तेरे यहां पर नुक्ता है, मेरे यहां पर बिंदी है, जितनी शीरीं उर्दू है उतनी मीठी हिंदी है… – Dainik Bhaskar

साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित संस्था कलामय की ओर से शनिवार को सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी, सेक्टर-17 में कवि सम्मेलन एवं मुशायरा आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. अनीश गर्ग ने की, जबकि अपराजिता सोसा
कवि डॉ. अश्वनी शांडिल्य ने सुनाया- सूना-सूना-सा यह जीवन, सूने सांसों के तारों में, भर दी मदिर-मदिर झंकार, उसने जीत लिया है मुझको, बिन हथियार। डॉ. शिप्रा सागर ने- मेरे आंगन में तेरे नाम की खुशबू है, अपनी जुल्फों को गजरे से सजाऊं कैसे, उसको मैं किस्सा-ए-ग़म अपना सुनाऊं कैसे, वो तो पत्थर है उसे मोम बनाऊं कैसे कविता पेश की।
शायर प्रो. नवीन गुप्ता नवीं ने- तेरे यहां पर नुक्ता है, मेरे यहां पर बिंदी है, जितनी शीरीं उर्दू है उतनी मीठी हिंदी है, दास्तां उसकी मुहब्बत की बहुत छोटी है, उस की महबूबा कोई और नहीं रोटी है, खुशतर काशिफ ने- जब भी किसी हसीन के माथे पे बल पड़े, ऐसा लगा गुलाब के आंसू निकल पड़े, नारायण भदौरिया नवल ने- अपनी आनो बान नहीं जाने देंगे, हम अपनी पहचान नहीं जाने देंगे, जाती है तो जान भले ही जाए पर, भारत मां की शान नहीं जाने देंगे ने अपनी रचना सुनाई। इनके अलावा डॉ. रेखा मित्तल, राजन सुदामा, विंदर माझी, अनवर अंसारी, नीतू कुमारी नितुंजलि, लोकेश विशिष्ट, श्रवण पॉल, दीप प्रदीप, कनिका व्यास, राजीव गुप्ता, काजल कौशिक, अनीता नरवाल, मेहर सिंह, विश्वजीत, जितेंद्र कुमार, अंकुश तिवारी, इंतिशार, जतिंद्र मौदगिल और अरविन्द कौशल ने अपने कविताएं और शायरी सुनाई।
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