जापान गंभीर जनसांख्यिकीय संकट का सामना कर रहा है, जहाँ बुजुर्ग आबादी बढ़ रही है और जन्मदर घट रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि प्रभावित हो रह …और पढ़ें
जापान में खेती के लिए किसानों का सहारा बने रोबोट।
जापान में बुजुर्ग आबादी बढ़ने से कृषि पर संकट।
खेतों में काम के लिए रोबोट का व्यापक उपयोग।
भारतीय युवाओं को जापान में रोजगार के अवसर।
डिजिटल डेस्क, टोक्यो। वर्तमान समय में जापान एक गंभीर जनसांख्यिकीय संकट से जूझ रहा है। देश में बुजुर्गों की आबादी तेजी से बढ़ रही है और जन्मदर लगातार रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच चुकी है।
चिंता का विषय यह है कि अगर चीजें ऐसी ही चलती रही तो अनुमान इस बात की तेज है कि वर्ष 2060 तक जापान की कुल आबादी घटकर 10 करोड़ से भी कम रह जाएगी। इस सामाजिक बदलाव का सबसे बुरा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि पर पड़ रहा है, जहां खेतों में काम करने वाले युवाओं की भारी कमी हो गई है।
इस विकट परिस्थिति से निपटने के लिए जापान के ग्रामीण इलाकों में स्मार्ट कृषि और आधुनिक तकनीक का बड़े पैमाने पर सहारा लिया जा रहा है। उदाहरण के लिए, जापान के यामागाता प्रांत के निशिकावा कस्बे में किसानों की औसत आयु अब लगभग 73 वर्ष हो चुकी है। ऐसे में खेतों की देखभाल के लिए रोबोट को मैदान में उतारा गया है।
निवासी महापौर दाइशी कानो ने इस समस्या का समाधान ढूंढते हुए स्मार्ट कृषि के लिए लगभग 38 लाख रुपये जुटाए हैं। इन पैसों की मदद से तैनात किए गए रोबोट चेरी के फूल तोड़ने, फसलों की पैकेजिंग करने और जंगली भालुओं को खेतों से दूर भगाने जैसे जोखिम भरे और कठिन काम कर रहे हैं। ये रोबोट अब ग्रामीण जापान की खेती और स्थानीय आजीविका को बचाने की मुख्य उम्मीद बन चुके हैं।
दूसरी ओर अपनी घरेलू श्रम शक्ति की भारी कमी को पूरा करने के लिए जापान सरकार ने अब विदेशी कामगारों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। इस नीति का सकारात्मक प्रभाव भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। मिजोरम, मणिपुर और असम के युवा अब जापानी भाषा सीखने और आधिकारिक स्किल टेस्ट पास करने में गहरी रुचि ले रहे हैं।
गौरतलब है कि ये युवा मुख्य रूप से कृषि और देखभाल जैसे क्षेत्रों में नौकरी पाने के लिए जापान जाने की तैयारी कर रहे हैं। पूर्वोत्तर के राज्यों की सरकारें भी अपने युवाओं को इस वैश्विक अवसर के लिए तैयार कर रही हैं। असम सरकार द्वारा ट्रेनिंग फीस पर सब्सिडी और रिलोकेशन सपोर्ट प्रदान किया जा रहा है, जबकि मणिपुर और मिजोरम के विश्वविद्यालयों में विशेष रूप से जापानी भाषा सिखाने के लिए नए केंद्र खोले गए हैं।