भारत के लिए 7 फीसदी विकास दर मुश्किल नहीं, लेकिन पूरा करना होगा एक काम, ग्‍लोबल रेटिंग एजेंसी ने बताया जुगा… – News18 हिंदी

नई दिल्‍ली. भारत की विकास दर एक बार फिर 7 फीसदी से नीचे उतर आई है और अगर उसे वापस यह रफ्तार पकड़नी है तो एक क्षेत्र में खास काम करना होगा. लेखा और परामर्श कंपनी ईवाई ने बुधवार को कहा कि भारत को 6.5 से 7.0 फीसदी की आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने के लिए जीडीपी (सकल घरेलू उत्पादन) में बदलाव के अनुपात में कर राजस्व में वृद्धि यानी टैक्‍स में 1.2 से 1.5 उछाल लाने की जरूरत होगी.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार को राजस्व संग्रह को मजबूत करने की जरूरत है, विशेष रूप से कर-से-जीडीपी अनुपात को वित्तवर्ष 2025-26 के (बजट अनुमान) में अनुमानित 12 फीसदी से बढ़ाकर वित्तवर्ष 2030-31 तक 14 फीसदी करना होगा. ईवाई ने कहा कि भारत की राजकोषीय रणनीति को जीडीपी में बदलाव के अनुपात में कर राजस्व बढ़ाने, विवेकपूर्ण व्यय प्रबंधन और सतत वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए निरंतर संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.
इस बार का बजट काफी कारगर
ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव ने कहा कि वित्तवर्ष 2025-26 का बजट रणनीतिक रूप से विकास की अनिवार्यताओं के साथ राजकोषीय मजबूती को संतुलित करता है. हालांकि, भारत को 6.5 से 7 फीसदी की मध्यम अवधि की वृद्धि दर हासिल करने और अपने विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए, यह सुनिश्चित करना होगा कि टैक्‍स उछाल 1.2 से 1.5 फीसदी के दायरे में बना रहे. इससे बुनियादी ढांचे के विस्तार में तेजी लाने, सामाजिक क्षेत्र के खर्च को बढ़ाने और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने के लिए आवश्यक राजकोषीय गुंजाइश बनाने में मदद मिलेगी.
3 साल से कम हो रहा राजस्‍व
ईवाई इंडिया इकनॉमी वॉच की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले तीन साल में सकल कर राजस्व में उछाल धीरे-धीरे कम हुआ है. वित्तवर्ष 2023-24 में यह 1.4 फीसदी से वित्तवर्ष 2024-25 के संशोधित अनुमान के अनुसार 1.15 फीसदी पर आ गया. वित्तवर्ष 2025-26 के बजट में इसके 1.07 फीसदी रहने का अनुमान है. कर उछाल 1.2 से 1.5 फीसदी के दायरे में बनाए रखने से भारत सरकार को 6.5 से 7.0 फीसदी जीडीपी वृद्धि दर हासिल करने में मदद मिल सकती है.
अगले साल कितनी रहेगी विकास दर
अगले वित्तवर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि दर 6.3 से 6.8 फीसदी रहने का अनुमान है. चालू वित्तवर्ष में जीडीपी वृद्धि दर 6.4 फीसदी रहने की संभावना है. चालू वित्‍तवर्ष की दूसरी तिमाही में तो विकास दर गिरकर 4 साल के निचले स्‍तर पर आ गई थी. हालांकि, अनुमान है कि यह तीसरी तिमाही में बढ़कर एक बार फिर 6 फीसदी से ऊपर जा सकती है.

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