Shreeom Singh
Date: 27-09-26 10:25
ढाका: बांग्लादेश में सत्ता को लेकर एक बार फिर पर्दे के पीछे गतिविधियां तेज होने की चर्चा है. एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान और उनकी BNP सरकार को कमजोर करने के लिए एक बड़े राजनीतिक प्लान पर काम हो रहा है. इस कथित योजना को ‘माइनस टू’ फॉर्मूले से जोड़ा जा रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें कुछ विदेशी ताकतों के साथ बांग्लादेश के प्रभावशाली लोगों की भूमिका बताई गई है. हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
North East News की रिपोर्ट में एक कथित खुफिया सूत्र के हवाले से कहा गया है कि 22 और 23 सितंबर को मेजर जनरल महबूबुल आलम के घर पर महत्वपूर्ण बैठकें हुईं. महबूबुल आलम बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ प्रोफेशनल्स के वाइस चांसलर हैं. इस बैठक में अमर देश के संपादक महमूदुर रहमान, पूर्व सेना अधिकारी अब्दुल्ला अमान आजमी और पूर्व सैन्य अधिकारी हसीनुर रहमान के शामिल होने का दावा किया गया है. रिपोर्ट में तुर्की की खुफिया एजेंसी के एक अधिकारी के भी वहां मौजूद होने की बात कही गई है.
तारिक रहमान को कमजोर करने का प्लान?
कथित खुफिया सूत्र के अनुसार, इन बैठकों में ऐसी सरकार बनाने पर चर्चा हुई, जो लंबे समय तक देश की सत्ता संभाल सके और खुद को ‘गैर-राजनीतिक सरकार’ के तौर पर पेश करे. रिपोर्ट में इस पूरी कवायद में विदेश मंत्री खलीलुर रहमान और महमूदुर रहमान की भूमिका का दावा किया गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, इस कथित प्लान को सेना और जमात-ए-इस्लामी का समर्थन हासिल होने की बात कही जा रही है. इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि योजना के लिए तुर्की से आर्थिक मदद मिली और इसकी रणनीति पाकिस्तान में तैयार की गई. कथित तौर पर इसका लक्ष्य BNP और अवामी लीग, दोनों को कमजोर करना है.
रिपोर्ट में आजमी और हसीनुर रहमान को लेकर भी कई दावे हैं. कहा गया है कि दोनों पहले सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान के साथ अपने नियमित संपर्क की बात कर चुके हैं. साथ ही, बांग्लादेश की सैन्य कमान को लेकर भी अंदरूनी खींचतान का दावा किया गया है. रिपोर्ट में सैन्य खुफिया तंत्र के भीतर एक कथित इस्लामिक काउंटर-टेररिज्म गठबंधन के सक्रिय होने की बात कही गई है और ब्रिगेडियर शौकत उस्मान को इसका ग्रुप लीडर बनाए जाने का दावा किया गया है.
क्या तारिक के साथ भी हो सकता है हसीना जैसा?
रिपोर्ट में बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति की तुलना 5 अगस्त 2024 के बाद के घटनाक्रम से की गई है. उस समय शेख हसीना और उनका परिवार बांग्लादेश से बाहर चला गया था. अब दावा किया जा रहा है कि कुछ सरकार विरोधी ताकतें तारिक रहमान और उनके परिवार को भी देश की राजनीति से दूर करने की योजना बना रही हैं.
इसी सिलसिले में विदेश मंत्री खलीलुर रहमान पर भी सवाल उठाए गए हैं. कथित खुफिया सूत्र का दावा है कि खलीलुर के इस पूरे समूह से करीबी संबंध हैं. हालांकि, इन आरोपों को लेकर कोई स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है.
एर्दोगन और पेजेश्कियान से मुलाकात पर भी सवाल
संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान तारिक रहमान की तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात हुई. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एर्दोगन और पेजेश्कियान के साथ उनकी मुलाकात पहले से तय नहीं थी.
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि इन दोनों बैठकों की व्यवस्था खलीलुर रहमान की पहल पर हुई. दावा यह है कि इसके जरिए तारिक रहमान को उनकी बताई गई ‘तटस्थ विदेश नीति’ से हटाकर विवादों में घेरने की कोशिश की गई. हालांकि, इन मुलाकातों को किसी साजिश का हिस्सा बताने वाले दावे की पुष्टि नहीं हुई है.
ढाका में पाकिस्तानी ISI अधिकारियों के पहुंचने का दावा
रिपोर्ट में पाकिस्तान को लेकर भी बड़ा दावा किया गया है. कथित खुफिया सूत्र के अनुसार, पाकिस्तान सेना के दो अधिकारी मेजर मोहम्मद अकरम और मेजर अजीज बट्टरी करीब 10 दिनों के लिए गुप्त दौरे पर बांग्लादेश पहुंचे थे. दावा है कि दोनों अधिकारियों ने चट्टोग्राम समेत कई सैन्य ठिकानों का दौरा किया और वहां वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बातचीत की.
रिपोर्ट में दोनों को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़ा बताया गया है. यह भी कहा गया है कि 25 सितंबर को बांग्लादेश छोड़ने से पहले दोनों अधिकारियों ने महमूदुर रहमान, आजमी और हसीनुर रहमान से मुलाकात की. इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
जैमा रहमान की UN में नियुक्ति को लेकर भी विवाद
खलीलुर रहमान की भूमिका को लेकर एक और मामला तारिक रहमान की बेटी जैमा से जुड़ा है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जैमा रहमान को संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष के कार्यालय में लीगल ऑफिसर नियुक्त किया गया. इस नियुक्ति को लेकर BNP से जुड़े कुछ लोगों ने सवाल उठाए हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, इन लोगों को शक है कि जैमा की नियुक्ति के जरिए तारिक रहमान को विवाद में लाने की कोशिश की गई. 24 सितंबर को तारिक रहमान के संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने से ठीक पहले जैमा की नियुक्ति का मुद्दा सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया.
तारिक के भाषण के समय पर भी सवाल
खलीलुर रहमान इस समय बांग्लादेश के विदेश मंत्री होने के साथ संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष भी हैं. रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि तारिक रहमान के भाषण के लिए ऐसा समय चुना गया, जिसे बांग्लादेश के लिए अनुकूल नहीं माना जा रहा है.
दावा है कि न्यूयॉर्क में तारिक रहमान का भाषण देर दोपहर के समय हुआ, जबकि बांग्लादेश में उस वक्त सुबह करीब 4:18 बज रहे थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समय महासभा हॉल में आम तौर पर मौजूदगी कम रहती है. इसी वजह से खलीलुर रहमान की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं. हालांकि, भाषण के समय को किसी साजिश से जोड़ने का कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है.
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