भारतीय वायु सेना 8 अक्टूबर स्थापना की 94वीं वर्षगांठ मनाएगा। ऐसे में मध्य वायु कमान मुख्यालय, वायु सेना स्टेशन बमरौली और बेसिक फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल (बीएफटीएस) में भी खास तैयारी है। प्रयागराज भी इसे अपने गौरव से जोड़ता है।
प्रयागराज को सैन्य तत्परता, सैन्य उड़ान प्रशिक्षण और नागरिक सेवा के गौरव से जोड़ा जाता है। प्रयागराज में मध्य वायु कमान के 60 वर्ष, बमरौली की उड़ान प्रशिक्षण परंपरा और महाकुंभ में योगदान को शहर के वायु सेना से अटूट संबंध के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है।
1966 में प्रयागराज में मुख्यालय बना
फरवरी 1966 में अपना मुख्यालय प्रयागराज स्थानांतरित करने वाली मध्य वायु कमान वर्ष 2026 में यहां अपनी उपस्थिति के 60 वर्ष पूरे कर रही है। महाकुंभ 2025 के दौरान यह जुड़ाव नागरिक सेवा के रूप में भी सामने आया। वायु सेना स्टेशन बमरौली ने हवाई मार्ग से आने वाले श्रद्धालुओं के सुरक्षित और सुव्यवस्थित आवागमन में सहयोग दिया। आयोजन के दौरान स्टेशन के वायु यातायात नियंत्रण ने 3,648 निर्धारित और 1,904 गैर-निर्धारित उड़ानों का संचालन संभाला।
फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल भी खास
सैन्य विमानन में बमरौली की भूमिका बेसिक फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल के माध्यम से भी महत्वपूर्ण रही है। 9 अक्टूबर 1987 को स्थापित इस स्कूल ने स्वदेशी एचपीटी-32 विमान पर प्रारंभिक उड़ान प्रशिक्षण देना शुरू किया। बाद में स्कूल ने हेलीकॉप्टर प्रशिक्षण की भूमिका अपनाई और चेतक हेलीकॉप्टर पर पहला प्रशिक्षण पाठ्यक्रम 1 फरवरी 2006 को प्रारंभ हुआ। वर्ष 2006 से अब तक बीएफटीएस ने 40 आर्मी पायलट पाठ्यक्रमों के अंतर्गत भारतीय सेना और भारतीय तटरक्षक बल के 1,150 से अधिक पायलटों को प्रथम चरण का हेलीकॉप्टर उड़ान प्रशिक्षण प्रदान किया है।
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