मुर्गी के अंडे चुराने वाला 'चिकन स्नेक' आखिर कितना खतरनाक है रैट स्नेक? सबकुछ जान लो आज – India.Com

अगर आपने कभी गांव या खेतों के आसपास लंबा काला या भूरा सांप देखा हो, तो हो सकता है वह रैट स्नेक यानी चूहा खाने वाला सांप रहा हो. कई जगह इसे ‘चिकन स्नेक’ भी कहा जाता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि ये कभी-कभी मुर्गी के अंडे खा लेता है. इसी वजह से लोग इसे बेहद खतरनाक समझ लेते हैं. लेकिन सच इससे बिल्कुल अलग है. रैट स्नेक दुनिया के कई देशों में पाया जाने वाला एक गैर-जहरीला सांप है. ये इंसानों पर जहर से हमला नहीं करता. अपने शिकार को पकड़ने के लिए यह डसने के बजाय अपने शरीर से लपेट लेता है और दबाकर मारता है. इसके बाद पूरे शिकार को निगल जाता है. इसका पसंदीदा खाना चूहे, गिलहरी, छिपकली, मेंढक, छोटी मछलियां और पक्षियों के अंडे होते हैं.

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इसे ‘चिकन स्नेक’ नाम मिलने की सबसे बड़ी वजह यही है कि यह कभी-कभी मुर्गी के बाड़े में घुसकर अंडे खा लेता है. हालांकि ऐसा हर बार नहीं होता. इसका मुख्य भोजन चूहे और दूसरे छोटे जीव ही होते हैं. यही कारण है कि किसान इसे खेतों का दोस्त भी मानते हैं, क्योंकि यह फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले चूहों की संख्या कम करने में मदद करता है. रैट स्नेक की एक और खास बात यह है कि यह जमीन पर तेजी से रेंग सकता है, पेड़ों पर आसानी से चढ़ सकता है और जरूरत पड़ने पर पानी में भी तैर लेता है. यानी यह हर तरह के माहौल में खुद को ढाल लेता है. इसी वजह से यह जंगल, खेत, गांव और शहरों के आसपास भी दिखाई दे जाता है.

अगर इसे खतरा महसूस होता है तो यह अक्सर हमला करने के बजाय खुद को बचाने की कोशिश करता है. कई बार यह अपनी पूंछ को तेजी से हिलाकर रैटलस्नेक जैसा दिखने की कोशिश करता है, ताकि सामने वाला डरकर दूर भाग जाए. कुछ प्रजातियां बदबूदार तरल भी छोड़ती हैं, जिससे शिकारी उनसे दूर रहें. यह इसकी सुरक्षा का तरीका है, न कि हमला. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आपको रैट स्नेक दिखाई दे तो उससे सुरक्षित दूरी बनाए रखें और उसे छेड़ने की कोशिश न करें. बिना वजह किसी भी सांप को मारना सही नहीं है. रैट स्नेक पर्यावरण का अहम हिस्सा है और चूहों जैसे कीटों की संख्या नियंत्रित रखने में बड़ी भूमिका निभाता है.
यानी ‘चिकन स्नेक’ नाम सुनकर डरने की जरूरत नहीं है. ये सांप मुर्गी के कुछ अंडे जरूर खा सकता है, लेकिन इंसानों के लिए जहरीला नहीं माना जाता. सही जानकारी ही सांपों से जुड़ी गलतफहमियों को दूर कर सकती है.

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