दिल्ली-एनसीआर का मौसम शुक्रवार को थोड़ा कूल-कूल रहने के आसार हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि शुक्रवार को भी आंधी-बारिश हो सकती है। इस दौरान हवा की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक भी पहुंचने के आसार हैं। तेज के साथ पड़ने वाली बौछारों के चलते तापमान में अच्छी गिरावट होने के आसार हैं। इसके लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।
दिल्ली में गुरुवार को दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रही। हालांकि रात के समय कई इलाकों में झमाझम बारिश भी दर्ज की गई। इसके चलते दिल्ली के लोगों को झुलसाने वाली गर्मी से खासी राहत मिली है। एक दिन पहले की तुलना में अधिकतम तापमान में साढ़े 5 डिग्री से ज्यादा तक की गिरावट दर्ज की गई है। मानक वेधशाला सफदरजंग में दिन का अधिकतम तापमान 38.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस कम है। वहीं, बादलों के छाए रहने के चलते रात के तापमान में बढ़ोतरी हुई है।
मौसम विभाग के मुताबिक, सफदरजंग में न्यूनतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो कि सामान्य से 2.0 डिग्री सेल्सियस ज्यादा है। वहीं, मौसम के कारकों के चलते दिल्ली की हवा लगातार साफ-सुथरी बनी हुई है। गुरुवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 167 दर्ज किया गया। इस स्तर की हवा को मध्यम श्रेणी में रखा जाता है।
दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने गुरुवार को वर्षा जल संचयन की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि 30 जून तक वर्षा जल संचयन का पूरा ढांचा तैयार किया जाना चाहिए। उन्होंने वर्षा जल संचयन के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग करने पर विशेष जोर दिया। बैठक में डीडीए ने मौजूदा 624 प्रणालियों के अतिरिक्त 24 नई वर्षा जल संचयन प्रणालियां विकसित करने की जानकारी दी। वहीं, राजधानी में हरियाली बढ़ाने के लिए डीडीए मेगा पौधरोपण अभियान शुरू करेगा। इसके तहत लगभग एक हजार एकड़ क्षेत्र में स्थानीय प्रजातियों के करीब 23 लाख पौधे लगाए जाएंगे।
अल नीनो फिर सक्रिय हो गया है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी कि यह हाल के दशकों के सबसे शक्तिशाली अल नीनो में से एक साबित हो सकता है। इससे दुनियाभर में भीषण गर्मी, बाढ़, सूखा और जंगल की आग जैसीघटनाएं बढ़ सकती हैं। अमेरिका की राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन के अनुसार, यह 1950 के बाद के सबसे बड़े अल नीनो घटनाक्रमों में शामिल हो सकता है। इसके कारण 2027 सबसे गर्म वर्ष बन सकता है। बता दें कि अल नीनो समुद्र के तापमान में होने वाला एक प्राकृतिक बदलाव है। यह पहले से ही जीवाश्म ईंधन प्रदूषण के कारण गर्म हो रही पृथ्वी को और अधिक गर्म करेगा।
● सामान्य से अधिक गर्मी पड़ सकती है। हीटवेव अधिक तीव्र और लंबे समय तक चल सकती हैं
● मानसून कमजोर पड़ सकता है। कुछ राज्यों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है। कृषि उत्पादन और जल भंडार प्रभावित हो सकते हैं।
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