जांच एजेंसियों के डिजिटल डेटा जुटाने पर नियम की मांग, सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल – AajTak

Feedback
सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है. इसमें आपराधिक जांच एजेंसियों की ओर से लोगों के निजी और डिजिटल डेटा को जुटाने और उसका इस्तेमाल करने के तरीके को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश बनाने की मांग की गई है. याचिका में नागरिकों के निजता के मौलिक अधिकार की सुरक्षा पर जोर दिया गया है.
याचिका में कहा गया है कि जांच एजेंसियों की ओर से डिजिटल जानकारी मांगने के लिए कुछ तय नियम होने चाहिए. इसमें किसी व्यक्ति की आवाजाही से जुड़ी जानकारी, समय से जुड़े रिकॉर्ड और इंटरनेट पर किए गए पोस्ट के मेटाडेटा जैसी जानकारियां शामिल हैं. याचिका में मांग की गई है कि एजेंसियों को डेटा मांगते समय यह साफ बताना चाहिए कि जानकारी किस उद्देश्य से चाहिए, किस तरह की जानकारी मांगी जा रही है, किस अवधि का डेटा चाहिए और उसका कथित अपराध से क्या संबंध है.
जनहित याचिका में कहा गया है कि जांच के लिए सिर्फ उतना ही डेटा लिया जाना चाहिए, जितना जरूरी और जांच के लिए उचित हो. याचिकाकर्ता ने चेतावनी दी है कि किसी व्यक्ति के पूरे डिजिटल इतिहास तक बिना जरूरत पहुंच उसकी निजी जिंदगी में अनुचित दखल बन सकती है. याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का भी हवाला दिया गया है. इसमें कहा गया है कि अगर निजता की पर्याप्त सुरक्षा के नियम मौजूद नहीं हैं और जांच एजेंसी यह साबित नहीं कर पाती कि कम दखल वाले दूसरे तरीकों से जांच नहीं हो सकती, तो निजी डिजिटल डेटा तक नियमित रूप से पहुंच की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.
निजता और अभिव्यक्ति की आजादी की सुरक्षा की मांग
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग की गई है. इनमें निजता, गरिमा, बोलने और अपनी बात रखने की आजादी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे अधिकार शामिल हैं. याचिका का उद्देश्य आपराधिक जांच के दौरान डिजिटल डेटा तक पहुंच के लिए ऐसी व्यवस्था तय करना है, जिससे जांच की जरूरत और नागरिकों के निजता के अधिकार के बीच संतुलन बना रहे.
सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है. इसमें आपराधिक जांच एजेंसियों की ओर से लोगों के निजी और डिजिटल डेटा को जुटाने और उसका इस्तेमाल करने के तरीके को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश बनाने की मांग की गई है. याचिका में नागरिकों के निजता के मौलिक अधिकार की सुरक्षा पर जोर दिया गया है.
याचिका में कहा गया है कि जांच एजेंसियों की ओर से डिजिटल जानकारी मांगने के लिए कुछ तय नियम होने चाहिए. इसमें किसी व्यक्ति की आवाजाही से जुड़ी जानकारी, समय से जुड़े रिकॉर्ड और इंटरनेट पर किए गए पोस्ट के मेटाडेटा जैसी जानकारियां शामिल हैं. याचिका में मांग की गई है कि एजेंसियों को डेटा मांगते समय यह साफ बताना चाहिए कि जानकारी किस उद्देश्य से चाहिए, किस तरह की जानकारी मांगी जा रही है, किस अवधि का डेटा चाहिए और उसका कथित अपराध से क्या संबंध है.
जरूरत के मुताबिक ही जुटाया जाए डेटा
जनहित याचिका में कहा गया है कि जांच के लिए सिर्फ उतना ही डेटा लिया जाना चाहिए, जितना जरूरी और जांच के लिए उचित हो. याचिकाकर्ता ने चेतावनी दी है कि किसी व्यक्ति के पूरे डिजिटल इतिहास तक बिना जरूरत पहुंच उसकी निजी जिंदगी में अनुचित दखल बन सकती है. याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का भी हवाला दिया गया है. इसमें कहा गया है कि अगर निजता की पर्याप्त सुरक्षा के नियम मौजूद नहीं हैं और जांच एजेंसी यह साबित नहीं कर पाती कि कम दखल वाले दूसरे तरीकों से जांच नहीं हो सकती, तो निजी डिजिटल डेटा तक नियमित रूप से पहुंच की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.
निजता और अभिव्यक्ति की आजादी की सुरक्षा की मांग
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा की मांग की गई है. इनमें निजता, गरिमा, बोलने और अपनी बात रखने की आजादी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता जैसे अधिकार शामिल हैं.याचिका का उद्देश्य आपराधिक जांच के दौरान डिजिटल डेटा तक पहुंच के लिए ऐसी व्यवस्था तय करना है, जिससे जांच की जरूरत और नागरिकों के निजता के अधिकार के बीच संतुलन बना रहे.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News