मॉब लिंचिंग मामले में अज्ञात के खिलाफ एफआईआर – Live Hindustan

मॉब लिंचिंग मामले में अज्ञात के खिलाफ एफआईआर परिजनों ने गांव के ही चार दोस्तों पर साजिश का लगाया आरोप घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी कैमरों से आरोपितों की पहचान कर रही पुलिस बिहारशरीफ, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि राजगीर मॉब लिंचिंग मामले में राजगीर थाना में दर्जनों अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर की गयी है। पुलिस घटनास्थल के आस-पास लगे सीसीTV कैमरों व लोगों से पूछताछ कर आरोपितों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
इधर, चिकित्सकों की मानें तो दोनों युवकों के शरीर के अंदरुनी हिस्सों में गंभीर चोटें लगी थी। अंदरुनी रक्स्राव भी हुआ था। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही यह पता चलेगा कि युवकों की मौत कैसे हुई थी। इधर, परिजनों ने गांव के ही चार युवकों पर साजिश के तहत हत्या करने का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि गांव के ही सुभाष, आशिक, कृष्णा व आकाश नाम के लड़कों के साथ दोनों युवक मेला घूमने गये थे। उन्होंने जाते-जाते कहा था कि रात को या सुबह घर वापस लौट जाएंगे। दोनों मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालते थे। चोरी का गलत आरोप लगाया गया है।
दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई : एसपी भारत सोनी ने बताया कि सोमवार की तड़के पुलिस को सूचना मिली थी कि दो युवकों के साथ मारपीट की गयी थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और उन्हें अस्पताल पहुंचाया। विशेष सुरक्षा के साथ दोनों को इलाज के लिए पटना भेजा गया। वहां उनकी मौत हो गयी। इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राजगीर थाने में प्राथमिकी की गयी है। विशेष जांच दल का गठन किया गया है। दोषियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
सोमवार की तड़के तीन बजे राजगीर के झुनकिया बाबा मंदिर के पास लोगों ने दो युवकों को पकड़ लिया। उन्हें पीटकर अधमरा कर दिया। इलाज के दौरान दोनों युवकों की मौत हो गयी। दोनों पर मंदिर परिसर में चोरी करने का आरोप लगाया गया था। मृतकों में दीपनगर थाना क्षेत्र के गंजपर गांव निवासी पिंटू पासवान और श्रवण पासवान शामिल थे। दोनों चचेरे भाई बताये जाते हैं।
अधिवक्ता ब्रजेश सिंह ने इस मामले की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में की है। उन्होंने बताया कि चोरी के शक में बेकाबू भीड़ ने दो लोगों की जान ले ली। कानून को सौंपने की बजाय इन्हें बेरहमी से पीटा गया। स्थानीय पुलिस के पहुंचने में देर हुई। यह घटना जीवन के मौलिक अधिकार का गंभीर उल्लंघन है और कानून द्वारा स्थापित न्यायिक प्रक्रिया की पूरी तरह से अनदेखी करती है। स्थानीय प्रशासन भीड़ द्वारा हिंसा और लिंचिंग को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत ज़रूरी खुफिया जानकारी जुटाने और बचाव के उपाय करने में विफल रहा। इस मामले में आयोग संज्ञान ले और बिहार के डीजीपी को निश्चित समय सीमा के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट भेंजने का आदेश दे। दोषियों के खिलाफ हत्या, मॉब लिंचिंग और एससी-एसटी एक्ट की सख्त धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाया जाए। पीड़ित परिवारों को तत्काल आर्थिक मुआवजा दिया जाए। (बिहारशरीफ से अमित कुमार)
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