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HealthWealth Summit 2026: आज के दौर में जब हर कोई दिल की बीमारियों, पेट की समस्याओं (गट हेल्थ) और डिप्रेशन से परेशान है, तब हम महंगे अस्पतालों, केमिकल वाले प्रोटीन पाउडर्स और सप्लीमेंट्स के चक्कर काट रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन तमाम स्वास्थ्य समस्याओं का सबसे अचूक और देशी समाधान हमारी अपनी रसोई, गोशाला और सात्विक दिनचर्या में मौजूद है?
आजतक हेल्थ वेल्थ समिट के मंच पर प्रसिद्ध कथावाचक और ‘गौ सेवाधाम एनिमल हॉस्पिटल’ की फाउंडर देवी चित्रलेखा ने गाय के घी, शुद्ध दूध और अध्यात्म से सेहत के गहरे जुड़ाव पर खुलकर बात की. आइए जानते हैं कि उन्होंने गाय के घी, स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आज की जनरेशन (GenZ) के लिए क्या-क्या बड़ी बातें कहीं.
‘गाय के घी से हवन करने पर ठीक हो जाती थीं दिल की बीमारियां’
देवी चित्रलेखा ने पुरानी परंपराओं को याद दिलाते हुए कहा कि पहले के समय में आज जैसे बड़े-बड़े सुपर स्पेशलिटी अस्पताल नहीं होते थे, फिर भी लोग कम बीमार पड़ते थे. उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में हर घर में गाय होती थी. लोग रोजाना गाय के शुद्ध घी से घर में हवन करते थे. इस धुएं और वातावरण की शुद्धता से हार्ट (दिल) से जुड़ी गंभीर बीमारियां और स्वास्थ्य समस्याएं अपने आप ठीक हो जाती थीं.
पेट का रामबाण इलाज भी है गाय का घी
देवी चित्रलेखा ने कहा कि आज के समय में अधिकांश बीमारियों की जड़ खराब डाइजेशन (Gut Health) है. गाय के घी और शुद्ध दूध के नियमित सेवन से पेट की आधी से ज्यादा बीमारियां जड़ से खत्म हो जाती हैं. गौ माता की तीक्ष्ण बुद्धि और उनके दूध की खासियत बताते हुए उन्होंने एक वाकया साझा किया.
उन्होंने बताया कि जब पुराने समय में घर का मालिक बीमार होता था, तो गाय उस स्थिति को भांप लेती थी. वह जंगल (गोचर भूमि) में जाकर वैसी ही जड़ी-बूटियां और चारा चरती थी. उन औषधियों का अर्क उसके दूध में आ जाता था और जब मरीज वह दूध पीता था, तो उसकी बीमारी अपने आप ठीक हो जाती थी. उन्होंने कहा कि बाजार में मिलने वाले महंगे डिब्बा बंद चॉकलेट पाउडर्स और प्रोटीन पाउडर्स के मुकाबले शुद्ध गाय के दूध और घी में अपार प्राकृतिक ताकत और इम्यूनिटी होती है.
‘जब चांद पर जमीन ले सकते हैं, तो शहरों में गाय का दूध क्यों नहीं?’
शहरों में गाय के शुद्ध दूध और घी की अनुपलब्धता के सवाल पर देवी चित्रलेखा ने बहुत तीखा और व्यावहारिक जवाब दिया. उन्होंने कहा कि भारतीय जब चाहें तो मंगल और चांद पर पहुंच सकते हैं, वहां प्लॉट ले सकते हैं, तो क्या वे शहरों में गाय का इंतजाम नहीं कर सकते? यह सिर्फ चाहत की बात है. जब उपभोक्ता दुकानों पर जाकर यह मांग करने लगेगा कि हमें सिर्फ ‘गाय के घी’ से बनी मिठाइयां चाहिए, तो दुकानदार भी अपने आप गाय का शुद्ध घी और दूध मुहैया कराने लगेगा.
7 साल की उम्र से अध्यात्म का सफर: ‘भगवान ने मंच तैयार करके दिया’
अपनी जीवन यात्रा पर बात करते हुए देवी चित्रलेखा ने बताया कि उन्होंने 7 साल की उम्र में अपनी पहली कथा कही थी.
– वृंदावन की पवित्र मिट्टी से जुड़ाव और घर के धार्मिक माहौल का उन पर गहरा प्रभाव पड़ा. उन्होंने एक सुंदर उदाहरण देते हुए कहा, ‘रेडियो जिस फ्रीक्वेंसी में होता है, वही भाषा पकड़ लेता है. मेरी फ्रीक्वेंसी हमेशा से अध्यात्म रही. लोगों को लगता है कि मैंने प्लेटफॉर्म बनाया, लेकिन भगवान ने मेरे लिए मंच और भूमि पहले से ही तैयार करके दी थी.’
हर इंसान में है बदलाव की संभावना
जब उनसे पूछा गया कि क्या बचपन में माहौल न मिलने वालों में भी आध्यात्मिक बदलाव आ सकता है, तो उन्होंने कहा कि मनुष्य संभावनाओं का पिटारा है. इंसान ने बोलना, गाना और व्यवहार पशुओं और प्रकृति से सीखा है (जैसे कोयल जैसी आवाज, गाय जैसी सादगी, शेर जैसी दहाड़ या कुत्ते जैसी वफादारी). गुरु दत्तात्रेय ने 24 गुरु बनाए थे. अध्यात्म को चुनने का सबसे सही समय ‘अभी और यही पल’ है.
वाणी का श्रृंगार और मीठा बोलना: कड़वे शब्द तोड़ते हैं रिश्ते
सत्र के दौरान उन्होंने जीवन में वाणी की मिठास पर विशेष जोर दिया. कहा कि एक कड़वा शब्द हजारों साल पुरानी दोस्ती को एक मिनट में तोड़ सकता है, जबकि एक मीठा शब्द दुश्मनी को दोस्ती में बदल सकता है. जीवन में दो चीजें जरूर सीखनी चाहिए कि कम बोलो, जरूरत भर बोलो और हमेशा मीठा बोलो.
GenZ को सलाह: ‘एक ही तो लाइफ है…’
आज के युवाओं और जनरेशन जी (GenZ) की मानसिकता पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं में ट्रेंड है कि ‘एक ही तो लाइफ है, सब कुछ ट्राई करो’. इस चक्कर में उन्होंने नशा, क्लब्स और ड्रग्स भी ट्राई कर लिया. उन्होंने अपील की कि मैं युवाओं से गुजारिश करती हूं कि एक ही तो लाइफ है, एक बार अध्यात्म भी ट्राई करके देखो! क्या पता आपको वो शांति और सुकून मिल जाए जिसकी तलाश में आप भाग रहे हैं.
बताई डिप्रेशन की असली वजह
मेंटल हेल्थ पर बात करते हुए देवी चित्रलेखा ने लाइफस्टाइल में अनुशासन की वकालत की. उन्होंने कहा कि डिप्रेशन का सबसे बड़ा कारण बिगड़ता टाइमटेबल है. लोग रातभर फोन चलाते हैं और दिन में सोते हैं. अगर युवा एक महीने के लिए भी टाइम पर जागना, सही समय पर खाना और फोन का इस्तेमाल सीमित कर लें, तो बिना गोली-दवाई के डिप्रेशन ठीक हो सकता है.
देवी चित्रलेखा ने सर्किल ऑफ लाइफ को समझाते हुए कहा कि पहले हम सेहत गंवाकर पैसा कमाते हैं, फिर वही पैसा हॉस्पिटल में सेहत पाने के लिए लुटाते हैं. मर्सिडीज कार खरीदने के बाद जिम में जाकर फिर से साइकिल ही चलानी पड़ती है!
रात को सोने से पहले डिलीट मारो
जैसे मोबाइल में एक्स्ट्रा फोटोज और वीडियोज भरने से फोन हैंग होने लगता है, वैसे ही इंसानी दिमाग की भी एक स्टोरेज लिमिट होती है. हर 5 सेकंड में रील्स स्क्रॉल करने से दिमाग थकता है. उन्होंने सलाह दी कि मानसिक बीमारियों से बचने के लिए रात को सोने से पहले पुरानी और फालतू बातों को ‘डिलीट’ कर देना चाहिए.
देवी चित्रलेखा के इस संवाद का लब्बोलुआब यही है कि अगर इंसान अपने शरीर (हार्डवेयर) की सफाई के साथ-साथ नाम जप और सात्विक खानपान से अपने मन (सॉफ्टवेयर) की सफाई भी शुरू कर दे, तो जीवन में कभी बीमारियों और तनाव की जगह नहीं बचेगी.
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