मदरसे में टॉयलेट के टूटे दरवाजे और गंदगी देख भड़का बाल आयोग, 26 बच्चे रेस्क्यू, ग्वालियर में बाल आयोग का एक्शन – AajTak

Feedback
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक मदरसे की जांच के बाद विवाद खड़ा हो गया है. मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने टीम के साथ झांसी रोड क्षेत्र में एजी ऑफिस के पास स्थित मदरसे का औचक जायजा लिया. आयोग के मुताबिक, वहां 8 बच्चियां और 18 बच्चे मिले, जिन्हें बाल कल्याण समिति (CWC) की निगरानी में सौंपा गया.
आयोग ने बच्चों की शिक्षा, रहने की व्यवस्था, साफ-सफाई और सुरक्षा से जुड़ी कमियां मिलने का दावा किया है. दूसरी ओर, मदरसा प्रबंधन ने कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बच्चों को उसकी अनुमति के बिना ले जाया गया. इस बीच राष्ट्रीय सनातन सेना ने मदरसे पर तालाबंदी की मांग करते हुए चार दिन का अल्टीमेटम दिया है.
आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने टीम के साथ झांसी रोड इलाके में अंजुमन इस्लाहे मुआशरा समिति की ओर से संचालित दारुल कुरआन मदरसे का निरीक्षण किया. आयोग के अनुसार, मौके पर 4 से 14 वर्ष तक की उम्र के 26 बच्चे मिले, जिनमें 8 बच्चियां और 18 बच्चे शामिल हैं.
बताया गया कि मदरसे के रजिस्टर में 15 बच्चियों और 42 बच्चों के नाम दर्ज हैं. निरीक्षण के दौरान आयोग की टीम ने मदरसे की मान्यता, पंजीयन, बच्चों की देखरेख करने वाले लोगों और प्रबंधन से जुड़े दस्तावेज मांगे. अब मदरसे के संचालन और बच्चों की व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की जांच की जा रही है.
शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर उठे सवाल
आयोग का दावा है कि निरीक्षण के दौरान मौके पर मौजूद कोई भी बच्चा स्कूली शिक्षा ग्रहण नहीं कर रहा था. कुछ बच्चों ने कथित तौर पर बताया कि उनके नाम स्कूल में दर्ज हैं, लेकिन वे नियमित रूप से स्कूल नहीं जाते. ऐसे में बच्चों के स्कूल में पंजीयन और उनकी वास्तविक उपस्थिति की जांच की जरूरत जताई गई है.
आयोग के मुताबिक, बच्चियों के रहने की व्यवस्था, शौचालयों के टूटे दरवाजे, साफ-सफाई और रसोई की स्थिति को लेकर भी कमियां सामने आईं. इन परिस्थितियों को देखते हुए मौके पर मिले 26 बच्चों को बाल कल्याण समिति (CWC) की निगरानी में सौंपा गया.
कलेक्टर के सामने लिए गए बच्चों के बयान
आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा के अनुसार, बच्चों के बयान कलेक्टर के सामने संबंधित टीम की मौजूदगी में लिए गए. कार्रवाई के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद थे, जबकि पुलिस सुरक्षा के लिए तैनात थी.
आयोग ने बाल कल्याण समिति को निर्देश दिए हैं कि बच्चों के माता-पिता के आने पर उनके दस्तावेजों का मिलान और नियमानुसार सत्यापन किया जाए. इसके बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर बच्चों को उनके परिजनों को सौंपा जाए. देखें VIDEO:- 
एफआईआर के सवाल पर आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि उनके संज्ञान में फिलहाल इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं है. विदेशी फंडिंग की जांच से जुड़ी खबरों के बारे में भी उन्होंने अनभिज्ञता जताई. इन पहलुओं पर स्थिति संबंधित विभागों की जांच और आधिकारिक जानकारी के बाद ही स्पष्ट होगी.
बाल श्रम के आरोप की भी जांच जरूरी
मामले में बच्चों से  काम कराए जाने का मुद्दा भी उठाया गया है. आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि यदि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से मजदूरी कराई जा रही है, तो यह बाल अधिकारों के उल्लंघन और बाल श्रम से जुड़े कानूनों के तहत जांच का विषय होगा. हालांकि, बच्चों से काम कराए जाने के आरोप की पुष्टि अभी जांच के निष्कर्षों से होनी बाकी है. फिलहाल बच्चों के बयान, उनकी शिक्षा से जुड़े दस्तावेज और मदरसे में उपलब्ध सुविधाओं की पड़ताल की जा रही है.
मदरसा प्रबंधन ने कार्रवाई पर जताई आपत्ति
आयोग की कार्रवाई के बाद मदरसा प्रबंधन ने नाराजगी जताई है. प्रबंधन के प्रतिनिधि मोहम्मद साबिर के अनुसार, बच्चों को उसकी अनुमति के बिना मदरसे से ले जाया गया. प्रबंधन का कहना है कि यदि दस्तावेजों में कोई कमी थी, तो उसे पूरा करने का अवसर दिया जाना चाहिए था. प्रबंधन ने बच्चों को ले जाने से उनके परिजनों को होने वाली परेशानी का हवाला देते हुए कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. देखें VIDEO:- 
दूसरी ओर, आयोग की ओर से बच्चों को परिजनों को सौंपने के लिए दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है. इस मामले में प्रबंधन की आपत्तियों और आयोग की कार्रवाई से जुड़े तथ्यों की जांच अहम होगी. 
हिंदू संगठन ने तालाबंदी की मांग की, चार दिन का अल्टीमेटम
मदरसे में कार्रवाई के बाद राष्ट्रीय सनातन सेना ने भी विरोध प्रदर्शन किया. संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवती शुक्ला अपने पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ मदरसे पहुंचे और नारेबाजी की. संगठन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मदरसे पर तालाबंदी की मांग की है. संगठन का दावा है कि मदरसे में अन्य धर्मों के खिलाफ सामग्री वाली किताबें मिली हैं. हालांकि, किताबों की विषयवस्तु और संगठन के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है.
भगवती शुक्ला ने चेतावनी दी है कि यदि चार दिन के भीतर मदरसे पर तालाबंदी नहीं हुई, तो संगठन के कार्यकर्ता खुद तालाबंदी करने पहुंचेंगे. इस मांग और चेतावनी के बीच मदरसे की मान्यता, दस्तावेजों तथा बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण होगी. देखें VIDEO:- 
जांच के निष्कर्षों पर टिकी आगे की कार्रवाई
फिलहाल ग्वालियर के दारुल कुरआन मदरसे में बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर उठे सवालों की जांच की जा रही है. बच्चों के परिजनों के दस्तावेजों का सत्यापन कर उन्हें सौंपने की प्रक्रिया जारी है. मदरसा प्रबंधन ने आयोग की कार्रवाई पर आपत्ति जताई है, जबकि राष्ट्रीय सनातन सेना तालाबंदी की मांग कर रही है.
एफआईआर, विदेशी फंडिंग और बाल श्रम से जुड़े पहलुओं पर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है. अब संबंधित विभागों की जांच और आधिकारिक जानकारी से स्पष्ट होगा कि मदरसे में किन नियमों का पालन हुआ और किन मामलों में आगे कार्रवाई की जरूरत है.
Copyright © 2026 Living Media India Limited. For reprint rights: Syndications Today
होम
वीडियो
लाइव टीवी
न्यूज़ रील
मेन्यू
मेन्यू

source.freeslots dinogame telegram营销

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Toofani-News