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कॉलेज की दुनिया से निकलकर कॉर्पोरेट लाइफ में कदम रखना फ्रेशर्स के लिए अक्सर उम्मीद से कहीं ज्यादा चैलेंजिंंग होता है. कागजों पर नोएडा जैसे शहरों में 9 से 6 की शिफ्ट बहुत व्यवस्थित लगती है, लेकिन असलियत में इसके पीछे लंबे काम के घंटे, मानसिक थकान और न के बराबर निजी समय जैसी कड़वी सच्चाई छिपी है. कई युवाओं के लिए वर्क-लाइफ बैलेंस का असली मतलब उनकी कल्पना से बिल्कुल अलग होता है.
पहली नौकरी का ‘रियलिटी चेक’
पहली नौकरी सिर्फ बैंक बैलेंस नहीं बढ़ाती, बल्कि यह एक ‘रियलिटी चेक’ भी देती है कि आपका समय और ऊर्जा असल में खर्च कहां हो रही है. जो काम 9 से 6 का दिखता है, वह हकीकत में कहीं ज्यादा थकाऊ और लंबा खिंच जाता है. नोएडा में रहने वाले एक युवा कंसल्टेंट ने साझा किया कि कैसे ऑफिस के घंटे खत्म होने के बाद भी काम का बोझ आपके निजी मानसिक सुकून को छीन लेता है.
21 वर्षीय आदित्य श्रीवास्तव करीब छह महीने पहले नोएडा आए थे. आदित्य बताते हैं कि तय समय पर ऑफिस जाने का विचार थोड़ा गुमराह करने वाला है. ऑफिस भले ही सुबह 9 बजे शुरू होता हो लेकिन दिन की शुरुआत बहुत पहले ही तैयार होने, भाग-दौड़ करने और काम के लिए मानसिक रूप से तैयार होने में हो जाती है. दिन ढलते-ढलते थकान इतनी बढ़ जाती है कि घर लौटने पर कुछ और करने की हिम्मत ही नहीं बचती.
शारीरिक नहीं, मानसिक थकान है चुनौती
आदित्य के अनुसार, ऑफिस के बाद होने वाली थकान सिर्फ शरीर की नहीं होती. दिनभर का मानसिक दबाव, फोकस बनाए रखना और उम्मीदों पर खरा उतरना इंसान को पूरी तरह निचोड़ देता है. इसका नतीजा यह होता है कि शाम का समय, जो कभी शौक या आराम के लिए रखा गया था, बिना किसी काम या प्रोडक्टिविटी के गुजर जाता है.
कॉर्पोरेट लाइफ के साथ-साथ एक नए शहर में अकेले रहना इस चुनौती को और बढ़ा देता है. खाना बनाना, घर के काम मैनेज करना और अकेले रूटीन बनाए रखना एक अलग तरह का दबाव डालता है. नए पेशेवरों के लिए यह दौर सिर्फ काम सीखने का नहीं, बल्कि खुद को संभालने का भी होता है.
शाम 6 बजे के बाद अपनी दुनिया बनाना जरूरी
वक्त के साथ आदित्य को समझ आया कि वर्क-लाइफ बैलेंस खुद-ब-खुद नहीं मिलता, इसे मेहनत से बनाना पड़ता है. अब वो ऑफिस के बाद जानबूझकर अपनी सेहत, पर्सनल ग्रोथ और स्किल डेवलपमेंट के लिए समय निकालते हैं. वो कहते हैं कि शाम 6 बजे के बाद आप क्या करते हैं, यह उतना ही जरूरी है जितना कि ऑफिस के घंटों में किया गया काम.
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