रूस का वो शहर, जिसके लिए छिड़ सकता है विश्व युद्ध! मॉस्को ने NATO को दी चेतावनी, जानें क्यों है अहम – Bharat24live

Shubham Raja
Date: 29-09-26 15:22
Russia NATO Conflict: रूस ने कालिनिनग्राद को लेकर NATO को कड़ी चेतावनी दी है. मॉस्को का कहना है कि अगर NATO ने कालिनिनग्राद को रूस के बाकी हिस्सों से अलग करने या उसे घेरने की कोशिश की, तो यह सीधे सैन्य टकराव की वजह बन सकता है. रूस ने साफ किया है कि वह इस इलाके की सुरक्षा के लिए अपने सैन्य संसाधनों का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा.
कालिनिनग्राद रूस का ऐसा इलाका है, जो मुख्य रूसी जमीन से अलग है. यह बाल्टिक सागर के किनारे पोलैंड और लिथुआनिया के बीच स्थित है. अपनी खास भौगोलिक स्थिति के कारण यह रूस के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इसे रूस के पश्चिमी हिस्से का बड़ा सैन्य केंद्र भी माना जाता है.
रूस ने NATO को क्या चेतावनी दी?
रूस की यह चेतावनी बेल्जियम स्थित रूसी दूतावास की ओर से सामने आई है. यह दूतावास NATO और बेल्जियम के साथ रूस के राजनयिक संपर्कों से जुड़े मामलों को देखता है. रूसी अधिकारियों ने NATO और बेल्जियम के विदेश मंत्रालय के सामने कालिनिनग्राद को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है. मॉस्को का कहना है कि अगर NATO देश इस क्षेत्र को रूस के बाकी हिस्सों से अलग करने की कोई कोशिश करते हैं, तो इसे रूस के खिलाफ सीधी आक्रामक कार्रवाई माना जाएगा.
रूस ने यह भी कहा है कि उसके पास किसी भी संभावित हमले का जवाब देने के लिए पर्याप्त सैन्य क्षमता मौजूद है. मॉस्को का दावा है कि जरूरत पड़ने पर वह कालिनिनग्राद की सुरक्षा के लिए अपने हथियारों और सैन्य ताकत का इस्तेमाल कर सकता है.
NATO की गतिविधियों से क्यों बढ़ी रूस की चिंता?
रूस की यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब कालिनिनग्राद के पास NATO की सैन्य गतिविधियां बढ़ी हैं. करीब एक महीने पहले उत्तर-पूर्वी पोलैंड में एक बड़ा हवाई अभ्यास किया गया था.
इस अभ्यास में अमेरिका और नॉर्वे के लड़ाकू विमान शामिल हुए थे. इसके अलावा NATO का E-3A सेंट्री AWACS निगरानी विमान, हवा में ईंधन भरने वाले विमान और अमेरिकी EA-37B इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर विमान भी इसमें शामिल थे.
बताया गया कि इस अभ्यास में करीब 25 से 50 विमानों ने हिस्सा लिया था. रूस इन गतिविधियों को कालिनिनग्राद के आसपास बढ़ते सैन्य दबाव के तौर पर देख रहा है. मॉस्को को चिंता है कि अगर भविष्य में NATO की सैन्य गतिविधियां और बढ़ती हैं और कालिनिनग्राद को रूस से अलग-थलग करने की कोई कोशिश होती है, तो स्थिति काफी गंभीर हो सकती है.
कालिनिनग्राद इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
कालिनिनग्राद बाल्टिक सागर के किनारे स्थित रूस का एक छोटा लेकिन बेहद अहम इलाका है. इसके एक तरफ पोलैंड और दूसरी तरफ लिथुआनिया है. दोनों ही NATO के सदस्य हैं. सबसे खास बात यह है कि कालिनिनग्राद रूस की मुख्य भूमि से सीधे जुड़ा हुआ नहीं है.
यह रूस के बाकी हिस्सों से सैकड़ों किलोमीटर दूर है. इसके बावजूद रूस के लिए इसकी रणनीतिक अहमियत काफी ज्यादा है. यही वजह है कि रूस और NATO के बीच तनाव में कालिनिनग्राद का नाम अक्सर सामने आता है.
कालिनिनग्राद का इतिहास क्या है?
आज का कालिनिनग्राद पहले जर्मनी का हिस्सा था और इसे कोनिग्सबर्ग के नाम से जाना जाता था. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह इलाका सोवियत संघ के नियंत्रण में आ गया. 1946 में इसका नाम बदलकर कालिनिनग्राद कर दिया गया. 
बाद में सोवियत संघ के खत्म होने के बाद भी यह क्षेत्र रूस का हिस्सा बना रहा. यह करीब 15,100 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और रूस के मुख्य हिस्से से अलग होने के कारण इसे रूसी एक्सक्लेव कहा जाता है.
रूस के लिए सैन्य तौर पर कितना अहम है?
कालिनिनग्राद की सबसे बड़ी खासियत इसकी लोकेशन है. यहां से रूस को बाल्टिक सागर में अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखने में मदद मिलती है. रूस के बाल्टिक फ्लीट का प्रमुख सैन्य अड्डा भी इसी क्षेत्र में है. इसके अलावा यहां मिसाइल सिस्टम, रडार और दूसरे सैन्य ठिकाने मौजूद हैं.
इसी वजह से कालिनिनग्राद को यूरोप के सबसे ज्यादा सैन्य गतिविधियों वाले इलाकों में गिना जाता है. रूस के लिए यह क्षेत्र सिर्फ एक जमीन का टुकड़ा नहीं है. यह यूरोप के करीब उसकी एक अहम सैन्य चौकी है, जहां से वह बाल्टिक सागर और आसपास के इलाकों पर नजर रख सकता है.
NATO के लिए भी क्यों महत्वपूर्ण है कालिनिनग्राद?
कालिनिनग्राद की लोकेशन NATO के लिए भी चिंता का विषय है. यह NATO के दो सदस्य देशों पोलैंड और लिथुआनिया के बीच स्थित है. NATO देशों का मानना है कि इस इलाके में मौजूद रूसी सैन्य क्षमता बाल्टिक क्षेत्र में समुद्री और हवाई गतिविधियों के लिए चुनौती पैदा कर सकती है.
यही वजह है कि कालिनिनग्राद लंबे समय से रूस और NATO के बीच रणनीतिक तनाव का एक अहम केंद्र बना हुआ है. फिलहाल रूस की ताजा चेतावनी के बाद एक बार फिर कालिनिनग्राद को लेकर चर्चा तेज हो गई है. मॉस्को साफ कर चुका है कि इस इलाके को रूस से अलग करने की किसी भी कोशिश को वह गंभीर सैन्य खतरे के तौर पर देखेगा.
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