पश्चिम एशिया में तनाव और जंग के बीच, होर्मुज समुद्री मार्ग में पिछले चार दिनों में ओमान तट के निकट तीन वाणिज्यिक जहाजों पर अमेरिकी सैन्य बलों के हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मौत का मामला अब देश में भी तुल पकड़ने लगा है। हालांकि, विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे को अमेरिका के समक्ष जोरदार ढंग से उठाया है और नई दिल्ली में अमेरिकी राजनयिक को तलब कर उसके समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है लेकिन इस पूरे प्रकरण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर विपक्ष ने निशाना साधा है।
हैदराबाद से सांसद और AIMIM के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा है कि उनके पास जश्न मनाने के समय तो है लेकिन अमेरिकी सेना द्वारा किए गए हमलों में नाविकों की नृशंस हत्या की निंदा करना का समय नहीं है। उन्होंने एक्स पर लिखा, “मोदी सरकार @narendramodi अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नाविक के तौर पर काम कर रहे भारतीयों की जान बचाने में बार-बार नाकाम रही है। यह भारत सरकार का सबसे पहला फ़र्ज़ है। यह दुखद और परेशान करने वाली बात है कि प्रधानमंत्री के पास जश्न मनाने का तो समय है, लेकिन अमेरिकी सेना द्वारा भारतीयों की हत्या की निंदा करने का समय नहीं है।”
एक और ट्वीट में उन्होंने लिखा, “क्या भारत में कभी इससे कमज़ोर सरकार रही है? रूस लगातार भारतीयों को सैनिक के तौर पर भर्ती कर रहा है और वे मारे जा रहे हैं, लेकिन सरकार बेबस है। सरकार फ़िल्मों में चीन का नाम लेने या गलवान की लड़ाई दिखाने की इजाज़त नहीं देती। और अब अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भारतीय नाविकों के साथ यह सब हो रहा है। एक देश के तौर पर हम इससे बेहतर के हकदार हैं। जय हिंद।”
बता दें कि ऐसा पहली बार है, जब सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया गया कि अमेरिकी नौसेना ने भारतीय चालक दल वाले जहाजों को निशाना बनाया है। पलाउ के ध्वज वाले तेल टैंकर ‘मैरीवेक्स’ को 8 जून को अमेरिकी बलों द्वारा निशाना बनाया गया था। इसमें 24 भारतीय नाविक सवार थे। हालांकि, तब चालक दल के सभी सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया। इसके बाद बुधवार (10 जून) को भी ओमान तट के पास एक जहाज पर अमरिकी बलों ने हमला बोला। उस जहाज पर 24 लोग सवार थे, जिनमें तीन की मौत हो गई, जबकि 21 को बचा लिया गया।
इस हमले के बाद, विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी दूतावास के प्रभारी अधिकारी जेसन मीक्स को तलब किया था और ओमान के तट के पास भारतीय चालक दल के सदस्यों वाले एक वाणिज्यिक जहाज पर अमेरिकी हमले को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अंतर-मंत्रालयी प्रेस वार्ता में कहा, ”हम अपने नाविकों की सुरक्षा और भलाई को अत्यधिक महत्व देते हैं। जब जहाज ‘एमटी स्टेबेलो’ पर यह हमला हुआ, तब हमने अमेरिकी पक्ष के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया।” आज तीसरे जहाज MT जलवीर पर हमले हुए हैं।
जायसवाल ने कहा कि ये हमले ”तुरंत रुकने चाहिए।” उन्होंने कहा, ”हमने यह भी कहा कि संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए संवाद और कूटनीति ही आगे का रास्ता है और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य से निर्बाध आवाजाही होनी चाहिए।” उन्होंने कहा, ”इसलिए, हमने इन सभी बिंदुओं पर अपना रुख बहुत स्पष्ट कर दिया और साथ ही यह भी दोहराया कि हमारे लोगों का जीवन कितना महत्वपूर्ण है और हमारे लोगों का कल्याण और सुरक्षा हमारे लिए कितनी अहम है।” जायसवाल ने कहा कि ये हमले उस अमेरिकी नौसेना द्वारा किए गए, जो इस क्षेत्र में तैनात है। उन्होंने कहा, ”इन घटनाओं में शामिल तीनों जहाज विदेशी ध्वज वाले जहाज थे। इनमें से दो जहाज पलाऊ के ध्वज वाले थे, जबकि तीसरा जहाज गिनी-बिसाऊ के ध्वज वाला था। ये जहाज भारतीय स्वामित्व वाले नहीं थे।”
कृपया अपने अनुभव को रेट करें
प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।
अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- ‘मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन’ रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम ‘मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन’ है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।
आरएसएसविज्ञापन र॓टहमार॓ साथ काम करेंहमारे बारे मेंसंपर्क करेंगोपनीयतासाइट जानकारी
Advertise with usAbout usCareers Privacy Contact usSitemapCode Of Ethics
Partner sites: Hindustan TimesMintHT TechShineHT AutoHealthshotsHT SmartcastFAB Play