क्रैश के बाद संकट में एयर इंडिया, टाटा-सिंगापुर से ₹10,000 करोड़ की मदद मांगी – Hindustan

एयर इंडिया ने अपने मालिकों टाटा संस और सिंगापुर एयरलाइंस से कम से कम 100 अरब रुपये (करीब 1.14 अरब डॉलर) की वित्तीय सहायता मांगी है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक यह मदद इसलिए जरूरी मानी जा रही है, क्योंकि जून 2025 में हुए घातक विमान हादसे में 240 से अधिक लोगों की जान गई थी, जिससे एयर इंडिया की प्रतिष्ठा पर गहरा असर पड़ा है। यह हादसा कंपनी की छवि सुधारने और बेड़े को आधुनिक बनाने के प्रयासों के बीच एक बड़ा झटका साबित हुआ।
एयर इंडिया ने यह धनराशि अपने परिचालन ढांचे को फिर से तैयार करने, ग्राहकों की शिकायतों को कम करने और तकनीकी रखरखाव प्रणाली को मजबूत करने के लिए मांगी है। योजना के तहत एयरलाइन अपनी खुद की इंजीनियरिंग और मेंटेनेंस टीम खड़ी करना चाहती है ताकि बाहरी सेवा प्रदाताओं पर निर्भरता घटाई जा सके। यह कदम लंबे समय में लागत कम करने और सेवा की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद करेगा।
टाटा समूह इस एयरलाइन में 74.9 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है जबकि सिंगापुर एयरलाइंस के पास 25.1 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों मालिक वित्तीय मदद अपने स्वामित्व अनुपात के अनुसार देंगे। फिलहाल यह विचार चल रहा है कि सहायता इंटरेस्ट फ्री लोन के रूप में दी जाए या पूंजी निवेश (इक्विटी फंडिंग) के रूप में। विशेषज्ञों का मानना है कि इक्विटी निवेश से एयर इंडिया की बैलेंस शीट मज़बूत होगी, जबकि ऋण से संचालन में तत्काल तरलता (लिक्विडिटी) बढ़ेगी।
भारत का विमानन क्षेत्र फिलहाल सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी दौर में है। इंडिगो और आकाश एयर जैसी कंपनियां लगातार अपना बाजार हिस्सा बढ़ा रही हैं, वहीं एयर इंडिया अपने ब्रांड इमेज को पुनर्जीवित करने में लगी है। इस संकट के बाद उसकी प्राथमिकता सुरक्षा, ग्राहक भरोसा और संचालन कुशलता को फिर से स्थापित करने की है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह 10,000 करोड़ रुपये की मदद सफलतापूर्वक जुटाई गई, तो यह एयर इंडिया के “ट्रांसफॉर्मेशन प्लान” को नई ताकत देगी।
टाटा समूह पहले ही ‘विस्टा-ब्लूम’ नाम से एक आंतरिक पुनर्गठन परियोजना चला रहा है जिसके तहत एयर इंडिया की चार यूनिटों एयर इंडिया, एयर एशिया इंडिया, विस्तारा और एआई एक्सप्रेस को एक एकीकृत नेटवर्क में जोड़ा जा रहा है। नई धनराशि इस एकीकरण प्रक्रिया को तेज कर सकती है और कंपनी को अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर प्रतिस्पर्धी बढ़त दिला सकती है।
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