क्या पेट्रोल-डीजल की कीमत फिर बढ़ेगी? सरकार ने कर दिया साफ – Jagran

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वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं। रुपये के कमजोर होने और तेल कंपनियो …और पढ़ें
क्या पेट्रोल-डीजल की कीमत फिर बढ़ेगी।
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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमत सोमवार को 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई मगर दूसरी तरफ घरेलू बाजार में पेट्रोल की कीमत में प्रति लीटर 2.61 रुपए तो डीजल में 2.71 रुपए की बढ़ोतरी कर दी गई। गत 15 मई से लेकर अब तक चार बार पेट्रोल व डीजल के खुदरा दाम बढ़ाए जा चुके हैं।
पेट्रोल के दाम में पिछले 10 दिनों में 7.50 रुपए प्रति लीटर का इजाफा हो चुका है। आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल के दाम में अब तक हो चुकी बढ़ोतरी से खुदरा महंगाई दर में 0.25 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी मुमकिन है।
जानकार यह भी कह रहे हैं कि पेट्रोल व डीजल के खुदरा दाम में अभी और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता है। क्योंकि डॉलर के मुकाबले रुपए के मूल्य में हो रही गिरावट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत में तेजी के रुख से घरेलू ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है।
दुनिया के सभी प्रमुख देश पिछले दो महीनों में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमत में 10 प्रतिशत से अधिक का इजाफा कर चुके हैं। अमेरिका व ईरान में समझौते को लेकर उम्मीद को देखते हुए सोमवार को कच्चे तेल की कीमत 98 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गई।
जानकारों का कहना है कि भारतीय बाजार के लिए यह कीमत भी काफी अधिक है। अमेरिका व ईरान के बीच गत 28 फरवरी को युद्ध आरंभ होने से पहले कच्चे तेल के भाव 70-80 डॉलर प्रति बैरल के बीच चल रहे थे। इस हिसाब से कच्चे तेल का मौजूदा भाव भी काफी अधिक है।
भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात करता है। डॉलर के मुकाबले रुपए के मूल्य में लगातार गिरावट से आयात के लिए अधिक रुपए का भुगतान करना पड़ रहा है। वैसे भी, कच्चे तेल की वैश्विक कीमत गत 28 फरवरी के बाद ही बढ़ने लगी थी जबकि पेट्रोल डीजल के खुदरा भाव में चार साल बाद बीते 15 मई को बढ़ोतरी की गई।
पेट्रोल-डीजल की कीमत पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है और यह तेल कंपनियां तय करती है। केंद्र सरकार के हाथ में पेट्रोल व डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में कमी या इजाफा करना है।
जानकार कह रहे हैं कि अब राज्य सरकार चाहे तो पेट्रोल व डीजल पर वैट में कटौती कर आम उपभोक्ता को राहत दे सकती है। कई राज्यों में तो 30 प्रतिशत से अधिक वैट वसूला जाता है और उनमें कटौती की जा सकती है। हालांकि पेट्रोल व डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क व वैट केंद्र व राज्य के राजस्व का प्रमुख माध्यम है।
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