क्या सच में मछलियों की गर्दन होती है? वैज्ञानिकों ने X-Ray से खोज निकाला जवाब – India.Com

अगर आपसे पूछा जाए कि क्या मछलियों की गर्दन होती है, तो शायद आपका जवाब नहीं ही होगा. स्कूल की किताबों में भी यही पढ़ाया जाता रहा है कि मछलियों के पास इंसानों या दूसरे जमीन पर रहने वाले जानवरों की तरह गर्दन नहीं होती. लेकिन अब एक नई रिसर्च ने इस सोच को चुनौती दे दी है. दरअसल वैज्ञानिकों ने एक्स-रे वीडियो तकनीक की मदद से मछलियों की हरकतों का बारीकी से रिसर्च किया. रिसर्च के दौरान उन्होंने ट्राउट मछली और सैलामैंडर जैसे जीवों को खाना खाते समय रिकॉर्ड किया. इसके बाद उनकी हड्डियों की 3D तस्वीरें तैयार की गईं. इस शोध में पता चला कि मछलियां अपनी रीढ़ की कुछ हड्डियों को इस तरह मोड़ सकती हैं कि उनका सिर शरीर से अलग होकर हिलता हुआ नजर आता है.

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यूनिवर्सिटी ऑफ लिवरपूल के वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक गर्दन की परिभाषा सिर्फ इंसानों, पक्षियों, सरीसृपों और दूसरे चार पैरों वाले जानवरों के हिसाब से तय की गई थी. लेकिन अगर गर्दन को उस हिस्से के रूप में देखा जाए जो सिर को शरीर से अलग होकर हिलने की क्षमता देता है, तो मछलियों में भी एक तरह की ‘फंक्शनल नेक’ यानी काम करने वाली गर्दन मौजूद है. रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि ट्राउट मछली खाना पकड़ने के लिए अपनी पूरी रीढ़ के बड़े हिस्से को मोड़ लेती है. वहीं कुछ दूसरी मछलियां भी सिर उठाने और दिशा बदलने के लिए अपनी रीढ़ का इस्तेमाल करती हैं. यानी उनका सिर सिर्फ शरीर के साथ नहीं चलता, बल्कि कुछ हद तक अलग तरीके से भी घूम सकता है.

वैज्ञानिकों का मानना है कि करोड़ों साल पहले जब कुछ जीव पानी से निकलकर जमीन पर रहने लगे थे, तब सिर को शरीर से अलग हिलाने की क्षमता बहुत जरूरी साबित हुई थी. नई रिसर्च बताती है कि इसकी शुरुआत शायद मछलियों में ही हो चुकी थी. अब वैज्ञानिक सैलामैंडर जैसे उभयचर जीवों पर भी इसी तरह की रिसर्च कर रहे हैं. उनका मकसद यह समझना है कि पानी में रहने वाले जीवों से लेकर जमीन पर रहने वाले जानवरों तक गर्दन का विकास कैसे हुआ. वैज्ञानिकों का कहना है कि ये खोज सिर्फ मछलियों की गर्दन तक सीमित नहीं है. इससे यह भी पता चलता है कि प्रकृति में कई ऐसी बातें हैं जिन्हें हम सालों से सच मानते आए हैं, लेकिन नई तकनीक और रिसर्च उन्हें बदल सकती है.

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