Yuvraj Singh
Date: 14-10-26 18:01
उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनाव को लेकर चल रही लंबी कानूनी लड़ाई पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने राज्य में तीन महीने के भीतर ग्राम पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया है. पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के फैसले को लेकर अदालत में चुनौती दी गई थी. फिलहाल निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक बने रहेंगे. कोर्ट के इस आदेश के बाद प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियों और आगे की प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिक गई हैं.
इलाहाबाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुनाया. बेंच में जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद शामिल थे. अदालत ने करीब तीन घंटे की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. पंचायत चुनाव से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई 8 अक्टूबर को पूरी हुई थी, जबकि पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से दाखिल हलफनामे को भी अदालत ने रिकॉर्ड पर लिया था.
सरकार के 25 मई के फैसले को दी गई थी चुनौती
इस मामले में हाईकोर्ट के सामने कुल 11 याचिकाएं दाखिल की गई थीं, जिनमें छह जनहित याचिकाएं भी शामिल थीं. याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश सरकार के 25 मई के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसके तहत ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया था. याचिकाओं में समय पर पंचायत चुनाव नहीं कराए जाने पर भी सवाल उठाए गए थे. मामले में राज्य सरकार के साथ पंचायती राज विभाग के अधिकारियों और संबंधित जिला प्रशासन के अधिकारियों को भी पक्षकार बनाया गया था.
OBC आयोग की रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने उठाए थे सवाल
पंचायत चुनाव से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट पर भी असंतोष जताया था. 9 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इसे जमीनी स्तर पर जाकर तैयार नहीं किया गया. अदालत ने कार्यालय में बैठकर रिपोर्ट बनाए जाने पर भी आपत्ति जताई थी. इसके बाद आयोग की रिपोर्ट और पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को लेकर कानूनी बहस और तेज हो गई थी.
तीन महीने में चुनाव कराने का आदेश, अब आगे क्या?
हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनाव को लेकर तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हुई है. अदालत ने तीन महीने के भीतर चुनाव कराने का निर्देश दिया है, जबकि फिलहाल निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक की जिम्मेदारी निभाते रहेंगे. अब राज्य सरकार और संबंधित चुनावी तंत्र को निर्धारित समयसीमा के भीतर आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इस फैसले का असर प्रदेश की हजारों ग्राम पंचायतों और स्थानीय राजनीति पर पड़ सकता है.
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