भारतीय सेना की सुदर्शन चक्र कॉर्प्स के तहत काम करने वाली एक ब्रिगेड ने एक सप्ताह तक चली फील्ड ट्रेनिंग एक्सरसाइज पूरी की। यह अभ्यास 19 अक्टूबर की शाम को संपन्न हुआ। इसका मकसद कठिन परिस्थितियों में जवानों की युद्धक तैयारी, तकनीकी कौशल और कॉम्बैट इंजीन
अभ्यास के दौरान जवानों ने माइनफील्ड बिछाने और साफ करने, बाधाओं को पार करने के लिए अस्थायी पुल बनाने और टैंकों व बख्तरबंद गाड़ियों के साथ तालमेल से काम करने का अभ्यास किया। इस दौरान युद्ध जैसी परिस्थितियों में ऑपरेशन करने और अलग-अलग चुनौतियों से निपटने की तैयारी पर जोर दिया गया।
माइनफील्ड साफ करने और रास्ते बनाने का अभ्यास
इस ट्रेनिंग का सबसे बड़ा फोकस कॉम्बैट इंजीनियरिंग और फील्ड क्राफ्ट पर रहा। फील्ड ट्रेनिंग में कॉम्बैट इंजीनियरिंग और फील्ड क्राफ्ट पर खास ध्यान दिया गया। जवानों ने युद्ध जैसे माहौल में बारूदी सुरंगें बिछाने और उन्हें सुरक्षित तरीके से हटाने यानी माइन क्लीयरेंस ऑपरेशन का अभ्यास किया।
इसके साथ ही रास्ते में आने वाली बाधाओं को पार करने के लिए तेजी से अस्थायी पुल और रास्ते तैयार करने की ट्रेनिंग भी की गई। इन अभ्यासों का उद्देश्य कठिन इलाकों में सेना की आवाजाही बनाए रखने और ऑपरेशन के दौरान आने वाली चुनौतियों से निपटने की क्षमता को मजबूत करना था।
हर मोर्चे पर अलर्ट और बैटल-रेडी रहने का संदेश
अभ्यास के अंत में सेना के अधिकारियों ने जवानों के जज्बे और उनके प्रोफेशनल अप्रोच की जमकर तारीफ की। ब्रिगेड ने “ट्रेन हार्ड, एम ट्रू, स्टे बैटल रेडी” के मूल मंत्र को दोहराते हुए यह साफ कर दिया कि भारतीय सेना सीमा सुरक्षा और किसी भी रणनीतिक ऑपरेशन के लिए हर समय पूरी तरह तैयार है। कठोर परिस्थितियों में हुआ यह अभ्यास सेना के हर जवान के आत्मविश्वास को बढ़ाता है और युद्ध क्षेत्र में निर्णायक बढ़त दिलाने में बेहद मददगार साबित होता है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने जवानों के इस शानदार प्रदर्शन और उनके जज्बे की जमकर तारीफ की है। “ट्रेन हार्ड, एम ट्रू, स्टे बैटल रेडी” के मंत्र के साथ इस अभ्यास ने यह साबित कर दिया है कि हमारी सेना देश की रक्षा के लिए हर पल पूरी तरह तैयार है।
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