अगर भारत के सेमीकंडक्टर बजट की तुलना चीन से की जाएं, तो चीन का सेमीकंडक्टर बजट करीब 47 बिलियन डॉलर यानी करीब 4 लाख करोड़ रुपये है, जो कि भारत के मुकाबले में काफी ज्यादा है। हालांकि चीन और अमेरिका की बीच जारी ट्रेड वार भारत के लिए फायदेमेंद साबित हो सकती है, क्योंकि अमेरिका की ओर से चीन पर कई तरह के टैरिफ लगाए गए हैं, जिससे चीन की मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर असर पड़ सकता है।
वित्त वर्ष 2023-24 के लिए भारत का सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले यूनिट के लिए बजट 1,503 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 6,903 करोड़ रुपये हो गया है। इसी तरह वित्त वर्ष 2023-24 के लिए पीएलआई स्कीम का बजट 4,560 करोड़ रुपये था, जो इस बार के बजट में बढ़कर 6,200 करोड़ रुपये हो गया है।
स्मार्टफोन सेक्टर भारत की ग्रोथ में अहम भूमिका निभा रहा है। यही वजह है कि सरकार ने मोबाइल फोन के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इनीशिएटिव के लिए 8,885 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। यह बजट आवंटन वित्त वर्ष 2025 के लिए 5,747 करोड़ रुपये था, जिसमें 55 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
सरकार ने मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा देने के लिए इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल डिस्प्ले पर मूल सीमा शुल्क को 10% से बढ़ाकर 20% करने का ऐलान किया है। साथ ही ओपन सेल और अन्य पार्ट्स पर शुल्क को घटाकर 5 फीसद करने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने एलसीडी और एलईडी टेलीविजन के लिए सीमा शुल्क से छूट देकर ओपन सेल के निर्माण को बढ़ावा देने का भी प्रस्ताव रखा। सरकार ने पहले सीमा शुल्क को 5% से घटाकर 2.5% कर दिया था।