भारत जैसे बड़े देश को छोड़कर PAK का साथ क्यों दे रहा है तुर्किए? जानें क्या चाहते – ABP News

Turkey Pakistan Relations: भारत से तनाव के दौरान तुर्किए ने खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया और पाकिस्तान ने उनके दिए ड्रोन्स को भारत पर हमले के लिए इस्तेमाल किया. ऐसे में ये सवाल भी लगातार उठ रहा है कि आखिर तुर्किए भारत के दुश्मन का इतना खुलकर सपोर्ट क्यों कर रहा है? 
तुर्किए सरकार के करीबी सूत्रों ने दावा किया कि उनके मालवाहक विमानों ने पाकिस्तान को सैन्य आपूर्ति की. हालांकि, तुर्किए के अधिकारियों ने इससे इनकार किया है. ये तुर्किए की पहले से घोषित एशिया एन्यू इनिशिएटिव प्लान का हिस्सा है. 

रूस-तुर्किए संबंधों की आलोचना कर रहे नाटो सहयोगी
360info की रिपोर्ट के मुताबिक तुर्किए और पाकिस्तान की मुश्किलें लगभग एक सी हैं. इस बात पर आम सहमति है कि कोल्ड वॉर के बाद इन दोनों ही देशों ने पश्चिमी देशों की नजर में अपनी प्रासंगिकता खो दी है. दोनों ही बदलते वैश्विक घटनाक्रम में प्रासंगिक बने रहने के तरीके खोज रहे हैं. नाटो के सहयोगी तुर्किए के रूस के साथ बढ़ते संबंधों को लेकर कड़ी आलोचना कर रहे हैं, खास तौर पर जब उसने एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली खरीदी है.
नाटो सहयोगियों ने तुर्किए को महत्वपूर्ण रक्षा तकनीक से दूर रखा है, जबकि गैर नाटो मेंबर इजरायल और यूएई को भी नाटो की सबसे अच्छी रक्षा तकनीक मिली है, जबकि इसे तुर्किए को नहीं दिया गया है, इनमें एफ-35 फायटर जेट भी शामिल है. 
तुर्किए और पाकिस्तान, दोनों को एक दूसरे की जरूरत
वहीं, कमजोर पाकिस्तान सिर्फ चीनी रक्षा उद्योग पर ही निर्भर है. पश्चिम देशों से मदद न मिलने के कारण चीन ही एकमात्र विकल्प है. तुर्किए की पाकिस्तान नीति इसलिए भारत-केंद्रित नहीं हो सकती है, क्योंकि उन्हें एक-दूसरे की जरूरत है. दोनों के ही पास बहुत कम सहयोगी देश हैं.
अंकारा और रियाद में मौन सहमति है कि पाकिस्तान इतना महत्वपूर्ण है कि उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इस्लामाबाद पहले ही नाटो के बाहर तुर्किए का सबसे महत्वपूर्ण रक्षा सहयोगी बन चुका है. तुर्किए ने लंबे समय तक पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों के बारे में कुछ हद तक अस्पष्टता बनाए रखने की कोशिश की और भारत के साथ घनिष्ठ और भरोसेमंद संबंध बनाने की कोशिश की.
2019-2022 के दौरान तुर्किए और भारत के रिश्ते सबसे निचले स्तर पर आ गए. जब दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ बड़े पैमाने पर मीडिया अभियान चलाया. ये जम्मू-कश्मीर को दिए गए विशेष दर्जे को रद्द करने के मद्देनजर था.
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