चंडीगढ़/ बठिंडा, 20 मई रामपुरा ब्लॉक का गांव गिल कलां सामुदायिक आधारित जल प्रबंधन का एक उत्कृष्ट मॉडल बनकर उभरा है, जहां सक्रिय जनभागीदारी और…
यह जानकारी देते हुए डिप्टी कमिश्नर राजेश धीमान ने बताया कि गांव के जल प्रबंधन प्रयासों को आज आयोजित जल जीवन मिशन के तहत ‘सुजल ग्राम संवाद’ की वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में सराहना मिली। इससे बठिंडा जिले को प्रभावी जनभागीदारी और टिकाऊ जल आपूर्ति प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान प्राप्त हुई है।
डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि गिल कलां ने यह दिखाया है कि जागरूकता और जनता का विश्वास किस तरह ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों को बदल सकता है। गांव की नहर आधारित जल आपूर्ति योजना को वर्ष 2020 में 2.96 करोड़ रुपये की लागत से अपग्रेड किया गया था। इसके बाद वर्ष 2021-22 के दौरान इस योजना को और मजबूत करने के कार्य पूरे किए गए। बाद में सितंबर 2022 में इस योजना को स्थानीय प्रबंधन और संचालन के लिए ग्राम पंचायत वाटर सप्लाई कमेटी (GPWSC) को सौंप दिया गया।
उन्होंने बताया कि गांव के सभी 784 घरों में अब कार्यशील नल जल कनेक्शन उपलब्ध हैं। शुरुआत में कई ग्रामीण सप्लाई के पानी के उपयोग को लेकर हिचकिचा रहे थे और सबमर्सिबल पंप के पानी को प्राथमिकता देते थे। हालांकि नियमित जागरूकता अभियानों, घर-घर संपर्क और ग्रामीणों की मौजूदगी में फील्ड टेस्टिंग किट के माध्यम से किए गए जल गुणवत्ता परीक्षणों से लोगों का विश्वास काफी बढ़ा। पारदर्शी परीक्षण प्रक्रिया और सकारात्मक परिणामों से प्रेरित होकर ग्रामीणों ने स्वेच्छा से घरेलू जल कनेक्शन के लिए आवेदन किया, जिससे 100 प्रतिशत कवरेज हासिल हुआ।
डी.सी. राजेश धीमान ने आगे बताया कि गांव में अब प्रतिदिन चार घंटे पीने योग्य पानी की आपूर्ति की जा रही है और पूरे संचालन का प्रबंधन ग्राम पंचायत वाटर सप्लाई कमेटी द्वारा कुशलतापूर्वक किया जा रहा है। समिति ने सिस्टम के सुचारू संचालन और नियमित रखरखाव के लिए एक निजी पंप ऑपरेटर नियुक्त किया है। उन्होंने कहा कि वार्षिक संचालन खर्च पूरे करने के बावजूद समिति को हर साल लगभग 2 लाख रुपये की आय हो रही है और जल आपूर्ति संचालन से करीब 6 लाख रुपये की बचत जमा हो चुकी है।
उन्होंने गांव की पंचायत, वाटर सप्लाई कमिटी के सदस्यों, जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारियों और ग्रामीणों की सराहना की, जिन्होंने योजना की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक रूप से कार्य किया। उन्होंने कहा कि लगातार जागरूकता शिविर, सामुदायिक बैठकें और जल परीक्षण गतिविधियां जनभागीदारी और जवाबदेही बनाए रखने में सहायक साबित हो रही हैं, जिससे गिल कलां सामुदायिक प्रबंधन आधारित जल आपूर्ति प्रणालियों के लिए एक मॉडल गांव बन गया है।
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