होर्मज स्ट्रेट से लेकर ब्लैक सी तक हमले जारी है। पिछले 48 घंटों में ब्लैक सी और होर्मुज में कमर्शियल जहाजों पर एक के बाद एक तीन हमले हुए हैं। इन हमलों ने साफ दिखा दिया है कि युद्ध वाले इलाकों से गुजरने वाले मुख्य समुद्री रास्तों पर भारतीय नाविक सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। लाइबेरिया के झंडे वाले तेल टैंकर अफ्रामैक्स रियो पर ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई और सवार सभी 23 भारतीय नाविकों को बचाव दल को सुरक्षित निकालना पड़ा। उसी दिन ब्लैक सी में कार्गो जहाज एमवी रोयाद मम्मादोव पर हमला हुआ, जिसमें दो विदेशी नाविक मारे गए और भारतीय नागरिकों समेत कई क्रू सदस्य घायल हो गए। कुछ घंटों बाद होर्मुज में पनामा के झंडे वाले एमटी ऑन पीस पर प्रक्षेप्य ( Projectile) गिरा। इस जहाज पर 17 भारतीय थे, जिनमें से 11 घायल हुए।
ये घटनाएं ऐसे समय हुई हैं, जब पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण होर्मुज, फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और ब्लैक सी जैसे अहम रास्तों पर जहाज लगभग रोज निशाना बन रहे हैं। कहीं ड्रोन और मिसाइल से हमला हो रहा है, कहीं जहाजों को धमकी देकर लौटने पर मजबूर किया जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने दोनों इलाकों के हमलों की कड़ी निंदा की है। मंत्रालय का कहना है कि मर्चेंट जहाजों, नाविकों और नागरिक ढांचे पर हमले तुरंत बंद होने चाहिए, क्योंकि इससे वैश्विक व्यापार और आम लोगों की सुरक्षा दोनों को नुकसान हो रहा है।
मंगलवार को ब्लैक सी में अफ्रामैक्स रियो पर हमला हुआ। रूसी परिवहन मंत्रालय के अनुसार, सोची शहर के पास यह हमला नौसैनिक ड्रोन से किया गया। हमले के बाद टैंकर में आग लग गई। जहाज पर सवार पूरा क्रू भारतीय था। बचाव दल ने सभी 23 नाविकों को निकाल लिया। किसी के घायल होने की खबर नहीं है। शुरुआत में आग इतनी तेज थी कि दमकलकर्मी उसे तुरंत काबू नहीं कर पाए।
बाद में अधिकारियों ने कहा कि आग बुझाने के पर्याप्त साधन मौजूद थे। घटना के बाद सोची तट के कुछ हिस्सों में पाबंदी लगा दी गई। सीरियस संघीय क्षेत्र के बीच अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए। अधिकारी हवा और पानी की गुणवत्ता पर नजर रख रहे हैं, ताकि आग या तेल रिसाव से आसपास के इलाके को नुकसान न हो।
इसी दिन ब्लैक सी में हमलों की एक और कड़ी देखने को मिली। एमवी रोयाद मम्मादोव पर हमला हुआ। बुल्गारिया के पास दो और जहाजों, अल्फा वतन और एबल पर भी ड्रोन हमले की खबरें आईं। इससे पता चलता है कि ब्लैक सी में कमर्शियल जहाज अब अकेले मामले नहीं, बल्कि लगातार निशाने पर हैं।
इस कार्गो जहाज पर हमले में दो विदेशी नाविक मारे गए। कई अन्य क्रू सदस्य घायल हुए, जिनमें भारतीय भी शामिल हैं। जहाज पर सवार तीन भारतीय नाविक सुरक्षित बताए गए हैं। रोमानियाई अधिकारियों ने घायलों को बचाया और इलाज के लिए अस्पताल ले गए। जहाज सेंट किट्स और नेविस के झंडे वाला था। वह यूक्रेन के डेन्यूब बंदरगाह इज़मेल से मक्का लादकर इटली के रवेना जा रहा था। रास्ते में हमला हुआ, टक्कर या विस्फोट के बाद आग लगी और जहाज डूब गया। डूबने की जगह रोमानिया के विशेष आर्थिक क्षेत्र के अंदर, स्फांटू घोरघे से करीब 30 समुद्री मील दक्षिण बताई गई।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत कमर्शियल शिपिंग और नाविकों पर हो रहे इन हमलों को गंभीर चिंता से देख रहा है। मंत्रालय के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर यातायात को निशाना बनाना वैश्विक कारोबार और दुनिया भर के लोगों की भलाई को कमजोर कर रहा है। भारत ने चल रहे विवादों को बातचीत और कूटनीति से सुलझाने की अपील दोहराई। घायलों को बचाने के लिए रोमानियाई अधिकारियों का भी धन्यवाद किया गया।
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ब्लैक सी की घटनाओं के कुछ घंटों बाद होर्मुज स्ट्रेट में एक और बड़ा हमला हुआ। पनामा के झंडे वाला एमटी ऑन पीस ओमान के तट के पास से गुजर रहा था, जब उस पर प्रक्षेप्य गिरा। जहाज पर कुल 19 नाविक थे। इनमें 17 भारतीय थे। 12 नाविक घायल हुए, जिनमें 11 भारतीय नागरिक हैं। ओमानी अधिकारियों की मदद से घायलों को जहाज से निकाला गया और इलाज के लिए ओमान के खासाब ले जाया गया। विदेश मंत्रालय ने इस हमले की अलग से निंदा की।
मंत्रालय ने कहा कि इस इलाके में जहाजों पर लगातार हो रहे हमले भारत के लिए गहरी चिंता का विषय बने हुए हैं। मांग की गई कि कमर्शियल शिपिंग, नाविकों और नागरिक ढांचे को निशाना बनाना बंद हो और अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से आवाजाही जल्द बहाल की जाए। भारत ने घायल क्रू को निकालने में मदद के लिए ओमान का धन्यवाद किया। इसी दौरान ब्रिटेन के समुद्री व्यापार कार्यालय ने बताया कि होर्मुज से गुजर रहे एक कमर्शियल टैंकर को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की चीख-पुकार और धमकी के बाद वापस लौटना पड़ा। यानी सीधे हमले के साथ-साथ जहाजों को डराकर रास्ता रोकने की कोशिश भी जारी है।
हाल की तीन घटनाओं से इस साल समुद्री हमलों में फंसे भारतीय नाविकों की संख्या और बढ़ गई है। एनडीटीवी के अनुसार, 1 मार्च से 14 जुलाई के बीच होर्मुज संकट के दौरान कमर्शियल जहाजों पर हमलों में कम से कम 16 नाविक मारे गए। इनमें सात भारतीय थे, जो कुल मौतों का करीब 44 प्रतिशत है। 8 से 11 जून के बीच तेल टैंकर एमटी मैरिवेक्स, एमटी सेटेबेलो और एमटी जलवीर पर अमेरिकी सेना के हमलों में तीन भारतीय नाविक मारे गए। चार अन्य नाविक ईरान के हमलों में मारे गए। पहली भारतीय मौत 1 मार्च को हुई, जब मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाले टैंकर एमकेडी व्योम पर सवार एक भारतीय क्रू सदस्य की जान चली गई। जहाज ओमान के पास निशाना बना था। हमलों के बाद सिर्फ मौतें नहीं हुईं। होर्मुज, फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में जहाजों पर हमले के बाद 180 से ज्यादा भारतीय नाविकों को बचाया गया। कई दिनों तक जहाज फंसे रहे, क्रू को निकालना पड़ा।
भारत दुनिया में नाविक उपलब्ध कराने वाले सबसे बड़े देशों में से एक है। BIMCO-ICS सीफेयरर वर्कफोर्स रिपोर्ट 2026 के अनुसार, वैश्विक शिपिंग में भारत के 3,11,936 समुद्री पेशेवर काम कर रहे हैं। यह दुनिया के कुल नाविक कार्यबल का 12.16 प्रतिशत है। समुद्र में इतनी बड़ी मौजूदगी का मतलब है कि विवादित पानी से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविक अक्सर सवार होते हैं। तेल टैंकर, कार्गो जहाज और दूसरे मर्चेंट वेसल, हर तरह के जहाज पर भारतीय क्रू मिलता है। जब होर्मुज या ब्लैक सी जैसे रास्ते असुरक्षित हो जाते हैं, तो चोट और मौत का जोखिम भी सीधे भारतीय परिवारों तक पहुंचता है।
भारत इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। सितंबर 2026 में भारत और लाइबेरिया ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में 25 देशों का ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स’ शुरू किया। इस समूह का मकसद शिपिंग और नाविकों की सुरक्षा पर साथ काम करना है, ताकि निशाना बनाकर किए जा रहे हमलों से मर्चेंट क्रू और कमर्शियल जहाजों को बचाया जा सके। अभी तात्कालिक चिंता यह है कि 48 घंटों में तीन हमले हो चुके हैं, घायल नाविक ओमान और रोमानिया में इलाज करा रहे हैं, और दोनों जलमार्गों पर खतरा कम होने के बजाय बना हुआ है। जब तक इन रास्तों पर हमले नहीं रुकते, भारतीय नाविकों को हर यात्रा में उसी जोखिम का सामना करना पड़ेगा।
देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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