भारत ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है. देश को अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ओर से “ट्रेकोमा मुक्त राष्ट्र” घोषित कर दिया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस गर्व के क्षण को 29 जून 2025 को प्रसारित हुए अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में साझा किया. उन्होंने देश के स्वास्थ्यकर्मियों, डॉक्टरों और जागरूक नागरिकों को इस उपलब्धि का श्रेय देते हुए कहा कि यह भारत की जन-भागीदारी और स्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है.
ट्रेकोमा एक गंभीर संक्रामक नेत्र रोग है, जो आमतौर पर गंदगी, साफ-सफाई की कमी और बैक्टीरिया के संक्रमण से फैलता है. यह आंखों में सूजन पैदा करता है और समय पर इलाज न होने पर अंधेपन का कारण भी बन सकता है. एक समय था जब भारत में यह बीमारी व्यापक रूप से फैली हुई थी, लेकिन बीते कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारों ने मिलकर इसके उन्मूलन के लिए विशेष अभियान चलाए. ‘स्वच्छ भारत मिशन’, ‘जल जीवन मिशन’ जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों ने साफ-सफाई और स्वच्छ पेयजल की पहुंच को बढ़ाकर बीमारी को जड़ से खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाई.
भारत सरकार ने ट्रेकोमा के खिलाफ लड़ाई में WHO की SAFE रणनीति (Surgery, Antibiotics, Facial cleanliness, Environmental improvement) को अपनाया. इस रणनीति के तहत न सिर्फ लोगों को इलाज मुहैया कराया गया, बल्कि गांव-गांव तक साफ-सफाई और हाइजीन की शिक्षा दी गई. देशभर में हजारों की संख्या में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों ने इस अभियान को जमीन पर उतारा. स्वास्थ्य विभाग द्वारा घर-घर जाकर एंटीबायोटिक्स बांटी गईं और जिन लोगों को इस बीमारी से जटिलता थी, उन्हें सर्जरी से राहत दी गई.
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 2017 में भारत को सक्रिय ट्रेकोमा मुक्त घोषित किया गया था, लेकिन इसके बाद भी निगरानी और सर्वेक्षण का काम जारी रहा. 2021 से 2024 के बीच हुए व्यापक सर्वे के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि भारत में अब ट्रेकोमा सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या नहीं है. इसी के बाद WHO ने 20 मई 2025 को जिनेवा में आयोजित स्वास्थ्य महासभा में भारत को “ट्रेकोमा मुक्त देश” घोषित कर प्रमाणपत्र सौंपा. यह उपलब्धि भारत को दक्षिण एशिया में नेपाल और म्यांमार के बाद तीसरा ऐसा देश बनाती है.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह उपलब्धि दिखाती है कि जब देश एकजुट होकर कार्य करता है, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है. उन्होंने देशवासियों से अपील की कि वे स्वच्छता और स्वास्थ्य के इन प्रयासों को अब और भी मजबूती से आगे बढ़ाएं. इस जीत को बनाए रखने के लिए पोस्ट-वैलिडेशन निगरानी जरूरी होगी, ताकि ट्रेकोमा दोबारा न उभरे. यह उपलब्धि न केवल भारत के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक प्रेरणा है कि इच्छाशक्ति, जन भागीदारी और प्रभावी नीति से किसी भी गंभीर स्वास्थ्य चुनौती को मात दी जा सकती है.
ट्रेकोमा एक बेहद खतरनाक आंखों का संक्रमण है, जो अगर समय पर इलाज न हो तो स्थायी अंधेपन का कारण बन सकता है. यह धीरे-धीरे आंख की पलक को अंदर की ओर मोड़ देता है, जिससे पलकें बार-बार आंख की पुतली से रगड़ खाती हैं और कॉर्निया को नुकसान पहुंचता है. शुरू में इसके लक्षण मामूली जलन या खुजली के रूप में नजर आते हैं, लेकिन जैसे-जैसे संक्रमण बढ़ता है, आंखों की रोशनी कमजोर होने लगती है. गंदगी, मक्खियां और साफ-सफाई की कमी इसके फैलने में अहम भूमिका निभाते हैं. दुनिया के कई गरीब और विकासशील देशों में यह अंधेपन का सबसे बड़ा कारण रहा है. इसलिए इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है.