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गुजरात के गिर जंगलों में पिछले कुछ दिनों में शेरों की लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग और राज्य सरकार की चिंता बढ़ा दी है. एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक आवास माने जाने वाले गिर क्षेत्र में अब तक 7 शेरों की मौत हो चुकी है. संक्रामक वायरस की आशंका के चलते 17 शेरों को क्वारंटाइन में रखा गया है, जिनमें से 8 में संक्रमण जैसे लक्षण पाए गए हैं.
मामले की गंभीरता को देखते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने समीक्षा बैठक कर स्थिति की जानकारी ली. बैठक में गिर गढ़डा और बाबरिया क्षेत्र के 10 किलोमीटर दायरे में मौजूद सभी शेरों की सघन निगरानी किए जाने की जानकारी दी गई. अधिकारियों ने बताया कि अब तक अन्य शेरों में किसी गंभीर बीमारी के लक्षण नहीं पाए गए हैं.
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वन विभाग द्वारा अमरेली और भावनगर जिलों के राजस्व क्षेत्रों में भी शेरों का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है और उसकी दैनिक रिपोर्ट तैयार की जा रही है. इसके साथ ही ग्रीष्म ऋतु में फैलने वाली मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए 350 से अधिक शेरों की डी-टिकिंग प्रक्रिया और अन्य स्वास्थ्य संबंधी उपाय किए जा रहे हैं.
सांसद परिमल नथवानी ने जताई चिंता
राज्यसभा सांसद और शेर प्रेमी परिमल नथवानी ने गिर क्षेत्र में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (सीडीवी) और बेबेसिया संक्रमण के कारण हो रही शेरों की मौतों पर चिंता जताई है. उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और गुजरात के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया को पत्र लिखकर तत्काल कदम उठाने की मांग की है.
नथवानी ने पत्र में कहा कि गिर राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन और वन विभाग पूरी सतर्कता के साथ काम कर रहा है और संक्रमित शेरों के इलाज तथा महामारी को नियंत्रित करने के लिए दिन-रात प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने शेरों की मौत रोकने और संक्रमित जानवरों के तत्काल उपचार की आवश्यकता पर जोर दिया.
प्रधान मुख्य वन संरक्षक डॉ. जयपाल सिंह ने बताया कि मृत शेरों में संक्रामक वायरस के लक्षण मिले हैं, लेकिन यह निश्चित रूप से कहना अभी संभव नहीं है कि यह सीडीवी है या नहीं. इसके लिए नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं और रिपोर्ट करीब एक सप्ताह में आने की संभावना है.
12 डॉक्टरों की टीम कर रही निगरानी
वन विभाग ने एहतियात के तौर पर 17 शेरों को क्वारंटाइन किया है. इनमें से 8 शेरों में संक्रमण जैसे लक्षण दिखाई दिए हैं. संक्रमित शेरों के इलाज और निगरानी के लिए 12 डॉक्टरों की विशेष टीम लगातार काम कर रही है. इस टीम में जूनागढ़ वेटरनरी कॉलेज के विशेषज्ञ भी शामिल हैं.
गिर वन क्षेत्र में लगभग 10 किलोमीटर के दायरे में विशेष निगरानी अभियान चलाया जा रहा है. साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं शेर पहले से किसी अन्य बीमारी से पीड़ित तो नहीं थे. स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने बड़ी संख्या में कर्मचारियों की तैनाती की है.
वर्तमान में करीब 250 वनकर्मी इस अभियान में लगे हुए हैं. इसके अलावा जामनगर, सूरत, राजकोट, कच्छ और जूनागढ़ से 20 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को गिर बुलाया गया है. इनमें आरएफओ, वन रक्षक और अन्य कर्मचारी शामिल हैं, जो पहले भी गिर क्षेत्र में सेवा दे चुके हैं और हालात को अच्छी तरह समझते हैं.
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