नेपाल में भीषण बाढ़ से तबाही ने हिमालयी क्षेत्र में प्रोजेक्ट्स से जुड़े जोखिमों को फिर सामने ला दिया है। तेज बारिश, भूस्खलन, चट्टानों के खिसकने और नदियों के उफान ने नेपाल में घरों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया। हिमालय की भौगोलिक संरचना पहले से ही बेहद संवेदनशील है और यहां किसी प्राकृतिक घटना का असर तेजी से बड़े आपदा रूप में बदल सकता है। ऐसे में चीन की यरलुंग त्संगपो नदी पर बन रही विशाल जलविद्युत परियोजना को लेकर भारत की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। यह नदी भारत में ब्रह्मपुत्र कहलाती है।
चीन ने तिब्बत के मेडोग क्षेत्र में यरलुंग त्संगपो नदी के निचले हिस्से में दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक का निर्माण शुरू किया है। इसे चीन का मेगा डैम बताया जाता है। करीब 50 किलोमीटर के क्षेत्र में नदी लगभग 2,000 मीटर नीचे गिरती है, जिससे यहां बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन की क्षमता है। प्रोजेक्ट में 5 जलविद्युत केंद्रों की श्रृंखला प्रस्तावित है और इससे सालाना 300 अरब किलोवाट-घंटे से अधिक बिजली उत्पादन का अनुमान है। इसकी लागत करीब 1.2 ट्रिलियन युआन यानी लगभग 167.8 अरब डॉलर बताई गई है। इस प्रोजेक्ट का स्थान भूकंप, भूस्खलन और भूगर्भीय हलचलों के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है।
भारत की सबसे बड़ी चिंता यह नहीं है कि चीन ब्रह्मपुत्र का पानी पूरी तरह रोक सकता है। ज्यादा अहम सवाल नदी के प्रवाह के समय और मात्रा को प्रभावित करने की क्षमता व जल संबंधी आंकड़ों की पारदर्शिता का है। चीन के बांध और जलाशय के संचालन से पानी छोड़ने के समय में बदलाव की आशंका भारत के लिए खासकर मॉनसून के दौरान अहम हो सकती है। चीनी वैज्ञानिकों ने यरलुंग त्संगपो क्षेत्र में सक्रिय भ्रंश और कमजोर चट्टानों को लेकर जोखिम जताया है। रिसर्च में भूकंप और भूस्खलन से बांध, सुरंगों, पुलों व अन्य ढांचों को खतरे की आशंका बताई गई है।
भारत के लिए यह मामला जल सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण और रणनीतिक सुरक्षा से भी जुड़ा है। ब्रह्मपुत्र अरुणाचल प्रदेश और असम से होकर गुजरती है। लाखों लोगों की कृषि, आजीविका और पारिस्थितिकी इससे जुड़ी है। अतीत में चीन की ओर से ब्रह्मपुत्र से जुड़े जल संबंधी आंकड़ों को साझा करने में रुकावट भी सामने आ चुकी है। ऐसे में भारत के लिए नियमित और विश्वसनीय जल-प्रवाह संबंधी आंकड़ों का आदान-प्रदान बेहद जरूरी है। नेपाल की बाढ़ ने यह भी दिखाया है कि हिमालय में जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियरों के पिघलने, भूस्खलन और अत्यधिक बारिश के साथ बड़े निर्माण कार्य जोखिम को और बढ़ा सकते हैं।
पत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।
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