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11 दिसंबर 1946 को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र की महासभा ने संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष ( यूनिसेफ ) की स्थापना का प्रस्ताव रखा था. इसके तहत युद्ध से तबाह देशों में रहने वाले बच्चों को राहत और सहायता प्रदान करने के लिए एक संगठन का निर्माण हो सके. इसके लिए सभी सदस्य देशों ने वोटिंग की थी और ऐसे यूनिसेफ की स्थापना हुई.
1940 के दशक के उत्तरार्ध में खाद्य और चिकित्सा संकट के बीत जाने के बाद, यूनिसेफ ने संकटग्रस्त देशों के बच्चों के लिए एक राहत संगठन के रूप में अपनी भूमिका जारी रखी और 1970 के दशक के दौरान बच्चों के अधिकारों के मुखर समर्थक के रूप में उभरा.
यूनिसेफ ने बनाया मानवाधिकारों की घोषणा का रास्ता
1980 के दशक के दौरान, यूनिसेफ ने बाल अधिकारों पर कन्वेंशन के प्रारूपण में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग के गठन में सहायता की. 1989 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किए जाने के बाद, बाल अधिकारों पर कन्वेंशन इतिहास में सबसे व्यापक रूप से अनुसमर्थित मानवाधिकार संधि बन गई और यूनिसेफ ने इसके प्रवर्तन को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
वैश्विक शांति के प्रयास में मानवाधिकारों की घोषणा हुई
अपनी आरंभिक बैठकों से ही संयुक्त राष्ट्र महासभा ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुए अत्याचारों जैसा अत्याचार फिर कभी न हो. 10 दिसंबर, 1948 को सभा ने मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा को अपनाया, जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों पर आधारित थी और दुनिया भर में सभी व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए एक रोड मैप के रूप में कार्य करती थी.
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प्रमुख घटनाएं
11 दिसंबर 1941 – जर्मनी और इटली ने अमेरिका के खिलाफ युद्ध की घोषणा की थी. पहले इटली के शासक बेनिटो मुसोलिनी और फिर जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर ने ये घोषणा की.
11 दिसंबर 1994 – रूस के तत्कालीन राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन ने चेचेन विद्रोहियों पर हमला किया तथा उनके इलाके में सेना भेज दी.
11 दिसंबर 2007 – उत्तर व दक्षिण कोरिया के मध्य 50 वर्ष बाद रेल सेवा पुन: बहाल हुई.
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