मेरठ ब्यूरो। पढ़ाई, प्रोजेक्ट्स और नाइट शिफ्ट की डेडलाइंस पूरी करने की होड़ में युवा अब नींद को दुश्मन समझ बैठे हैं। मगर चौंकाने वाली बात ये है कि नींद से लडऩे की ये जि़द उनके दिमाग को चुपचाप तबाह कर रही है। स्वास्थ्य विभाग की स्टडी रिपोर्ट में ये चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। नींद भगाने के लिए के लिए चाय, कॉफी, सिगरेट, निकोटीन स्ट्रिप्स, पिल्स या अन्य तरह के नशे करने की आदत ने स्टूडेंट्स और कामकाजी युवाओं के ब्रेन को नुकसान पहुंचा रही है। डॉक्टर्स का कहना है कि ऐसे लोगों में न्यूरॉन्स की एक्टिविटी धीमी हो रही है, कनेक्टिविटी टूट रही है और दिमाग की प्रोसेसिंग पावर 25-35 प्रतिशत तक गिर चुकी है।
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ये है रिपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक जिला अस्पताल और अन्य केंद्रों पर एक साल में ओपीडी में 21530 पहुंचे युवाओं को इस स्टडी में शामिल किया गया। ये सभी बार-बार माइग्रेन, स्ट्रेस, बेचैनी, और फोकस की समस्या लेकर डॉक्टर्स के पास पहुंचे थे। इनकी उम्र 14 से 30 वर्ष के बीच थी। इन लोगों में लाइफस्टाइल से जुड़ी जैसे नींद, ड्यूटी टाइमिंग, नशे की आदतें और मानसिक स्थिति डिस्टर्ब मिली। इनमें पासवर्ड, मोबाइल नंबर तक याद नहीं रहने, चेहरे और नाम पहचानने में दिक्कत, सुबह की बात शाम तक भूल जाना, किताब लेकर बैठना, लेकिन याद कुछ नहीं रहने जैसे लक्षण मिले। इसके बाद इन युवाओं के ब्रेन स्कैन, स्लीप पैटर्न टेस्ट, न्यूरोबायोलॉजिकल एनालिसिस और काउंसलिंग सेशन किए गए। जिसके बाद पता चला की लगातार नींद की कमी और कैफीन-निकोटीन के ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल ने ब्रेन के प्राकृतिक संतुलन को ही बिगाड़ दिया।
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ये करें
1. नींद को प्राथमिकता दें हर दिन कम से कम 6 से 8 घंटे की नींद लेना जरूरी है।
2. थकान दूर करने के लिए पानी से चेहरा धोएं, थोड़ी देर टहलें, हल्की स्ट्रेचिंग करें। तुलसी की चाय या नींबू पानी जैसे देसी विकल्प ज्यादा असरदार हैं।
3. लगातार पढ़ाई या स्क्रीन पर काम करने के बजाय हर 45-60 मिनट पर 5-10 मिनट का ब्रेक लें इससे ब्रेन को रिचार्ज करने का मौका मिलता है।
4. हर दिन एक ही समय पर सोने और जागने की आदत बनाएं, भले ही काम देर तक चलता हो।
5. मेंटल हेल्थ को गंभीरता से लें। थकान, चिड़चिड़ापन, फोकस की कमी या अवसाद महसूस हो तो मनोचिकित्सक या काउंसलर से बात करें
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क्या न करें
1. नींद को नजरअंदाज न करें
2. कैफीन-निकोटीन का ओवरडोज न लें
3. नींद की दवा या एनर्जी ड्रिंक्स को आदत बनाएं
4. खुद को मशीन न समझें
5. दूसरों से तुलना न करें
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इनका है कहना
पढ़ाई के दौरान दिमाग पर बनने वाला दबाव जब लगातार नींद और नशे की लत के साथ जुड़ता है, तो यह सीधा ब्रेन के न्यूरॉन्स पर वार करता है। यह असर धीरे-धीरे युवाओं को मानसिक रूप से बीमार बना देता है।
डा। तरूण पाल, एचओडी मानसिक रोग विभाग, मेडिकल कॉलेज
ब्रेन के लिए नींद उतनी ही जरूरी है जितनी सांसों के लिए ऑक्सीजन है। बार-बार नींद को दबाना, कृत्रिम रूप से ब्रेन को एक्टिव रखना, ये धीरे-धीरे दिमाग को जलाना है। इसका असर लंबे समय तक नहीं, जीवनभर रहता है।
डा। रवि राणा, न्यूरोसाइकेट्रिस्ट
चाय-सिगरेट जैसी आदतें भी गहराई तक दिमाग को प्रभावित कर सकती हैं। युवाओं में धूम्रपान और निकोटीन के कारण दिमाग के न्यूरॉन्स तेजी से गिरते हैं। जिससे दिमाग के काम करने की क्षमता कम हो जाती है। करियर की दौड़ में खुद के दिमाग को खो देना सबसे बड़ी हार है।
डा। विभा नागर, क्लीनिकल साइक्लोजिस्ट
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