Interesting News: हम बात करेंगे हिंदी की जो आज विश्व की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा बन चुकी है. दुनिया भर में लगभग 60 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में हिंदी का उपयोग करते हैं. ऐसे में आइये जानते है सबसे ज्यादा हिंदी किस राज्य में बोली जाती है.
जानकारी के मुताबिक, हिंदी की जड़ें संस्कृत, प्राकृत और अपभ्रंश भाषाओं से विकसित हुई हैं. खड़ी बोली के आधार पर आधुनिक हिंदी ने 19वीं शताब्दी में एक मानक रूप प्राप्त किया. हिंदी का साहित्य, कविता, पत्रकारिता और शिक्षा में उपयोग बढ़ने के साथ यह आज देश की प्रमुख संपर्क भाषा बन चुकी है.
2011 की जनगणना के अनुसार भारत में करीब 43.63% लोग हिंदी को अपनी भाषा के रूप में बोलते हैं. अगर प्रथम और द्वितीय भाषा बोलने वालों को जोड़ दिया जाए, तो हिंदी बोलने वालों की संख्या 60 करोड़ से अधिक हो जाती है. यह हिंदी को भारत की सबसे बड़ी भाषाई शक्ति बनाती है.
भारत में भाषाई विविधता बहुत व्यापक है, लेकिन हिंदी सबसे बड़ी संवाद भाषा है. देश के कई राज्यों में सरकारी, सामाजिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में हिंदी का उपयोग सबसे अधिक किया जाता है. यही कारण है कि हिंदी न केवल राजभाषा है, बल्कि लाखों लोगों की दैनिक जिंदगी की पहचान भी बन चुकी है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हिंदी का प्रयोग भारत के पूर्वोत्तर और दक्षिणी राज्यों में सबसे कम होता है. अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में स्थानीय भाषाओं का प्रभाव अधिक है. यहां हिंदी दूसरी या तीसरी भाषा के रूप में समझी जाती है, लेकिन प्रमुख संवाद भाषा स्थानीय ही होती है.
भारत में सबसे शुद्ध और खड़ी बोली हिंदी मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में बोली जाती है. खासकर मेरठ, मुजफ्फरनगर, बागपत, हरिद्वार और देहरादून का क्षेत्र शुद्ध उच्चारण और व्याकरण के लिए जाना जाता है. यहां की हिंदी को मानक हिंदी का आधार माना जाता है.
बता दें कि दुनिया के 132 से अधिक देशों में बसे करीब 2 करोड़ भारतीय मूल के लोग संवाद के लिए हिंदी का उपयोग करते हैं. प्रवासी समाज, सांस्कृतिक आयोजन और हिंदी शिक्षा केंद्रों ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई. मॉरीशस, फिजी और नेपाल जैसे देशों में तो हिंदी व्यापक रूप से बोली भी जाती है.
लेख में दी गई ये जानकारी सामान्य स्रोतों से इकट्ठा की गई है. इसकी प्रामाणिकता की जिम्मेदारी हमारी नहीं है.एआई के काल्पनिक चित्रण का जी यूपीयूके हूबहू समान होने का दावा या पुष्टि नहीं करता.
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