नई दिल्ली। रामलीला के मंच पर अब संवादों का अंदाज बदल रहा है। संस्कृतनिष्ठ हिंदी और कठिन शब्दों की जगह ऐसे आसान शब्दों और अंग्रेजी के वाक्यों को जगह दी जा रही है, जिन्हें आज की युवा पीढ़ी यानी जेन-जी आसानी से समझ सके। मकसद है कि मोबाइल, सोशल मीडिया और अंग्रेजी के माहौल में पली-बढ़ी इस पीढ़ी को उसकी भाषा के जरिये भगवान राम की कथा, उनके आदर्शों और जीवन मूल्यों से जोड़ा जा सके। राजधानी की लव कुश रामलीला और श्री भामाशाह रामलीला ने इस दिशा में संवादों में नए प्रयोग किए हैं।
लाल किले पर आयोजित होने वाली ऐतिहासिक लव कुश रामलीला ने जेन-जी के मिजाज को देखते हुए इस बार संवादों की भाषा में बदलाव किया है। रामलीला के मंचन में हे प्रभु की जगह ओ माय गॉड जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर नई पीढ़ी को उसकी भाषा के जरिये जोड़ने की कोशिश है। इसी तरह आपकी आज्ञा शिरोधार्य है की जगह आपका आदेश मुझे स्वीकार है और मैं आपकी सहायता के लिए तत्पर हूं की जगह मैं आपकी मदद के लिए तैयार हूं सरीखे सरल वाक्यों को संवादों में शामिल किया गया है।
भगवान राम के जन्म से जुड़े प्रसंग में माहौल की जगह वाइब्स शब्द का प्रयोग किया हुआ है। इसी तरह शक्ति के लिए पावर, नायक के लिए रियल हीरो, सम्मान के लिए रेस्पेक्ट और सोच के लिए माइंडसेट जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं, अयोध्या लौटने के प्रसंग के संवाद में वापसी की जगह कमबैक शब्द जगह दी गई है। लव कुश रामलीला के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने बताया कि इन बदलावों का उद्देश्य रामलीला की मूल कथा और उसके धार्मिक भाव को बदले बिना संवादों को समझना आसान बनाना है। पात्रों की गरिमा और प्रसंग की गंभीरता का ध्यान रखते हुए भाषा को सहज बनाने की कोशिश की गई है।
नई थीम, नई शब्दावली
इसी तरह महिला सशक्तीकरण को समर्पित आईपी एक्सटेंशन स्थित श्री भामाशाह पिंक रामलीला ने अपनी नई थीम के साथ नई शब्दावली से संवादों को सरल बनाया है। यहां हे अनुज और हे भ्राता की जगह मेरे भाई, हे देवी जानकी की जगह ‘सीता मां, प्रणिपात स्वीकार करो की जगह प्रणाम स्वीकार करो, आज्ञा प्रदान करें की जगह ‘आदेश दीजिए और मैं प्रस्थान कर रहा हूं की जगह मैं जा रहा हूं जैसे सहज वाक्यों का इस्तेमाल किया जा रहा है। श्री भामाशाह रामलीला की अध्यक्ष विनीता ने बताया कि रामकथा को मौजूदा दौर के दर्शकों के अनुकूल प्रस्तुत करने के लिए ऐसे बदलाव जरूरी हैं। केवल भव्य मंच, आकर्षक वेशभूषा और आधुनिक तकनीक ही नहीं, बल्कि संवादों की भाषा भी दर्शकों को बांधे रखने में अहम भूमिका निभाती है। आयोजकों का मानना है कि भाषा जितनी सहज होगी, युवा दर्शक उतनी आसानी से रामकथा से जुड़ सकेंगे।
—–
हिन्दुस्तान भारत का एक प्रतिष्ठित हिंदी समाचार-पत्र है, जिसकी स्थापना 1936 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी। स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को समेटे यह प्रकाशन आज भारत के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले हिंदी समाचार-पत्रों में दूसरे स्थान पर है। WAN-IFRA के अनुसार, 2016 में ‘हिन्दुस्तान’ विश्व के शीर्ष 13 सर्वाधिक प्रसारित अखबारों में शामिल था। हर रोज 5 राज्यों सहित देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर (नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम) में 23 संस्करण प्रकाशित होते हैं। ‘पाठक सर्वोपरि’ हिन्दुस्तान की संपादकीय नीति है। समय पर, शोध और गहन खोजबीन के बाद विस्तार से न्यूज रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है। हर खबर में सभी पक्षों और दृष्टिकोणों को संतुलित रूप से पेश किया जाता है।
आरएसएसविज्ञापन र॓टहमार॓ साथ काम करेंहमारे बारे मेंसंपर्क करेंगोपनीयतासाइट जानकारी
Advertise with usAbout usCareers Privacy Contact usSitemapCode Of Ethics
Partner sites: Hindustan TimesMintHT TechShineHT AutoHealthshotsHT SmartcastFAB Play