ट्रंप के टैरिफ वार का अब क्या होगा, कोर्ट के फैसले से भारत को भी मिलेगी 50% शुल्क से राहत? – Hindustan

भारत पर हाल ही में लगाए गए 50 प्रतिशत अमेरिकी आयात शुल्क के बीच एक डोनाल्ड ट्रंप को अपने ही देश में बड़ा झटका लगा है। अमेरिका की अपील अदालत ने शुक्रवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप द्वारा अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत लगाए गए ज्यादातर टैरिफ अवैध हैं। अदालत ने कहा कि ये टैरिफ 14 अक्टूबर तक लागू रहेंगे, जिससे ट्रंप प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का समय मिल सके।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, “संविधान के अनुसार कर और टैरिफ लगाने का मूल अधिकार केवल कांग्रेस के पास है। यह एक मुख्य संसदीय शक्ति है। यह मानना मुश्किल है कि कांग्रेस ने IEEPA कानून लाते समय राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का असीमित अधिकार देना चाहा हो।”
इस फैसले का असर अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत प्रतिशोधात्मक टैरिफ और रूस से आयातित तेल पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क पर भी पड़ेगा। हालांकि, ट्रंप ने स्टील और एल्युमिनियम पर 1962 के ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा 232 के तहत जो 50 प्रतिशत शुल्क लगाया है वह इस कानूनी चुनौती से प्रभावित नहीं होगा।
यह फैसला उन दो मुकदमों पर आया है, जिन्हें छोटे कारोबारियों और अमेरिकी राज्यों के गठबंधन ने अप्रैल में ट्रंप के कार्यकारी आदेशों के खिलाफ दायर किया था। इससे पहले मई में कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड (CIT) ने भी इन टैरिफ को अवैध करार दिया था, लेकिन अपील लंबित रहने के कारण उसे लागू नहीं किया गया था।
अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने अदालत में दलील दी थी कि राष्ट्रपति के पास अन्य कानूनी विकल्प सीमित हैं। सेक्शन 232 (ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट 1962) में जांच और निर्णय प्रक्रिया में लगभग एक साल लगता है। सेक्शन 301 (ट्रेड एक्ट 1974) में भी जांच और प्रवर्तन की प्रक्रिया लंबी और जटिल है। इसके उलट, IEEPA राष्ट्रपति को तुरंत कार्रवाई का अधिकार देता है, बशर्ते राष्ट्रीय हित और सुरक्षा की शर्तें पूरी हों। लटनिक ने कहा कि यदि यह विकल्प न हो तो राष्ट्रपति की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय कानून विशेषज्ञ मार्कस वाग्नर ने कहा कि IEEPA का इस्तेमाल कभी सही रास्ता नहीं था और ट्रंप प्रशासन को शुरू से पता था कि अदालत इसे अवैध करार देगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था, “लेकिन असली मकसद यही था कि IEEPA का इस्तेमाल करके ट्रंप प्रशासन ने समय को टाला। अब भी यह समय खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि CIT का फैसला अपील में जाएगा और इसके क्रियान्वयन को कानूनी प्रक्रिया के जरिये जितना हो सके उतना टाला जाएगा।”
वाग्नर का मानना है कि अमेरिका की रणनीति या लक्ष्य में कोई बदलाव नहीं आया है। असली सवाल यह है कि बाकी देश इस पर कैसे प्रतिक्रिया देंगे। क्या वे मौजूदा नियमों को कायम रखेंगे या फिर अमेरिकी कदमों से हुए नुकसान को कम करने के उपाय खोजेंगे।
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