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भारत में इन दिनों राजनीति और कानून आमने-सामने खड़े हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपने केस खुद लड़ा. बात ये कि आबकारी नीति केस में उनकी रिहाई को लेकर सीबीआई ने चुनौती दी है. इसकी सुनवाई जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा कर रही हैं. केजरीवाल ने याचिका दायर कर मांग की थी कि इस केस की सुनवाई कर रही जज खुद को इस मामले से अलग कर लें. इतना ही उन्होंने जज पर गंभीर आरोप भी लगाएं. इसके बाद से लोग जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं.
दौलत राम कॉलेज से हाई कोर्ट तक की जर्नी
दिल्ली हाई कोर्ट की वेबसाइट के मुताबिक, जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने अपनी करियर की शुरुआत बहुत कम उम्र में ही कर दी थी. वह दिल्ली यूनिवर्सिटी के दौलत राम कॉलेज से इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है. उन्हें साल की सबसे बेहतरीन ऑल राउंडर छात्रा चुना गया था. इसके साथ ही उन्होंने साल 1991 में लॉ और साल 2004 में एलएलएम की डिग्री हासिल की.
यूके, यूएसए से किया प्रैक्टिस
बता दें कि उन्हें साल 2025 में थीसीस के लिए PHD भी मिली, जिसके लिए जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने युके, यूएसए, सिंगापुर और कनाडा से पढ़ाई की. इसके अलावा उनके पास मार्केटिंग मैनेजमेंट, एडवरटाइजिंग और पब्लिक रिलेशन्स में डिप्लोमा डिग्री भी शामिल है. सबसे खास बात ये है कि वह 24 साल की उम्र में ही मजिस्ट्रेट बनीं. इसके बाद 35 की उम्र में उन्हें सेशंस जज बना दिया गया.
साहित्य की शौकीन
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा न केवल पढ़ाई में अच्छी हैं बल्कि उन्हें किताबें पढ़ने का भी शौक है और वह लेखिका भी हैं. उन्होंने अब तक 5 किताबें लिखीं हैं. इन किताबों में ब्रेकअप के दर्द से गुजर रही महिलाओं के लिए गाइड से लेकर ज्यूडिशियल एजुकेशन तक के विषय शामिल हैं.
कई अदालतों की अध्यक्षता
तीन दशक से ज्यादा न्यायिक करियर के दौरान उन्होंने अलग-अलग अदालतों की अध्यक्षता की है. उन्होंने फैमली न्यायालय, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, महिला न्यायालय, महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों के लिए विशेष न्यायालय और विशेष न्यायाधीश के रूप में काम कर चुकी हैं.
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