पीएम ने बढ़ाया बड़ा कदम, सीजेपी और विपक्ष अड़े; प्रधान के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं – Jagran

प्रधानमंत्री मोदी ने पेपर लीक मामलों के त्वरित निपटारे के लिए देशभर में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की है। वहीं, विपक्ष और सीजेपी इसे नाकाफी बताक …और पढ़ें
पीएम की पहल के बावजूद सीजेपी और विपक्ष अड़े।
पीएम मोदी ने पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा की।
कलकत्ता, दिल्ली, बॉम्बे, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में बनेंगे ये कोर्ट।
विपक्ष और सीजेपी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े, बातचीत की मांग।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ल्ली। संसद में चर्चा की तैयारी और काकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं के साथ बातचीत का रास्ता खोलने के बीच सरकार ने पेपर लीक की गंभीर समस्या से निपटने की ओर भी कदम बढ़ा दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘एक्स’ के जरिये जनता से सीधा संवाद करते हुए पेपर लीक की गंभीर समस्या से निपटने के लिए कई ठोस कदम उठाने का भरोसा दिया है।
इस कड़ी में सबसे पहले उन्होंने पेपर लीक से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए देशभर में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का एलान किया है। उन्होंने साफ किया कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
दरअसल, पेपर लीक मामले में दोषियों को सजा मिलना एक बड़ी समस्या बनी हुई है। एक तो सजा मिलने में काफी देर लगती है, दूसरे उसमें भी कई छूट जाते हैं। इसी कारण ऐसे लोगों को बल मिलता है। फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने से इस समस्या का काफी हद तक हल निकल सकता है। फास्ट ट्रैक कोर्ट में दिन-प्रतिदिन की सुनवाई से फैसला जल्दी आ सकता है और दोषियों को सजा मिल सकती है।
वैसे ऐसे मामलों में जांच की गति भी तेज करने की जरूरत है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री ने इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में निर्देश दे दिए गए हैं और संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कहा जा चुका है।
पीएम मोदी ने कहा कि विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षित करने के लिए सरकार द्वारा लिए जा रहे निर्णयों की शृंखला में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। सूत्रों के अनुसार कलकत्ता, दिल्ली, बाॉम्बे एवं मध्य प्रदेश हाई कोर्टों में प्राथमिकता के आधार पर फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं।
ध्यान रहे कि इस वर्ष नीट पेपर लीक मामले में शामिल पाए गए 13 लोग हिरासत में हैं और सीबीआइ जांच चल रही है। जबकि 2024 के नीट पेपर लीक मामले में मुख्य आरोपित संजीव मुखिया को सीबीआइ ने क्लीन चिट दे दी है। जाहिर है कि जांच की तेजी भी सुनिश्चित करनी होगी।
प्रधानमंत्री की नई घोषणा इसलिए भी अहम है क्योंकि सीजेपी और संसद में विपक्ष चर्चा से पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा है। ऐसे में सरकार ने परीक्षा को फूलप्रूफ बनाने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है।
इसके पहले मंगलवार को भी प्रधानमंत्री मोदी ने राजग सांसदों के साथ मंगल मिलन बैठक में पेपर लीक को महापाप बताते हुए इसके दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा सुनिश्चित करने की जरूरत पर बल लिया था। उन्होंने ऐसे मामलों में अदालत में वरिष्ठ वकीलों को लगाने पर जोर भी दिया था।
इधर, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने प्रधानमंत्री के बयान को नाकाफी बताते हुए स्पष्ट किया है कि वह धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से नीचे नहीं मानेगी। साथ ही केंद्र को बातचीत के लिए जंतर-मंतर या किसी तटस्थ स्थल पर आना होगा और उसके लिए उसे सीधे संपर्क करना होगा। प्रधानमंत्री की पोस्ट पर सीजेपी अध्यक्ष अभिजीत दीपके ने धर्मेंद्र प्रधान को लेकर व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया दी।
जबकि सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया का स्वागत करते हुए कहा कि यह लगभग डेढ़ महीने के विरोध-प्रदर्शन के बाद आई है, फिर भी इसमें बार-बार हो रहे पेपर लीक के पीछे के मुख्य सवाल का जवाब नहीं है। पेपर लीक के बाद आप क्या सजा दे रहे हैं? इससे पेपर लीक की समस्या हल नहीं होने वाली है। पेपर लीक ही क्यों हो रहे हैं, इस सवाल का जवाब दिया जाना चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि असली लड़ाई चोट लगने से रोकने की है। यह इसलिए लगती रहती है क्योंकि सिस्टम चलाने वाले लोग न तो जवाबदेह हैं और न ही काबिल। इसलिए यह उपाय किसी भी तरह से काफी नहीं है।
रांका ने कहा कि यहां बड़ी संख्या में लोग जोश और संकल्प के साथ आए हैं और हर कोई धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है। जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, यह मुद्दा सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान तक सीमित नहीं रहा है, अब केंद्र के नेतृत्व को भी निशाने पर लिया जा रहा है। लोग कह रहे हैं कि प्रधान नहीं, अब प्रधानमंत्री का इस्तीफा चाहिए। मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास ने स्पष्ट कहा कि सरकार को बातचीत के लिए सीधे पार्टी से संपर्क करना चाहिए।
उन्हें सरकार की ओर से बातचीत का कोई सीधा संदेश नहीं मिला है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह का कहना है कि सरकार कहीं भी बात कर सकती हैं, तो हमने अपना सुझाव दे दिया है। जंतर-मंतर आएं या कांस्टीट्यूशन क्लब जैसे किसी तटस्थ स्थान पर आएं। हम वहीं मिलेंगे। उनकी तरफ से अभी तक मुझे कोई आधिकारिक संदेश नहीं मिला है।

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