ट्रंप के फर्नीचर टैरिफ से भारत की कंपनियों को 10,000 करोड़ का नुकसान? | News Track in Hindi – Newstrack

Furniture Tariff Hits India: 25 सितंबर 2025 की देर रात, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ नए सेक्टर पर टैरिफ लगाने की घोषणा की। नए नियमों के अनुसार, फार्मा कंपनियों पर 100% टैरिफ, फर्नीचर पर 50% टैरिफ और हैवी ट्रक बनाने वाली कंपनियों पर 25% टैरिफ लागू होगा। ये नए टैरिफ 1 अक्टूबर 2025 से शुरू होंगे। इसका असर भारत की एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों पर बहुत बड़ा होगा। खासकर फार्मा और फर्नीचर इंडस्ट्री को भारी नुकसान हो सकता है। निवेशक और कारोबारी अब चिंता में हैं कि इससे उनके व्यापार और लाभ पर क्या असर पड़ेगा।
भारत की कई बड़ी फार्मा कंपनियों का अमेरिका में बड़ा कारोबार है। नए नियमों के अनुसार, फार्मा पर 100% टैरिफ लगाया जाएगा। इससे Sun Pharma, Natco, Aurobindo, Lupin और Biocon जैसी कंपनियों को सीधे नुकसान उठाना पड़ सकता है। ये कंपनियां अमेरिका को दवाइयां और हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट करती हैं। टैरिफ के कारण उनकी कीमतें बढ़ सकती हैं और उनकी बिक्री प्रभावित हो सकती है। निवेशकों और व्यापारियों को अब इस बदलाव का खास ध्यान रखना होगा।
भारत अब दुनिया के प्रमुख फर्नीचर एक्सपोर्टर (Indian Furniture Exporter) में शामिल हो चुका है। 2022-23 में भारत का कुल फर्नीचर एक्सपोर्ट लगभग 5 अरब डॉलर था। ग्लोबल फर्नीचर मार्केट 2023 में लगभग 23 अरब डॉलर का था। भारत का फर्नीचर सेक्टर हर साल 6% से ज्यादा की दर से बढ़ रहा है और 2030 तक इसे 43 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है।
भारत लकड़ी, प्लास्टिक, बांस और बेंत से बने फर्नीचर का एक्सपोर्ट करता है। अमेरिका, फ्रांस और नीदरलैंड इसके बड़े ग्राहक हैं। लेकिन अब 50% टैरिफ के कारण भारतीय फर्नीचर अमेरिका में महंगा हो जाएगा। इसका सीधा असर एक्सपोर्ट और कंपनियों के लाभ पर पड़ेगा।
Trade Economics की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में भारत से अमेरिका को फर्नीचर, लाइटिंग और प्रीफैब्रिकेटेड बिल्डिंग्स का निर्यात लगभग 1.14 अरब डॉलर (करीब 10,000 करोड़ रुपये) था। वहीं, 2023 में फर्नीचर, बेडिंग, मैट्रेसेस और कुशन का निर्यात लगभग 1.07 अरब डॉलर हुआ था।
वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने केवल वुडेन फर्नीचर (Wooden Furniture) का निर्यात 32.46 मिलियन डॉलर किया। ये आंकड़े दिखाते हैं कि भारत का फर्नीचर सेक्टर अमेरिका में कितना महत्वपूर्ण है। लेकिन अब नए 50% टैरिफ के कारण इसका निर्यात प्रभावित हो सकता है और कंपनियों को बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
भारत की प्रमुख फर्नीचर कंपनियां अमेरिका में मजबूत कारोबार करती हैं, लेकिन नए 50% टैरिफ से उनकी कमाई पर बड़ा असर पड़ सकता है। Nilkamal Ltd प्लास्टिक और ऑफिस फर्नीचर में अग्रणी है, जबकि Godrej Interio घर और ऑफिस फर्नीचर के साथ बड़े कॉर्पोरेट प्रोजेक्ट्स में भी काम करती है। Carrisyl किचन सिंक, ओवन और डिशवॉशर बनाती है, और इसका करीब एक चौथाई रेवेन्यू अमेरिका से आता है। Featherlite Industries ऑफिस फर्नीचर में माहिर है, Sheela Foam (Sleepwell) मैट्रेसेस और बेडिंग का उत्पादन करती है, और Kurlon Enterprises स्लीपिंग बेड्स और मैट्रेसेस में पहचान रखती है। इसके अलावा, Furniture Roots, Durian और EPCH जैसी कई छोटी कंपनियां भी अमेरिका को फर्नीचर एक्सपोर्ट करती हैं। नए टैरिफ की वजह से इन कंपनियों की बिक्री कम हो सकती है और मुनाफा प्रभावित हो सकता है, जिससे इंडस्ट्री के लिए चुनौती बढ़ जाएगी।
टैरिफ के ऐलान के बाद कुछ प्रमुख लिस्टेड फर्नीचर कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी Godrej Consumer Products में 2.36% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि Carrisyl का शेयर 9.5% तक गिरकर 768.15 रुपये पर पहुंच गया था। Nilkamal Ltd का शेयर लगभग 1% गिरकर 1500 रुपये के करीब पहुंच गया था। यह दिखाता है कि नए टैरिफ का असर सीधे बाजार और निवेशकों पर भी पड़ रहा है।

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