देश में मानसून की धीमी रफ्तार के कारण कई राज्यों में गर्मी और जल संकट बना हुआ है, जबकि कुछ हिस्सों में आंधी-बारिश से राहत मिली है। मौसम विभाग ने अगले …और पढ़ें
मानसून की धीमी चाल।
मानसून की रफ्तार धीमी, मुंबई पहुंचने में देरी।
कई राज्यों में भीषण गर्मी, वाराणसी सबसे गर्म।
18-19 जून को पूर्वी, दक्षिणी राज्यों में बारिश संभव।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से कई राज्यों में जल संकट और गर्मी का माहौल बना हुआ है, जबकि कुछ हिस्सों में आंधी-बारिश से राहत मिली है। मौसम एजेंसी स्काईमेट के मुताबिक, मानसून पिछले कुछ दिनों से पश्चिमी तट पर थमा हुआ है और इसे मुंबई पहुंचने में अभी एक हफ्ते से ज्यादा का समय लग सकता है।
मानसून की इस सुस्ती का मुख्य कारण बंगाल की खाड़ी में किसी मजबूत कम दबाव के क्षेत्र यानी डिप्रेशन का न बनना है। इस धीमी गति की वजह से देश के कुल 723 जिलों में से अब तक केवल 103 जिलों में ही सामान्य बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, केरल में दस्तक देने के बाद मानसून अब तक 19 राज्यों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है।
हालांकि देश के कई राज्यों में मौसम का मिजाज बदला हुआ है। राजस्थान के जयपुर, भरतपुर और कोटा समेत 23 जिलों में आज आंधी और बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है, जबकि पिछले चौबीस घंटों में राज्य के कई हिस्सों में दो इंच तक पानी बरसा है। मध्य प्रदेश के भी रायसेन, छिंदवाड़ा और ग्वालियर समेत 8 जिलों में आज तेज हवाओं के साथ पानी गिरने की संभावना जताई गई है।-1781671329477.jpg)
उधर, बिहार के भागलपुर और पूर्णिया सहित 26 जिलों में बारिश की चेतावनी दी गई है, जबकि बीते दिन राजधानी पटना समेत कई शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार रहा। दिल्ली-एनसीआर में मंगलवार को हुई बारिश और तेज हवाओं के कारण अधिकतम तापमान में भारी गिरावट आई, जिससे यह जून का अब तक का सबसे ठंडा दिन दर्ज किया गया।
दूसरी तरफ, देश के 10 राज्यों में अभी भी भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों के कई शहरों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर बना हुआ है, जिसमें उत्तर प्रदेश का वाराणसी 43 डिग्री सेल्सियस के साथ देश में सबसे गर्म रहा।
मौसम विभाग का अनुमान है कि 18 और 19 जून को बिहार, झारखंड, ओडिशा, असम और पश्चिम बंगाल जैसे पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में भारी बारिश हो सकती है, जहां कुछ जगहों पर 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी आशंका है। इसके साथ ही दक्षिण भारत के तमिलनाडु और कर्नाटक में भी भारी बौछारें पड़ने की उम्मीद है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून के आगे बढ़ने का रास्ता वायुमंडल की ऊपरी परत में चलने वाली तेज हवाओं, जिन्हें जेट स्ट्रीम कहा जाता है, पर निर्भर कर रहा है। जैसे ही यह जेट स्ट्रीम पैटर्न कमजोर पड़ेगा, वैसे ही मानसूनी हवाएं एक बार फिर रफ्तार पकड़ेंगी। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले चार से पांच दिनों में परिस्थितियां अनुकूल होते ही मानसून महाराष्ट्र, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ के बाकी हिस्सों की तरफ तेजी से आगे बढ़ेगा, जिससे लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी।