पेपर लीक आंदोलन के पीछे पंजाब का सियासी गणित, दिल्ली की लड़ाई से 2027 की जमीन साध रहे 'आप' और कांग्रेस – Jagran

पेपर लीक विरोध प्रदर्शनों को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच पंजाब चुनाव के मद्देनजर तकरार बढ़ गई है। दोनों दल युवाओं के समर्थन से एक-दूसरे से …और पढ़ें
अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी।
AAP और कांग्रेस में पेपर लीक पर पंजाब चुनाव को लेकर तकरार।
राहुल गांधी और केजरीवाल युवाओं के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभा रहे।
दोनों दल प्रदर्शनों के जरिए राजनीतिक बढ़त बनाने की होड़ में।
नीलू रंजन, जागरण। पिछले दो तीन दिनों में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी नेताओं के बयानों और तेवरों से यह दिखेन लगा है कि पेपर लीक के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच तकरार की बड़ी वजह पंजाब का आगामी विधानसभा चुनाव है।
दिल्ली से सत्ता गंवाने के बाद पंजाब की हार आप के अस्तित्व के लिए सवाल खड़ा सकता है। वहीं कांग्रेस पंजाब में अपनी वापसी की उम्मीद लगाए है। पंजाब में एक दूसरे के सामने खड़े दोनों दल युवाओं से जुड़े पेपर लीक मामले में एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ है।
मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के घर के बाहर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के धरने पर बैठने के बाद आप नेताओं का फूटा गुस्सा इसी का नतीजा है। अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी के बीच इस मामले को लेकर सरकार पर हमला करने में लगी होड़ को भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।
दरअसल कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजित दीपके और आशुतोष रांका की आप के शीर्ष नेताओं के साथ नजदीकियां जगजाहिर है। यही कारण है जंतर-मंतर पर धरने से कांग्रेस ने दूरी बनाए रखी। वैसे प्रदर्शन को गैरराजनीतिक बताने के लिए आप नेताओं ने भी इससे दूरी बनाई रखी।
पहली बार संसद चलो के मार्च के तीन दिन पहले शुक्रवार को कांग्रेस की ओर से पवन खेड़ा को प्रदर्शन स्थल पर भेजा गया और उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने युवाओं के संघर्ष को समर्थन जताने के लिए उन्हें भेजा है। राहुल गांघी उसी दिन देहरादून में छात्रों के साथ संवाद करने गए थे।
दरअसल इसके पहले गुरूवार को कांग्रेस के संसदीय रणनीति समूह की बैठक में इसपर चर्चा हुई थी और सोनिया गांधी ने युवाओं के इस प्रदर्शन को समर्थन देने पर जोर दिया था। उसी दिन महासचिव संगठन केसी वेणुगोपाल ने इंटरनेट मीडिया एक्स पर पोस्ट कर इसके समर्थन का ऐलान किया था।
सोमवार को विरोध प्रदर्शन के हिंसक रूप धारण करने और पुलिस से झड़प के बाद स्थिति तेजी से बदली। इससे आप को सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया और मंगलवार की सुबह से अरविंद केजरीवाल सक्रिय हो गए। अस्पतालों और थानों का दौरा कर घायल प्रदर्शनकारियों को देखने और छुड़ाने के कई वीडियो के साथ केजरीवाल आगे निकलते दिखे।
कांग्रेस ने संसद के भीतर विरोध और प्रदर्शन कर आप से आगे रखने की कोशिश जरूर की। इसके साथ ही कांग्रेस सेवा दल के कार्यकर्ता भी अपने परंपारिक परिधान में जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को खाना खिलाने पहुंच गए।
इसके बाद ही जन्मदिन के अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के घर पर जमा हुए कांग्रेस नेताओं ने राहुल गांधी और प्रियंका समेत प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठने का फैसला किया। जिसकी संजय सिंह और आतिशी सिंह ने खुली आलोचना कर दी।
इसके साथ ही काकरोच के आंदोलन की तुलना 2011 के अन्ना हजारे आंदोलन से करने और इसे अरविंद केजरीवाल 2.0 बताये जाने को लेकर भी कांग्रेस सशंकित हो गई है। केजरीवाल इस आंदोलन के सहारे पूरे देश के युवाओं की बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। आंदोलन से जुड़े मुद्दे पर उनका वीडियो पोस्ट वायरल किया जा रहा है।

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