नकली बॉस, नकली ऑफ‍िस, नकली नौकरी'! इस नाटक के लिए रोज ₹600 खर्च कर रहे इस देश के युवा – aajtak.in

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भारत में भी युवाओं के बीच नौकरी और करियर को लेकर चर्चा आम है.  लेकिन चीन में युवाओं के रोजगार संकट की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो हैरान करने वाली है.  यहां नौकरी नहीं मिलने से परेशान कुछ युवा अब काम की तलाश के लिए घर पर बैठने के बजाय ऐसे ऑफिसों का रुख कर रहे हैं, जहां उन्हें असल में कोई नौकरी नहीं करनी होती इसके लिए वे अपनी जेब से पैसे भी खर्च कर रहे हैं. 
Fortune की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में युवा लोग ‘प्रिटेंड टू वर्क कंपनी’ द्वारा चलाए जा रहे नकली ऑफिस में बैठने के लिए रोजाना 30 से 50 युआन, यानी करीब 4.20 से 7 डॉलर  (401.98 से ₹669.97 रुपये) खर्च कर रहे हैं. यह रकम भले ही कम लगे, लेकिन चीन में गैर-निजी क्षेत्र में औसत सालाना सैलरी करीब 16,000 डॉलर है. ऐसे में सोमवार से शुक्रवार तक नकली ऑफिस में बैठने के लिए सालाना करीब 1,820 डॉलर खर्च करना युवाओं के लिए बड़ी रकम है. इन नकली ऑफिसों में बेरोजगार युवा अपने स्टार्टअप पर काम करते हैं, नौकरी के लिए आवेदन करते हैं और रोजगार की तलाश कर रहे दूसरे युवाओं के साथ समय बिताते हैं. यहां युवाओं को कंप्यूटर, स्नैक्स, लंच और ड्रिंक्स जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं. 
नकली ऑफिस का बढ़ रहा है ट्रेंड
ये नकली ऑफिस चीन के शेनझेन, शंघाई, नानजिंग, वुहान, चेंगदू और कुनमिंग जैसे बड़े शहरों में स्थित हैं. रिपोर्ट के अनुसार, 16 से 24 साल की उम्र के चीन के 14.5 प्रतिशत युवा रोजगार की तलाश में हैं. यह स्थिति सिर्फ नौकरी न मिलने तक सीमित नहीं है. रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन के कुछ बेरोजगार युवा सोशल मीडिया पर खुद को Rat People कह रहे हैं. वे अपना ज्यादातर समय बिस्तर पर पड़े रहने, फोन चलाने, सोने और खाना ऑर्डर करने में बिताते हैं. वहीं, दूसरी तरफ कुछ युवा इसे Lying Flat यानी जीवन में कम से कम प्रयास करने की प्रवृत्ति के तौर पर अपना रहे हैं. 
क्या करते हैं युवा?
विशेषज्ञों के अनुसार, बेरोजगार लोगों के लिए कार्यालय में काम का दिखावा करने में पैसा खर्च करना भले ही उल्टा लगे, लेकिन ये स्थान नौकरी चाहने वालों को अपने अपार्टमेंट में अकेले रहने की तुलना में नए अवसर पैदा करने में अधिक कारगर साबित हो सकते हैं. न्यूजीलैंड के विक्टोरिया यूनिवर्सिटी ऑफ वेलिंगटन के स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के वरिष्ठ  लेक्चरर क्रिश्चियन याओ ने BCC को बताया कि काम करने का दिखावा करने की घटना अब बहुत आम हो गई है.
आर्थिक बदलाव, शिक्षा और रोजगार के बीच बढ़ते अंतर के कारण युवाओं को अपने भविष्य के बारे में सोचने या इस बीच अस्थायी काम करने के लिए ऐसी जगहों की जरूरत पड़ रही है. नकली ऑफिस भी युवाओं के लिए इस संक्रमण के दौरान एक विकल्प बन गए हैं. चीन में युवाओं के रोजगार संकट की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि 2023 में पेकिंग यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर झांग डांडान ने युवा बेरोजगारी का अनुमान 46.5 प्रतिशत तक बताया था. Fortune की रिपोर्ट के अनुसार, इसी दौर के बाद चीनी सरकार ने कुछ समय के लिए इस संबंध में आंकड़े जारी करना बंद कर दिया था. 
उस साल लगातार तीन महीनों तक युवाओं में रिकॉर्ड स्तर की बेरोजगारी के बाद, चीनी सरकार ने इस मुद्दे पर आंकड़े जुटाना पूरी तरह बंद कर दिया. इस चौंका देने वाली बेरोजगारी दर में 16 मिलियन युवा चीनी कामगार भी शामिल थे जिन्होंने बस काम चलाऊ नौकरी करके खुद को श्रम बल से बाहर कर लिया था यानी वे केवल न्यूनतम काम करके गुजारा कर रहे थे और उच्च पदों की तलाश नहीं कर रहे थे.  
बेरोजगारी को कम करने के लिए क्या किया सरकार ने? 
चीन सरकार युवाओं की चिंताजनक बेरोजगारी दर को कम करने के लिए कदम उठा रही है. साल 2011 में शिक्षा मंत्रालय ने चेतावनी दी थी कि जिन भी कॉलेजों में लगातार दो वर्षों तक 60% से कम रोजगार दर वाले पाठ्यक्रम होंगे, उन्हें बंद किया जा सकता है. अपने पाठ्यक्रमों को बंद होने से बचाने के लिए, चीन के कुछ विश्वविद्यालयों ने स्नातकों से अपने रोजगार की स्थिति को गलत तरीके से दिखाने को कहा ताकि कार्यक्रम चलते रहें. सिंगापुर मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी में कानून के प्रोफेसर हेनरी गाओ ने 2023 में साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट को बताया कि मुझे लगता है कि चीन में युवा बेरोजगारी की वास्तविक स्थिति आंकड़ों से कहीं अधिक खराब हो सकती है क्योंकि कॉलेजों को रोजगार दर को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए प्रोत्साहन मिलता है. ऐसी खबरें आई हैं कि कॉलेज आंकड़ों को छुपाने के लिए अपने ही स्नातकों को नौकरियां दे रहे हैं. 
बेरोजगारी दर में मिल रहे हैं सुधार के संकेत
हालांकि, बेरोजगारी दर में सुधार के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन चीन में बेरोजगार पेशेवर होना इतना आम है कि युवा लोग अपनी बेरोजगारी को गर्व के प्रतीक के रूप में दिखाते हैं. गर्ल बॉसिंग के बजाय बेरोजगार जनरेशन जेड के युवा खुद को रैट पीपल कह रहे हैं, जो अपना दिन बिस्तर पर पड़े-पड़े, फोन स्क्रॉल करते हुए, झपकी लेते हुए और खाना मंगवाते हुए बिता रहे हैं. यह सोशल मीडिया का एक ऐसा चलन है जो वीबो, रेडनोट और डौयिन पर छा गया है. 
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