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अमेरिका के वेनेजुएला पर हमले ने दुनिया को चौंका दिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर हुए इस ऑपरेशन में अमेरिकी सेना ने आधुनिक फाइटर जेट, हेलिकॉप्टर और मिसाइलों का इस्तेमाल किया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के पास भी ऐसे हथियार हैं?
भारतीय सेना और वायुसेना ने अमेरिका से बोइंग एएच-64ई अपाचे अटैक हेलिकॉप्टर, सीएच-47एफ चिनूक ट्रांसपोर्ट हेलिकॉप्टर और एजीएम-114 हेलफायर मिसाइलें खरीदी हैं. ये हथियार अमेरिका के वेनेजुएला हमले में मुख्य भूमिका निभा रहे थे.
वेनेजुएला की राजधानी काराकस में अमेरिकी हमलों में अपाचे हेलिकॉप्टर ने ग्राउंड टारगेट्स पर मिसाइल दागीं, चिनूक ने सैनिकों को उतारा और हेलफायर मिसाइलों ने सटीक हमले किए. भारत ने 2015-2020 में अमेरिका से ये हथियार खरीदे, ताकि चीन और पाकिस्तान सीमा पर मजबूती आए. भारत के पास कुल 22 अपाचे (आर्मी के लिए) और 15 चिनूक (वायुसेना के लिए) हैं.
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बोइंग एएच-64ई अपाचे दुनिया का सबसे एडवांस्ड अटैक हेलिकॉप्टर है. यह दुश्मन के टैंकों, बंकरों और सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले करता है. वेनेजुएला हमले में अमेरिका ने इसे कम ऊंचाई पर उड़ाकर मिसाइल दागने के लिए इस्तेमाल किया. भारत में यह सीमा पर गश्त और हाई-इंटेंसिटी ऑपरेशनों के लिए है.
ये हेलीकॉप्टर सैन्य अड्डों पर करीब से हमला करने के लिए परफेक्ट हैं और रात में भी काम कर सकते हैं.
भारतीय ऑपरेशनों में उपयोग: भारत ने 2019 में अपाचे को इंडक्ट किया. 2020 से ये पठानकोट और जोरहाट बेस पर तैनात हैं. लद्दाख में LAC पर चीन के खिलाफ गश्त करते हैं. 2025 में एक ऑपरेशन में हाई-एल्टीट्यूड इलाकों में सप्लाई और रेकी के लिए इस्तेमाल हुए थे. आपदा राहत में भी मदद की, जैसे उत्तराखंड बाढ़ में.
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बोइंग सीएच-47एफ चिनूक एक हेवी-लिफ्ट हेलिकॉप्टर है, जो सैनिकों, तोपों और भारी सामान को ले जाता है. वेनेजुएला हमले में अमेरिका ने इसे स्पेशल फोर्सेस उतारने और सपोर्ट देने के लिए इस्तेमाल किया. भारत में यह हाई-एल्टीट्यूड इलाकों में ट्रूप ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स के लिए है.
ये हेलिकॉप्टर रात में कम ऊंचाई पर उड़ने और स्पेशल ऑपरेशंस के लिए परफेक्ट है. वेनेजुएला हमले में इन्हें ट्रूप्स उतारने और सपोर्ट देने के लिए इस्तेमाल किया गया लगता है.
भारतीय ऑपरेशनों में उपयोग: भारत ने 2019 में चिनूक को इंडक्ट किया था. चंडीगढ़ बेस पर तैनात है. सियाचिन ग्लेशियर पर दुनिया की सबसे ऊंची पोस्ट पर सप्लाई पहुंचाते हैं. 2020 की गलवान घाटी टकराव में ट्रूप्स और सामान ले गए. आपदा राहत में बड़े काम किए, जैसे 2023 की हिमाचल बाढ़ और 2024 की असम बाढ़ में राहत सामग्री पहुंचाई.
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एजीएम-114 हेलफायर एक एयर-टू-ग्राउंड प्रिसीजन मिसाइल है, जो टैंकों, बिल्डिंग्स और दुश्मन ठिकानों को नष्ट करती है. वेनेजुएला हमले में अपाचे से दागी गई. भारत में अपाचे के साथ इस्तेमाल होती है, एंटी-टैंक और बंकर-बस्टिंग के लिए.
भारतीय ऑपरेशनों में उपयोग: भारत ने 2019 में अपाचे के साथ हेलफायर खरीदीं. LAC पर चीन के खिलाफ टेस्ट फायरिंग हुई. 2025 में एक सैन्य अभ्यास में टैंकों पर सटीक हमले किए. अभी मुख्य रूप से ट्रेनिंग और बॉर्डर सिक्योरिटी में इस्तेमाल, लेकिन भविष्य में बड़े ऑपरेशनों में भूमिका होगी.
ये हथियार भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत बनाते हैं. अमेरिका के वेनेजुएला हमले से साफ है कि ऐसे हथियार कितने प्रभावी हैं. भारत ने इन्हें अमेरिका से 10 बिलियन डॉलर से ज्यादा के सौदे में खरीदा है. विशेषज्ञों का कहना है कि ये LAC और LOC पर भारत को मजबूती देंगे. हालांकि, भारत शांतिपूर्ण नीति अपनाता है और इनका इस्तेमाल सिर्फ रक्षा के लिए करता है.
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