बरेली। राष्ट्रीय खेल दिवस मैदान पर जीत का जश्न भर नहीं, बल्कि उन खिलाड़ियों के हौसले और जज्बे को नमन करने का दिन है, जिन्होंने अभावों और चुनौतियों के बीच भी अपने सपनों की दौड़ जारी रखी। सृष्टि, अंजलि और अल्तमश जैसे युवा खिलाड़ी बता रहे हैं कि सुविधाओं की कमी कदम रोक सकती है, लेकिन जुनून और मेहनत मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोकते। मुख्यमंत्री खेल पुरस्कार से सम्मानित होंगे अल्तमश
फोटो अजय 300, वॉलीबॉल खिलाड़ी अल्तमश
बरेली के गांव पीरबोड़ा निवासी युवा वॉलीबॉल खिलाड़ी अल्तमश का चयन मुख्यमंत्री खेल पुरस्कार योजना के तहत 35 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के लिए हुआ है। इस्लामिया इंटर कॉलेज में कक्षा नौ के छात्र अल्तमश के पिता मुन्ने दुकान चलाते हैं और मां गृहणी हैं। एसजीएफआई इंटर-स्कूल राष्ट्रीय वॉलीबॉल प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक विजेता यूपी टीम का हिस्सा रह चुके हैं। उन्होंने छठी कक्षा से वॉलीबॉल खेलना शुरू किया। सब-जूनियर वर्ग में लगातार दो बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता में यूपी का प्रतिनिधित्व किया। जनवरी 2026 में हिमाचल प्रदेश में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में यूपी टीम ने स्वर्ण पदक जीता। राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में कांस्य पदक जीतने के साथ वह नेशनल कैंप में भी हिस्सा ले चुके हैं। वर्तमान में कोच व पूर्व राष्ट्रीय खिलाड़ी शाहिद रजा के मार्गदर्शन में आगामी ट्रायल की तैयारी कर रहे हैं।
बरेली। चोटों का डर और परिवार की बंदिशें भी सृष्टि के हॉकी जुनून को नहीं रोक सकीं। उनके पिता बृजेश कुमार मिठाई कारीगर और मां रेखा गृहणी हैं। सृष्टि ने संघर्षों के बीच हॉकी में अपनी पहचान बनाई है। शुरुआत एथलेटिक्स से हुई, लेकिन मैदान पर बच्चों को हॉकी खेलते देख इस खेल से जुड़ गईं। स्कूल के बाद स्टेडियम में घंटों अभ्यास कर सृष्टि ने तीन नेशनल और तीन रीजनल टूर्नामेंट खेले हैं। केंद्रीय विद्यालय की ओर से अंडर-14 और हाल ही में अंडर-17 नेशनल में कांस्य पदक विजेता टीम का हिस्सा हैं। कई बार चोटिल होने के बावजूद उनका हौसला नहीं टूटा। अब सृष्टि ओपन नेशनल में दम दिखाकर भारतीय टीम की जर्सी पहनना चाहती हैं। देश के लिए खेलना ही उनका सबसे बड़ा सपना है।
कासगंज के भोपालगढ़ी गांव की अंजलि यादव ने अभावों को पीछे छोड़ एथलेटिक्स में राष्ट्रीय पहचान बनाई है। कभी गांव की चकरोड पर नंगे पैर दौड़ने वाली अंजलि राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में दो स्वर्ण और एक कांस्य पदक जीत चुकी हैं। गैस एजेंसी में नौकरी करने वाले पिता जगदीश सिंह ने सीमित संसाधनों के बावजूद बेटी के सपने को पूरा करने में पूरा सहयोग दिया। टीवी पर एशियन गेम्स देखकर एथलीट बनने का सपना देखने वाली अंजलि ने नवंबर 2025 में अलीगढ़ स्टेडियम में प्रशिक्षण शुरू किया। जून-जुलाई 2026 से वह बरेली में सिंथेटिक ट्रैक पर रोजाना पांच से छह घंटे अभ्यास कर रही हैं। प्रयागराज फेडरेशन कप में 100 मीटर हर्डल्स का कांस्य और जयपुर राष्ट्रीय प्रतियोगिता में 100 व 200 मीटर के स्वर्ण जीतने के बाद अब सितंबर की जूनियर नेशनल पर नजर है।
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