पेट्रोल-डीजल और LPG से लेकर साबुन-दवाइयां भी होंगी सस्ती… US-ईरान शांति समझौते भारत को होंगे बड़े फायदे – Jagran

अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौता से भारत पेट्रोल, डीजल, एलपीजी के साथ कपड़े, दवाइयां और रोजमर्रा के कई सामान सस्ते हो सकते हैं। …और पढ़ें
अमेरिका ईरान शांति समझौते से भारत में क्या-क्या हो सकता है सस्ता? (AI जनरेटेड तस्वीर)
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा
एलपीजी सिलेंडर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध, दाम स्थिर रहेंगे
दवाइयां, कपड़े, टायर, कृषि उत्पाद भी सस्ते हो सकते हैं
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों तक चले संघर्ष के बाद शुक्रवार को दोनों देश स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टाक रिजॉर्ट में ऐतिहासिक शांति वार्ता के लिए आमने-सामने होंगे। यहां समझौते के क्रियान्वयन और आगे की प्रक्रिया पर चर्चा होगी।
अमेरिका और ईरान के बीच 19 जून को होने वाला प्रस्तावित शांति समझौता सिर्फ एक कूटनीतिक सफलता नहीं, बल्कि भारत के लिए एक बड़ी आर्थिक राहत साबित हो सकता है।
दरअसल, भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए इस समझौते के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और गैस की आपूर्ति सामान्य होते ही पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) के दाम में गिरावट देखने को तो मिलेंगे ही। साथ ही इसका असर ट्रांसपोर्टेशन और मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट पर भी दिखेगा।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट होने से पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल जैसे सिंथेटिक धागे, रबर, प्लास्टिक और पेट्रोकेमिकल्स सस्ते होंगे, जिससे आगे चलकर कपड़े, साबुन, डिटर्जेंट, कॉस्मेटिक्स, दवाइयां, टायर और यहां तक कि खेती-किसानी के सामान भी सस्ते हो सकते हैं।
आइए जानते हैं अमेरिका ईरान के बीच होने वाले शांति समझौते से भारत को कितना फायदा होगा और इससे कौन-कौन सी चीजें सस्ती हो सकती हैं।
28 फरवरी और अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़े जंग के दौरान ईरान ने होर्मुज में पाबंदी लगा दी, जिसके कारण तेल आपूर्ती बाधित हो गई। जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई थीं। चूंकि भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है।
ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अगर पूरी तरह खुल जाता है तो निर्वाध कच्चे तेल का आयात होगा और बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ जाएगी। इससे कच्चे तेल की कीमतें कम हो जाएंगी और आगे चलकर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी राहत मिल सकती है।
भारत LPG गैस के लिए भी आयात पर काफी निर्भर है। लगभग 88% LPG आयात इसी रास्ते से जुड़े रहे हैं। ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलने से भारत पर्याप्त मात्रा में एलपीजी सिलिंडर उपलब्ध हो सकेगा और इससे सरकार को LPG कीमतों को स्थिर रखने और सब्सिडी का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है। इसका सीधा फायदा घरेलू उपभोक्ताओं तक देखने को मिल सकता है.
डीजल का उपयोग सिर्फ वाहनों तक ही सीमित नहीं है, इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल खेती, कोल्ड स्टोरेज और माल ढुलाई में भी होता है। सब्जी-फल और दूसरे खाने पीने के सामान एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाने में ट्रांसपोर्ट लागत अहम भूमिका निभाती है। इसके अलावा खाड़ी देशों के फर्टिलाइजर का भी कृषि में अहम योगदान है, ऐसे में अगर डीजल और खाद सस्ता होते हैं तो खाने-पीने की चीजों के दाम कम हो सकते हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) भी सस्ता हो सकता है। इससे एयरलाइंस कंपनियां किराए में छूट या सस्ते टिकट ऑफर कर सकती हैं।
अगर कच्चे तेल की कीमतों में और अधिक गिरावत होती है तो सिर्फ पेट्रोल-डीजल की नहीं महंगाई दर में भी गिरावट आ सकती है। इससे RBI के पास ब्याज दरों को कम रखने या जरूरत पड़ने पर कटौती करने की संभावना बढ़ सकती है। ऐसे में भविष्य में आम लोगों को होम लोन, कार लोन और बिजनेस लोन की EMI पर भी राहत मिल सकती है।
कपड़े धोने के पाउडर और डिटर्जेंट नहाने के साबुन, प्लास्टिक पैकेजिंग, रैपर, डिब्बे और ढक्कन बनाने में इस्तेमाल होने वाले पॉलीप्रोपाइलीन और पॉलीथीन जैसे कच्चे माल भी पेट्रोलियम से बनते हैं। ऐसे में इनकी लागत कम होने से भी इन सामानों में कमी देखने को मिल सकती है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर टायर इंडस्ट्री पर भी देखने को मिल सकता है। चूंकि टायर बनाने में इस्तेमाल होने वाला सिंथेटिक रबर पूरी तरह पेट्रोलियम आधारित होता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से टायर कंपनियों की लागत घट सकती है और ये प्रोडक्ट सस्ते हो सकते हैं।
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