिए आज का दिन बल्लेबाजी से भी अच्छा नहीं रहा था। उन्होंने 10 गेंदों में 7 रनों का योगदान दिया था।
विमलेश कुमार भुर्तिया (Vimlesh Kumar Bhurtiya): खेल पत्रकार
संक्षिप्त विवरण
विमलेश कुमार भुर्तिया पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) नई दिल्ली से पत्रकारिता की पढ़ाई की है।
विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव: विमलेश कुमार भुर्तिया भारतीय डिजिटल मीडिया जगत का एक उभरता हुआ नाम हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 4 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। वर्तमान में, वह भारत के अग्रणी समाचार संस्थान ‘लाइव हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्पोर्ट्स टीम में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पिछले चार वर्षों से वह इसी संस्थान से जुड़े हुए हैं और डिजिटल मीडिया की गतिशीलता, कार्यशैली और प्रकृति को समझने का प्रयास किया है। उनका मानना है कि पाठक किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की रीढ़ होता है ऐसे में उनके हितों को ध्यान में रखते हुए खबरों का प्रकाशन होना चाहिए। यह पत्रकारिता को जीवंत रखता है और जर्नलिज्म का मूल गुण भी यही है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
विमलेश ने भारत के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान से अपनी शिक्षा ग्रहण की है। वे 2021-22 बैच के भारतीय जनसंचार संस्थान नई दिल्ली के छात्र रहे हैं। उन्होंने इस नामी संस्थान से रेडियो एवं टेलीविजन पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है। इसके बाद उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में ही मास्टर्स यानी (M.A) की डिग्री भी हासिल की है। इन्होंने अपना ग्रेजुएशन मध्य प्रदेश के नामचीन साइंस कॉलेजों में से एक होलकर साइंस कॉलेज से किया है। ग्रेजुएशन के दूसरे साल से ही विमलेश की दिलचस्पी साहित्य और पत्रकारिता की ओर जागृत होने लगी थी। यही कारण था कि ग्रेजुएशन के दिनों में ही उन्होंने दैनिक चैतन्यलोक नामक इंदौर की क्षेत्रीय पत्रिका में काम करना शुरू कर दिया। कुछ महीनों बाद उन्होंने दैनिक भास्कर में बतौर कॉपी एडिटर ट्रेनिंग ली। उन्होंने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर के पत्रकारिता और जनसंचार विभाग से मास मीडिया में इंटर्नशिप की। विमलेश कुमार भुर्तिया को कंप्यूटर का भी अच्छा ज्ञान है। उन्होंने भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा किया है।
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