बिहार में जातीय जनगणना को लेकर सियासत गर्म, राहुल गांधी के बयान पर एनडीए का पलटवार – Aaj Tak

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बिहार में जातीय जनगणना को लेकर राजनीति ने फिर से जोर पकड़ लिया है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी के शनिवार को दिए बयान पर एनडीए के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. राहुल गांधी ने शनिवार को बिहार दौरे के दौरान नीतीश सरकार द्वारा कराई गई जातीय जनगणना को ‘फर्जी’ बताते हुए कहा था कि यह ‘लोगों को मूर्ख बनाने के लिए’ की गई है.
राहुल गांधी लोकसभा चुनाव के बाद पहली बार बिहार दौरे पर आए थे. उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि वह देशभर में जातीय जनगणना के लिए लड़ाई लड़ेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि यह जातीय जनगणना ‘सच्ची’ हो और ‘फर्जी’ न हो.
एनडीए का तीखा पलटवार
राहुल गांधी के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जेडीयू के वरिष्ठ नेता और राज्य के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा, ‘हम राहुल गांधी से इससे बेहतर की उम्मीद नहीं कर सकते, वो भारत सरकार और भारतीय राज्य के बीच का अंतर भी नहीं समझते.” उन्होंने राहुल के बयान को ‘हास्यास्पद’ बताते हुए कहा कि कांग्रेस पहले से ही इस जनगणना का समर्थन करती रही है.
वहीं बीजेपी के वरिष्ठ नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने इसको लेकर कहा, ‘राहुल गांधी पहले बिहार की जातीय जनगणना का श्रेय लेते थे, लेकिन अब इसे फर्जी कहना उनकी दुविधा और दोहरे चरित्र को दर्शाता है.’ बिहार भाजपा अध्यक्ष और मंत्री दिलीप जायसवाल ने व्यंग्य करते हुए कहा, ‘जातीय जनगणना पर बोलने से पहले राहुल गांधी को खुद बताना चाहिए कि वह किस जाति से आते हैं.’
कांग्रेस ने दी सफाई
वहीं इस पर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने राहुल गांधी का बचाव करते हुए कहा कि उनका बयान बिहार सरकार की मंशा पर सवाल उठाने के लिए था. उन्होंने कहा, “जातीय जनगणना के निष्कर्षों को सार्वजनिक करने के बाद नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ गठबंधन कर लिया. इसके बाद से इस मुद्दे को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया.’
अखिलेश प्रसाद सिंह ने नीतीश कुमार पर आरोप लगाया कि वह सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले का बहाना बनाकर इस मुद्दे पर पीछे हट रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘अगर मुख्यमंत्री वंचित वर्गों को लाभ दिलाने के लिए गंभीर हैं, तो उन्हें कोर्ट से याचिका वापस लेकर नई विधेयक लानी चाहिए.’
जातीय जनगणना को लेकर विवाद
राज्य में 2023 में प्रकाशित जातीय जनगणना के निष्कर्षों में दलित और पिछड़े वर्गों की आबादी में वृद्धि देखी गई थी. इसके बाद राज्य सरकार ने इन वर्गों के लिए आरक्षण बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन पटना हाईकोर्ट ने इस कानून को रद्द कर दिया.
 
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