पृथ्वी को खतरा… शुक्र ग्रह के पास छिपी है सुसाइड एस्टेरॉयड की बड़ी फौज – AajTak

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हमारी धरती को एक बड़ा खतरा हो सकता है, जो आंखों से दिखता ही नहीं. शुक्र ग्रह की कक्षा के पास सैकड़ों ऐसे एस्टेरॉयड घूम रहे हैं, जो सूरज की चमक में छिपे हुए हैं. ये इतने करीब हैं कि हमें इन्हें देखने के लिए सूरज की तरफ देखना पड़ता है, लेकिन सूरज की रोशनी सब कुछ ढक लेती है.
ब्राजील के साओ पाउलो स्टेट यूनिवर्सिटी के खगोलशास्त्री वेलेरियो कैरुबा कहते हैं कि हमारे अध्ययन से पता चला है कि ऐसे कई खतरनाक एस्टेरॉयड हैं, जिन्हें आज की दूरबीनें नहीं देख पातीं. ये एस्टेरॉयड सूरज के चारों ओर घूमते हैं, लेकिन ये मंगल-बृहस्पति के बीच की एस्टेरॉयड बेल्ट का हिस्सा नहीं हैं. ये शुक्र के साथ तालमेल में हैं लेकिन इतने मुश्किल से दिखते हैं कि अदृश्य ही रह जाते हैं. भविष्य में ये पृथ्वी से टकरा सकते हैं.
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ये एस्टेरॉयड कोई कल्पना नहीं हैं. अब तक वैज्ञानिकों ने 20 ऐसे एस्टेरॉयड ढूंढे हैं, जो शुक्र के साथ ‘को-ऑर्बिटल’ हैं. मतलब, ये शुक्र को घेरते नहीं, बल्कि सूरज के चारों ओर शुक्र के साथ ही चक्कर लगाते हैं. कभी आगे, कभी पीछे, कभी रास्ता पार करते हुए. इनकी कक्षाएं अस्थिर हैं – ये हर 12,000 साल में बदल जाती हैं.
Asteroid near Venus danger for earth
इनके रास्ते सिर्फ 150 साल आगे तक ही सही से बताए जा सकते हैं. कभी-कभी इनकी कक्षा बदलने पर ये शुक्र के स्थिर रास्ते से निकलकर पृथ्वी के पास आ सकते हैं. ये पृथ्वी की कक्षा को भी काट सकते हैं, जिससे टकराव का खतरा बढ़ जाता है. वैज्ञानिकों का मानना है कि ये 20 ही बर्फ का टिप हैं. असल में इनकी संख्या बहुत ज्यादा हो सकती है.
कैरुबा कहते हैं कि करीब 300 मीटर व्यास वाले एस्टेरॉयड इस समूह में छिपे हो सकते हैं. ये 3 से 4.5 किलोमीटर चौड़े गड्ढे बना सकते हैं. सैकड़ों मेगाटन ऊर्जा छोड़ सकते हैं. अगर ये किसी घनी आबादी वाले इलाके में गिरे, तो भारी तबाही हो जाएगी. अब तक मिले शुक्र के साथी एस्टेरॉयड में एक बात कॉमन है – इनकी कक्षा की ‘वक्रता’ (इक्विसेंट्रिसिटी) 0.38 से ज्यादा है.  वक्रता बताती है कि कक्षा कितनी गोल है.
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0 का मतलब बिल्कुल गोल कक्षा. पृथ्वी की कक्षा की वक्रता सिर्फ 0.017 है, यानी लगभग गोल. ज्यादा वक्रता मतलब लंबी-चौड़ी कक्षा. इनकी ज्यादा वक्रता की वजह से ये शुक्र से दूर जाकर पृथ्वी के करीब आ जाते हैं. सूर्यास्त के समय, जब सूरज नीचे होता है, तब ये थोड़े दिख जाते हैं. लेकिन कम वक्रता वाले एस्टेरॉयड अभी भी छिपे हैं.
Asteroid near Venus danger for earth
कैरुबा और उनकी टीम ने कंप्यूटर सिमुलेशन किए. उन्होंने कम वक्रता वाली कक्षाओं का अध्ययन किया – क्या ये पृथ्वी को खतरा पैदा कर सकती हैं? और क्या वेरा रुबिन वेधशाला (जो जल्द बनेगी) इनकी मदद से इन्हें देख पाएगी? यह वेधशाला दुनिया की सबसे बड़ी कैमरा वाली होगी. सिमुलेशन से पता चला कि कम वक्रता वाली कई कक्षाएं भविष्य में पृथ्वी के लिए खतरा बन सकती हैं. लेकिन रुबिन वेधशाला इन्हें साल के कुछ खास समय पर ही देख पाएगी, वो भी सीमित दिनों में.
यह कमी ग्रहों की रक्षा के लिए बड़ी समस्या है. जो खतरा दिखे नहीं, उसे कैसे रोका जाए? एक समाधान है – शुक्र के चारों ओर या उसके साथ घूमने वाली वेधशाला. इससे इन एस्टेरॉयड को आसानी से देखा जा सकेगा. नासा का आगामी मिशन ‘एनईओ सर्वेयर’ भी सौर मंडल के इस अंधे कोने को कवर करेगा. शोधकर्ताओं ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, रुबिन वेधशाला कुछ एस्टेरॉयड ढूंढ सकती है, लेकिन शुक्र के पास से स्पेस मिशन ही सभी ‘अदृश्य खतरनाक एस्टेरॉयड’ को खोज पाएगा. 
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