कटिहार, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि खरीफ सीजन में उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण को लेकर अक्सर उठने वाले सवालों के बीच कृषि विभाग अब पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसानों को खाद खरीदने के लिए पहले ऑनलाइन बुकिंग करानी होगी। बुकिंग के बाद जारी होने वाले क्यूआर कोड और बुकिंग आईडी के आधार पर ही अधिकृत विक्रेता से उर्वरक प्राप्त किया जा सकेगा। विभाग का दावा है कि इससे खाद वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और किसान हितैषी बनेगी。
नई प्रणाली को फर्टिलाइजर सेल्स एप्लीकेशन सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इसके माध्यम से किसानों की भूमि, फसल और वास्तविक आवश्यकता के अनुरूप उर्वरकों का वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। इससे एक ओर जहां जरूरतमंद किसानों तक समय पर खाद पहुंचेगी, वहीं दूसरी ओर कालाबाजारी, जमाखोरी और फर्जी खरीद पर प्रभावी रोक लग सकेगी।
विशेष बात यह है कि इस व्यवस्था में केवल भूमि स्वामी किसान ही नहीं, बल्कि बटाईदार, किरायेदार तथा वंशावली के आधार पर खेती करने वाले किसानों को भी शामिल किया गया है। इससे बड़ी संख्या में ऐसे किसानों को लाभ मिलेगा जो वर्षों से खेती तो कर रहे हैं, लेकिन पारंपरिक व्यवस्थाओं में कई बार वंचित रह जाते थे।
नई व्यवस्था के तहत जिन किसानों की फार्मर रजिस्ट्री आईडी बनी हुई है, वे आधार संख्या अथवा फार्मर आईडी के माध्यम से पोर्टल पर लॉगिन कर खाद की ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे। बुकिंग पूरी होने के बाद उन्हें एक क्यूआर कोड और बुकिंग आईडी जारी की जाएगी। इसी क्यूआर कोड के आधार पर चयनित उर्वरक विक्रेता खाद उपलब्ध कराएंगे।
कृषि विभाग ने क्यूआर कोड की वैधता तीन दिनों के लिए निर्धारित की है। यदि किसान इस अवधि के भीतर खाद प्राप्त नहीं करते हैं तो बुकिंग स्वतः निरस्त हो जाएगी। इसके बाद किसान को पुनः ऑनलाइन आवेदन करना होगा। विभाग का मानना है कि इससे अनावश्यक बुकिंग और स्टॉक रोकने जैसी प्रवृत्तियों पर अंकुश लगेगा।
स्मार्टफोन या इंटरनेट सुविधा से वंचित किसानों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। ऐसे किसान कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी), वसुधा केंद्र, पैक्स प्रतिनिधि, किसान सलाहकार अथवा कृषि समन्वयकों की मदद से ऑनलाइन बुकिंग करा सकेंगे। इसके लिए विभागीय स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
जिला कृषि पदाधिकारी मिथिलेश कुमार ने बताया कि सरकार के निर्देशानुसार नई प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यवस्था लागू होने से उर्वरक वितरण प्रणाली अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनेगी। किसानों को समय पर खाद उपलब्ध होगी तथा वितरण प्रक्रिया की निगरानी भी आसान हो जाएगी। इसके लिए कृषि समन्वयकों, किसान सलाहकारों एवं संबंधित कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि भविष्य में व्यवस्था का सफल संचालन सुनिश्चित किया जा सके।
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