भारत ने अपनी सैन्य शक्ति को बढ़ाते हुए 'अग्नि-4' मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। रक्षा मंत्रालय ने इस उपलब्धि की पुष्टि की है। …और पढ़ें
भारत ने बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि-4’ का सफल परीक्षण किया।
भारत ने ‘अग्नि-4’ MRBM का सफल परीक्षण किया।
रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि की।
यह परीक्षण देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगा।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत ने अपनी सैन्य ताकत में एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ते हुए मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल ‘अग्नि-4’ का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से ‘स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड’ की देखरेख में किया गया। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, मिसाइल ने अपने सभी तकनीकी और ऑपरेशनल पैमानों पर शत-प्रतिशत खरा उतरकर सफलता का परचम लहराया है।
बता दें कि अग्नि-4 को बेहद आधुनिक तकनीक से लैस किया गया है। इसमें पांचवीं पीढ़ी का ऑनबोर्ड कंप्यूटर और उन्नत एवियोनिक्स दिए गए हैं। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि उड़ान के दौरान यदि रास्ते में कोई बाधा आती है, तो यह मिसाइल खुद-ब-खुद उसे पहचानकर अपना रास्ता ठीक करने में सक्षम है। यही वजह है कि इसे भारत की सबसे भरोसेमंद रणनीतिक मिसाइलों में गिना जाता है।
इसके अलावा इस मिसाइल में खास नेविगेशन सिस्टम (RINS और MINGS) का इस्तेमाल किया गया है। इनकी बदौलत अग्नि-4 बिना किसी चूक के सीधे अपने लक्ष्य पर सटीक प्रहार करती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी यह सटीकता भारत की रक्षा और सामरिक ताकत को कई गुना बढ़ा देती है।
इन सभी ताकतों के अलावा, इस मिसाइल में एक और खास बात है, जिसके बदौलत ये मिसाइल आज के दौर में भारत के दुश्मनों की नींद उड़ाने में सक्षम है। इस बात को ऐसे मसझिए कि दुश्मन के इलाके में घुसने पर जब मिसाइल वापस लौटती है, तो भयंकर गर्मी पैदा होती है। अग्नि-4 में लगी ‘री-एंट्री हीट शील्ड’ ने कमाल दिखाते हुए करीब 4000 डिग्री सेल्सियस तक के भारी तापमान को आसानी से झेल लिया।
हैरानी की बात यह रही कि बाहरी सतह पर इतनी भीषण आग होने के बावजूद, मिसाइल के अंदर रखे संवेदनशील उपकरण बिल्कुल सुरक्षित रहे और भीतर का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे बना रहा।
गौरतलब है कि भारत के पास पहले से ही अग्नि-1, अग्नि-2, अग्नि-3 और पृथ्वी जैसी मिसाइलें मौजूद हैं। अब ‘अग्नि-4’ के इस सफल परीक्षण से देश की 3000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार करने की क्षमता और मजबूत हो गई है, जिससे भारत की रक्षा प्रणाली और अधिक अजय बन गई है।