भारत की सीमा के पास चीन-पाकिस्तान का सैन्य अभ्यास, ड्रैगन ने दिखाई अपने हथियारों की ताकत, बढ़ा तनाव! – Bharat24live

Shreeom Singh
Date: 15-10-26 11:03
चीन और पाकिस्तान की सेनाओं ने संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू किया है. ‘काराकोरम 2026’ नाम का यह अभ्यास 14 अक्टूबर को चीन के शिनजियांग प्रांत के कोरला स्थित सैन्य प्रशिक्षण केंद्र में शुरू हुआ. इस दौरान दोनों देशों के सैनिक ड्रोन चलाने, लंबी दूरी तक निशाना लगाने और ऊंचाई वाले इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियान चलाने की ट्रेनिंग लेंगे.
खास बात यह है कि यह दोनों देशों की नियमित थल सेनाओं के बीच पहला संयुक्त प्रशिक्षण अभ्यास है. इससे पहले चीन और पाकिस्तान की विशेष सैन्य टुकड़ियां साझा अभ्यास करती रही हैं. शिनजियांग भारत की सीमा के पास स्थित है, इसलिए इस सैन्य गतिविधि पर खास नजर रखी जा रही है.
ड्रोन से स्नाइपिंग तक की ट्रेनिंग, चीन ने दिए हथियार
चीनी मीडिया के मुताबिक, नौ दिन तक चलने वाले इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य ऊंचे पहाड़ी इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियान चलाने की तैयारी करना है. इसमें ड्रोन संचालन, लंबी दूरी से निशाना लगाने, संयुक्त कमान और सैनिकों के साथ वास्तविक परिस्थितियों में अभ्यास जैसी गतिविधियां शामिल हैं.
इस दौरान पाकिस्तानी सैनिक चीन के बनाए हथियारों और सैन्य वाहनों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं. इनमें टाइप 11 बख्तरबंद वाहन और टाइप 08 इन्फैंट्री फाइटिंग व्हीकल शामिल हैं.
🇨🇳🤝🇵🇰The first-ever China-#Pakistan joint army training exercise “Karakoram 2026” on Oct. 14 officially kicked off at a training base in Korla, Northwest China’s Xinjiang Uygur Autonomous Region. The drills focus on joint counter-terrorism operations in high-altitude areas. https://t.co/RoS8KAlJiY
चीन के सरकारी मीडिया के अनुसार, इस संयुक्त अभ्यास में इस्तेमाल होने वाले हथियार और उपकरण चीन ने ही उपलब्ध कराए हैं. इससे पाकिस्तानी सैनिकों को चीनी सैन्य तकनीक और उपकरणों को समझने का मौका मिल रहा है.
पहाड़ी इलाकों में चीनी बख्तरबंद वाहनों का इस्तेमाल
सैन्य मामलों के विशेषज्ञ वांग युनफेई ने ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में बताया कि ऊंचाई वाले इलाकों में पहिएदार बख्तरबंद वाहनों के अपने फायदे हैं. ट्रैक वाले वाहनों के मुकाबले ये सड़क पर तेजी से चल सकते हैं और इनका रखरखाव भी आसान होता है.
उन्होंने कहा कि इन खूबियों के कारण ऐसे वाहन पहाड़ी और पठारी इलाकों में सैनिकों की आवाजाही और सैन्य अभियानों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं.
इस अभ्यास में इन वाहनों का इस्तेमाल पाकिस्तान को चीनी सैन्य उपकरणों की क्षमता और उपयोग को करीब से समझने का मौका देता है.
क्या चीन से और हथियार खरीद सकता है पाकिस्तान?
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस अभ्यास के जरिए पाकिस्तान भविष्य में चीनी हथियार खरीदने की संभावनाओं पर भी विचार कर सकता है. संयुक्त प्रशिक्षण के दौरान किसी उपकरण का इस्तेमाल करने से उसकी खूबियों और कमियों को समझना आसान होता है.
ड्रोन और आधुनिक लड़ाकू उपकरणों के क्षेत्र में चीन पाकिस्तान की मदद कर सकता है. इससे पाकिस्तान की निगरानी और संभावित खतरों की पहले से जानकारी जुटाने की क्षमता मजबूत हो सकती है.
हालांकि, इस सैन्य अभ्यास के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि पाकिस्तान इन सभी उपकरणों को खरीदने का फैसला कर चुका है. फिलहाल, यह अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने और ऊंचाई वाले इलाकों में संयुक्त अभियान चलाने की तैयारी पर केंद्रित है.
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