Pension schemes: भारत में पेंशन उद्योग को लेकर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। रिटायरमेंट फंड रेगुलेटर यानी पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) अब व्यक्तिगत पेंशन हाउस को टेलर-मेड (जरूरत के अनुसार तैयार किए गए) निवेश योजनाएं शुरू करने की अनुमति देने की तैयारी कर रहा है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, PFRDA ने इस संभावित बदलाव पर फंड मैनेजर्स के साथ कई दौर की बातचीत की है। इस कदम का मकसद भारत के 175 अरब डॉलर के पेंशन उद्योग में और तेजी लाना है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने इस बदलाव को लेकर कई राउंड की चर्चा फंड मैनेजर्स के साथ की है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य है कि पेंशन उद्योग की वृद्धि और पहुंच को और बढ़ाया जाए। अभी तक पेंशन योजनाएं सीमित विकल्पों के साथ मिलती हैं, लेकिन नई व्यवस्था आने पर निवेशक अपनी जरूरत और जोखिम क्षमता के हिसाब से टेलर-मेड प्लान चुन सकेंगे।
बता दें कि अगर यह नियम लागू होता है, तो निवेशकों को अपनी जरूरत और जोखिम क्षमता के अनुसार निवेश योजनाएं चुनने का मौका मिलेगा। यह सुधार पेंशन सेक्टर में अधिक लचीलापन और आकर्षण ला सकता है। आसान भाषा में कहें तो सरकार पेंशन योजनाओं को और लचीला और ग्राहक-उन्मुख बनाने की दिशा में काम कर रही है, ताकि ज्यादा लोग इससे जुड़ें और पेंशन उद्योग तेजी से बढ़ सके।
1. व्यक्तिगत जरूरतों के हिसाब से योजना- बता दें कि अभी पेंशन योजनाएं लगभग एक जैसी होती हैं। नई व्यवस्था में हर निवेशक अपनी उम्र, जोखिम सहनशक्ति और भविष्य की ज़रूरतों (जैसे बच्चों की पढ़ाई, रिटायरमेंट खर्च) के अनुसार योजना चुन पाएगा।
2. बेहतर रिटर्न की संभावना- जिन निवेशकों को ज़्यादा जोखिम लेने में दिक्कत नहीं है, वे इक्विटी-आधारित विकल्प चुन सकते हैं। वहीं सुरक्षित निवेश चाहने वाले लोग डेब्ट या बैलेंस्ड फंड चुन सकते हैं।
3. लचीलापन- निवेशक अपनी निवेश रणनीति बदल सकेंगे, जैसे उम्र बढ़ने पर अधिक सुरक्षित विकल्प चुनना। इससे रिटायरमेंट तक पैसा सुरक्षित और लाभदायक तरीके से बढ़ेगा।
4. लंबे समय के लिए भरोसेमंद बचत- टेलर-मेड पेंशन प्लान्स निवेशक को अनुशासन के साथ बचत करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। यह भविष्य में स्थिर आय सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
5. प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, विकल्प भी- जब कई पेंशन कंपनियां अलग-अलग कस्टम प्लान्स लॉन्च करेंगी तो निवेशकों के पास चुनने के लिए ज़्यादा विकल्प होंगे। इससे सेवाओं और रिटर्न की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
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