धरती पर पड़ा था चांद का असली टुकड़ा और किसी को पता भी नहीं चला, अब चंद्रयान-3 ने दिया पक्का सबूत – India.Com

क्या सचमुच चांद का कोई टुकड़ा धरती पर गिरा था? ये ऐसा सवाल है जो रह-रहकर पूछा जाता रहा है. मगर अब इस सवाल का जवाब वैज्ञानिकों ने खोज निकाला है. भारत के चंद्रयान-3 मिशन ने ऐसे सबूत दिए हैं, जिनसे ये बात और मजबूत हो गई है कि कई साल पहले चांद का एक हिस्सा टूटकर धरती तक पहुंचा था. यह खुलासा अहमदाबाद की फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (PRL) के वैज्ञानिकों की नई रिसर्च में हुआ है. वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर द्वारा चांद की सतह से जुटाए गए आंकड़ों की तुलना उस उल्कापिंड से की, जो करीब 40 साल पहले अंटार्कटिका में मिला था. इस उल्कापिंड का नाम ALHA 81005 है और इसे चांद से आया पहला पुष्टि किया गया उल्कापिंड माना जाता है.

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रिसर्च में पता चला कि चंद्रयान-3 के लैंडिंग स्थल शिव शक्ति पॉइंट की मिट्टी और इस उल्कापिंड की रासायनिक बनावट काफी हद तक एक जैसी है. यानी दोनों एक ही तरह की चंद्र सतह से जुड़े हुए हैं. इससे वैज्ञानिकों को यह मानने के और मजबूत सबूत मिले हैं कि यह पत्थर कभी चांद का हिस्सा था. वैज्ञानिकों का कहना है कि करोड़ों साल पहले किसी बड़े उल्कापिंड की टक्कर से चांद की सतह के कुछ टुकड़े अंतरिक्ष में उछल गए थे. इनमें से एक टुकड़ा लंबा सफर तय करने के बाद धरती पर आ गिरा. बाद में यह अंटार्कटिका में मिला और वैज्ञानिकों ने इसकी जांच शुरू की.

अब तक इस उल्कापिंड के चांद से आने के सबूत सीमित थे, लेकिन चंद्रयान-3 ने पहली बार सीधे चांद की सतह से मिले आंकड़ों के जरिए इस संबंध को और मजबूत कर दिया है. इससे वैज्ञानिकों को चांद की सतह, उसकी बनावट और उसके इतिहास को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी. वैज्ञानिकों का मानना है कि ये खोज सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के अंतरिक्ष अनुसंधान के लिए बड़ी कामयाबी है. चंद्रयान-3 ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ये सिर्फ चांद पर पहुंचने वाला मिशन नहीं था, बल्कि उसने ऐसे राज भी खोले हैं जो दशकों से वैज्ञानिकों के लिए पहेली बने हुए थे.

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